क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड? जिसकी वजह से UAE ने ब्रिटेन में पढ़ने वाले अपने स्टूडेंट्स की फंडिंग में की कटौती

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ब्रिटेन के बीच मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर काफी समय से चल रहे तनाव का असर अब शिक्षा क्षेत्र में साफ दिखने लगा है. तनाव के चलते अब यूएई सरकार ने ब्रिटेन में पढ़ाई करने वाले अपने इच्छुक उम्मीदवार को दी जाने वाली सरकारी फंडिंग और स्कॉलरशिप में कटौती करने का फैसला किया है. ये फैसला उन छात्रों पर ज्यादा प्रभाव डालेगा, जो सरकारी सहायता के भरोसे ब्रिटेन के विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं.

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 UAE ने ब्रिटेन में पढ़ने वाले नागरिकों की फंडिंग में की कटौती. (Photo: Pexels) UAE ने ब्रिटेन में पढ़ने वाले नागरिकों की फंडिंग में की कटौती. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:03 PM IST

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ब्रिटेन के बीच तनाव अब खुलकर सामने आने लगे हैं. इसका असर वहां के नागरिकों पर तो पड़ेगा ही लेकिन सबसे ज्यादा अगर ब्रिटेन में पढ़ने वाले यूएई छात्रों पर पड़ने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि यूएई सरकार ने ब्रिटेन के विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए सरकारी फंडिंग और स्कॉलरशिप में कटौती करने का फैसला किया है. यह कदम दोनों देशों के बीच मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर चल रही असहमति को देखते हुए लिया गया है. 

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यूएई सरकार ने ऐलान किया है कि अब वह ब्रिटेन के उन विश्वविद्यालयों को अपनी मान्यता वाली लिस्ट नें शामिल नहीं करेगा, जिनके लिए सरकारी फंडिंग दी जाती थी. 

मुस्लिम ब्रदरहुड बना सबसे बड़ा कारण 

यूएई ने ये फैसला मुस्लिम ब्रदरहुड की वजह से लिया है. इसे लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव देखने को मिल रहा है. एक ओर जहां, यूएई मुस्लिम ब्रदरहुड को कट्टरपंथी संगठन मानता है और इसपर प्रतिबंध भी लगा चुका है. तो वहीं, ब्रिटेन ने अब तक मुस्लिम ब्रदरहुड पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया है. ऐसे में यूएई अधिकारियों का मानना है कि ब्रिटेन में स्थित विश्वविद्यालय में इससे जुड़ी विचारधारा को जगह मिल सकती है. 

छात्रों पर पड़ेगा असर 
|इस फैसले का सीधा असर ब्रिटेन में पढ़ने वाले यूएई छात्रों पर पड़ेगा. जो भी छात्र वहां पर पढ़ाई करना चाहते हैं, उन्हें अब सरकारी मदद नहीं मिल पाएगी. अब सिर्फ वहीं छात्र ब्रिटेन जा सकेंगे जिनके परिवार उनके पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम हैं. यूएई से बड़ी संख्या में छात्र ब्रिटेन पढ़ने जाते हैं. 

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दोनों देशों के बीच रहे हैं अच्छे संबंध 
यूएई और ब्रिटेन के बीच लंबे टाइम से व्यापार, रक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में मजबूत संबंध रहे हैं. लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और वैचारिक मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं. इसकी वजह मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर बनी असहमति है. ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि मुस्लिम ब्रदरहुड आखिर है क्या. 

क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड? 
मुस्लिम ब्रदरहुड एक मूवमेंट या विचारधारा है. यह अरब जगत का सबसे पुराना इस्लामिक पॉलिटिकल ग्रुप है. वैसे कुछ अरब देशों में इसे आधिकारिक राजनीतिक दल के रूप में काम करने की अनुमति नहीं है. इसकी स्थापना 1928 में मिस्र में हसन अल-बन्ना नामक एक इस्लामी विद्वान और शिक्षक ने की थी. उनका मकसद एक सार्वभौमिक इस्लामी शासन प्रणाली का निर्माण करना था, जिसके तहत ऐसे समाज का निर्माण हो सके, जहां इस्लामी कानूनों और नैतिकता को बढ़ावा मिल सके. 

मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा मुख्य रूप से अरब जगत में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं में सुधार पर केंद्रित है. यह राजनीतिक सक्रियता और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचार को अपनाती है. साथ ही इनके समर्थक जो निम्न आय वाली बहुसंख्यक आबादी है, उन तक पहुंचने के लिए धर्मार्थ कार्यों और सामाजिक सहायता कार्यक्रमों का आयोजन करती है.

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