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एजुकेशन

150 साल पुराने इस स्कूल में ट्रेन के डिब्बे में लगेगी क्लास! जानें वजह

मानसी मिश्रा
  • 18 जून 2019,
  • अपडेटेड 10:00 AM IST
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बच्चों को सबसे ज्यादा प्यारी होती है ट्रेन, फिर उसी ट्रेन में अगर क्लास लगने लगे तो कहने ही क्या. मदुरै के एक स्कूल में बच्चों के क्लास रूम को ट्रेन के डिब्बे में ही बदल दिया गया. अपने स्कूल के इस बदलाव को देखकर बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. इस बदलाव के पीछे की कहानी जानें. फोटो: एएनआई

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यूके के एजुकेशन सिस्टम के पैटर्न की तरह ही भारत में भी पढ़ाई को मजेदार बनाने की पहल शुरू हुई है. इस नई पहल के तहत बच्चों के क्लासरूम को ट्रेन के डिब्बे का लुक दे दिया गया है. चेन्नई में मदुरै के उच्चतर माध्यमिक स्कूल के बच्चों के लिए इस स्कूल को अलग तरह से डिजाइन किया गया है.

फोटो: एएनआई

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स्कूल में बच्चों के एडमिशन की संख्या बढ़ाने के लिए यह बदलाव किया गया है. एएनआई की ओर से जारी फोटो में दिखाया गया है कि किस तरह स्कूल की कक्षाओं को ट्रेन कंपार्टमेंट में बदल दिया गया है.

फोटो: एएनआई

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यह स्कूल मदुरै रेलवे स्टेशन के पास मीनाक्षी बाजार में है. इस 150 साल पुराने स्कूल में 2000 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं. स्कूल में सिर्फ प्राइमरी सेक्शन में 100 स्टूडेंट हैं. यह ट्रेन कुछ इस तरह डिजाइन की गई है जैसे ये मदुरै से चेन्नई की ओर जा रही हो.

(प्रतीकात्मक फोटो)

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यूके (United kingdom) में हैं बस स्कूल:

इससे पहले यूके में दो कक्षाओं को एक पुरानी डबल डेकर बस के आकार में डिजाइन किया जा चुका है. एक अनुमान के मुताबिक यूके में एक क्लासरूम बनाने के लिए 15000 पौंड तक लागत लगती है, जबकि क्लासरूम बसों को स्कूल में पार्क कर दिया जाता है.

(प्रतीकात्मक फोटो)

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ट्रक स्कूल ने भी कमाया नाम: इससे पहले सेफ एजुकेट फर्म की को-फाउंडर व सीईओ दिव्या जैन ने बिहार में ट्रक क्लासरूम का प्रयोग किया था. उन्होंने बड़े कंटेनर्स को रंग बिरंगी, एअर कंडीशंड क्लासरूम में बदल दिया. ये सोलर पॉवर से चलते थे. 
(प्रतीकात्मक फोटो)

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परंपरागत तरीकों से पढ़ा रहे स्कूलों ने क्लासरूम के स्तर पर कई बदलाव किए हैं. देश भर में कई स्कूल ऐसे हैं जो टेंट या तंबू में चल रहे हैं, वहीं एक वर्ग के लिए एअर कंडीशंड क्लासरूम की सुविधा है. ऐसे में इस तरह की खबरें राहत देने वाली हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो)

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