यूपी के बुलंदशहर से ताल्लुक रखने वाले एक टीचर ने अपनी सैलरी से गर्ल स्टूडेंट्स के लिए टॉयलेट बनवाकर एक नजीर पेश की है. उनकी इस पहल के बाद स्कूल में छात्राओं की संख्या बढ़ी है. ये हैं बुलंदशहर के खानपुर क्षेत्र के लढ़ाना गांव के सरकारी स्कूल के अध्यापक सुनील कुमार दीक्षित, aajtak.in से बातचीत में उन्होंने बताया कि आखिर क्यों उन्होंने अपनी सैलरी से बनवाए ये टॉयलेट. ये है उनसे बातचीत के कुछ अंश.
सुनील कुमार ने बताया कि इसी साल फरवरी में केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया था कि देश भर में 37,956 स्कूल ऐसे हैं जहां लड़कियों के लिए शौचालय नहीं हैं. मुझे ये सुनकर बेहद दुख हुआ. मुझे ये भी पता चला कि उत्तर प्रदेश में भी ऐसे 745 सरकारी स्कूल हैं जो शौचालय की समस्या से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात से बेहद प्रभावित रहा हूं जिसमें वो अक्सर स्वच्छता की बात करते हैं.
फोटो: सुनील कुमार को सम्मानित करते यूपी के राज्यपाल श्रीराम नाइक
सुनील का कहना है कि स्वच्छता पूरे समाज की जिम्मेदारी है ना कि सिर्फ सरकार की. मन की बात से प्रेरित होकर उन्होंने उस सरकारी स्कूल में टॉयलेट बनवाए जहां वो पढ़ाते हैं. वो कहते हैं कि इस स्कूल में करीब 800 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, जिसमें आधी के करीब छात्राएं हैं. स्कूल में इन सभी बच्चियों के लिए सिर्फ एक शौचालय था. इसलिए लंच के समय बड़ी लाइन लगती थी.
फिर ऐसे बढ़ी अटेंडेंस
वो कहते हैं कि स्कूल में लड़कियों की समस्या कहीं ज्यादा थी. कई लड़कियां तो शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पाती थीं. गंदगी और बदबू के चलते लड़कियां कई बार उल्टी तक कर देती थीं.
कई छात्राएं इस समस्या के चलते स्कूल आना बंद कर देती थीं तो कई छात्राएं बीमार भी हो जाती थी. छात्राओं की इसी समस्या को देखकर टीचर सुनील कुमार दीक्षित ने अपनी सैलरी से करीब 80 हजार रुपये लगाकर पांच टॉयलेट बनवा दिए.
सुनील कुमार कहते हैं कि मैंने इस साल स्वतंत्रता दिवस से पहले लड़कियों के लिए टॉयलेट बनवाकर असल मायने में उन्हें मानसिक रूप से आजादी का तोहफा दिया है. मेरे लिए इससे बड़ी देश सेवा कोई और नहीं हो सकती थी. स्कूल में पांच टॉयलेट बन जाने के बाद से लड़कियों की अटेंडेंस में काफी सुधार आ गया है.
उन्होंने बताया कि अब पांचों शौचायल में साफ-सफाई और पानी का इंतजाम भी है. उनका मानना है कि देश की बेटियां तभी आगे बढ़ेंगी जब उन्हें बेहतर माहौल मिलेगा. इसके लिए दूसरे लोग भी मेरा उत्साहवर्द्धन कर रहे हैं. मेरे मन में ये भी था कि अगर मैं इन बच्चों के लिए कुछ करूंगा तो भविष्य में उनके लिए भी ये शिक्षा होगी. अगर कहीं ये बच्चे टीचर बनते हैं या अन्य क्षेत्र में जाते हैं तो ये भी कुछ ऐसा कर सकेंगे.
शौचालयों का उद्धाटन जिला विद्यालय निरीक्षक आरके तिवारी ने किया. टीचर की इस पहल पर बुलन्दशहर के डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार ने ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि ‘एक शिक्षक के जज्बे को सलाम, जिन्होने अपने तनख्वाह से महिला शौचालय बनवाया.’ इससे पहले भी सुनील कुमार दीक्षित लोगों के चंदा आदि लेकर सभी कक्षाओं में पंखे भी लगवा चुके हैं.