संघ लोक सेवा आयोग की ओर से UPSC CSE 2025 के परिणामों की घोषणा कर दी गई है. इस दौरान पंजाब के जिला फरीदकोट के ग्रीन एवेन्यू निवासी सुनावरदीप सिंह ने यूपीएससी परीक्षा में 76वां रैंक हासिल किया है. उनके इस उपलब्धि से पूरे परिवार और इलाके में खुशी का माहौल है. उनके घर बधाइयों का तांता लगा हुआ है.
सुनावरदीप सिंह के पिता डा. कुलदीप सिंह पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में कृषि विकास केंद्र में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं जबकि उनकी माता डा.गगनदीप कौर स्थानीय सरकारी बृजेंद्रा कालेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं.
कहां से की पढ़ाई
बता दें कि सुनावरदीप ने अपनी शुरुआती पढ़ाई फरीदकोट के दशमेश पब्लिक स्कूल से की है. इसके बाद उन्होंने पुणे से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. बीटेक करने के बाद उन्होंने मास्टर डिग्री के लिए पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया, जहां फार्म मशीनरी में एमटेक करते हुए पीपीएससी का एग्जाम क्लियर किया. इसके बाद से साल 2023 में सहकारी विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त हुए. लेकिन इसके बावजूद सुनावरदीप सिंह ने आईएएस करने के लक्ष्य को कभी फीका नहीं पड़ने दिया. सुनावरदीप सिंह ने पहली बार 2022 और फिर 2024 में भी प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाए. लेकिन तीसरी बार में उन्होंने ऑल इंडिया 76वां रैंक हासिल किया. जिसके बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.
सफलता के बाद क्या बोले सुनावरदीप सिंह?
परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद सुनावरदीप सिंह ने कहा कि उन्हें जो पद मिला है वे उसका उपयोग करके इसका कद को और ऊंचा करना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि जिन्हें सच में जरूरत है उनके लिए काम कर सकें. उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय सबसे पहले भगवान को फिर माता-पिता और दोस्तों को दिया. सुनावरदीप सिंह ने यह भी कहा कि वह पंजाब में रहना चाहते हैं लेकिन कैडर पॉलिसी के अनुसार जहां भी पोस्टिंग मिलेगी वे वहां करेंगे.
मां हो गई इमोशनल
सुनावरदपी सिंह की मां डा. गगनदीप कौर ने कहा कि बहुत मान और खुशी महसूस हो रही है इस शानदार उपलब्धि के लिए. यह उसकी सच्ची लगन और कड़ी मेहनत ही थी कि वह इस मुकाम पर पहुंचा.
बचपन से जो सोचा पूरा किया...
सुनावरदीप सिंह के पिता डा. कुलदीप सिंह ने बताया कि वह बचपन से ही जो सोचता था, उसे पूरा करके रहता था. पेंटिंग के फील्ड में राज्य स्तरीय मुकाबले तक पहुंचा और पुरस्कार जीता. यही कारण है कि जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसे इंस्पेक्टर बनने के बाद भी नहीं छोड़ा. हमने इसके द्वारा देखे गए सपने को पूरा करने में इसकी मदद की है. अब गर्व है कि उसने यह मुकाम हासिल किया.
प्रेम पासी