शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब के स्कूलों ने मारी बाजी, भगवंत मान ने पेश की रिपोर्ट 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज “शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल” श्रृंखला के तहत पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति का चार सालों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया.  इस रिपोर्ट कार्ड में बताया गया कि लगातार सुधारों के बाद सरकारी स्कूल धीरे-धीरे मॉडल संस्थानों में बदल रहे हैं और देशभर में इसके शानदार नतीजे सामने आ रहे हैं. 

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Punjab school education report (Photo :ITG) Punjab school education report (Photo :ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह ने पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति  के चार साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया. रिपोर्ट में बताया गया कि लगातार सुधारों के चलते सरकारी स्कूल अब धीरे-धीरे मॉडल स्कूल में बदल रहे हैं और इन बदलाव के शानदार नतीजे पूरे देश में देखने को मिल रहे हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘शिक्षा क्रांति’ पंजाब के विकास की रीढ़ की हड्डी बन चुकी है. राष्ट्रीय मूल्यांकन में पंजाब को शीर्ष रैंकिंग मिली है, सरकारी स्कूलों में जीरो पेपर लीक, रिकॉर्ड शैक्षणिक नतीजे और बुनियादी ढांचे और शिक्षक ट्रेनिंग में बड़े निवेश किए गए हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए बजट में लगातार वृद्धि की गई है. 2021-22 में शिक्षा बजट 12,657 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 19,279 करोड़ रुपये कर दिया गया है. 

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सरकारी स्कूलों में हो रहा है सुधार 

इस दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों के बराबर सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं. 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 60 पहले ही कार्यशील हैं. इन स्कूलों में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार पढ़ाई करवाई जा रही है. 

  • विद्यार्थियों की उपलब्धियां: 740 ने JEE पास किया, 1,284 ने NEET परीक्षा पास की. सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय औसत से 18% अधिक अंक हासिल किए. 
  • सुविधाएं: मुफ्त मेडिकल और नॉन-मेडिकल स्ट्रीम की पढ़ाई, आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी, NEET, JEE और CLAT जैसी परीक्षाओं के लिए कोचिंग. 
  • लड़कियों के लिए सुविधाएं: मुफ्त बस सेवा, लगभग 15,500 विद्यार्थियों को लाभ. 

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्कूल और उच्च शिक्षा में किए गए व्यापक सुधारों की रूपरेखा पेश की, जिसमें पिछले चार सालों में किए गए ढांचागत सुधार, रिकॉर्ड निवेश और नतीजों को उजागर किया गया. उन्होंने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देने वाले देशों ने हर क्षेत्र में तरक्की की है. हमारे देश में शिक्षा को निजी और सरकारी स्कूलों में बांट दिया गया था, जिससे शिक्षा में गहरा खाई पैदा हो गई. पिछली सरकारों ने स्कूलों को सिर्फ मिड-डे मील के केंद्रों तक सीमित कर दिया था, लेकिन हमारी सरकार ने पूरी व्यवस्था को बदल दिया है. 

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1 अप्रैल से मिलेगी सुविधाएं 

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अप्रैल से माता-पिता को उनके बच्चे की स्कूल से अनुपस्थिति और शिक्षकों की छुट्टी के बारे में भी सूचित किया जाएगा, जिससे हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी. पहले ‘स्मार्ट स्कूल’ के नाम पर लोगों और मासूम बच्चों को गुमराह किया गया था. स्कूलों को सिर्फ पेंट करके सुंदर बनाया जाता था, लेकिन उनमें उचित सुविधाएं या शिक्षकों की कमी रहती थी. आज पंजाब के सरकारी स्कूल निजी संस्थानों के बराबर खड़े हैं और हमारे शिक्षा मॉडल की चर्चा पूरे देश में हो रही है. 

उपलब्धियों पर क्या बोले भगवंत सिंह मान?

मुख्य उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2024 में पंजाब ने केरल को भी पछाड़कर पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि गुजरात 16वें और हरियाणा लगभग 7वें या 8वें स्थान पर है. यह उपलब्धि हमारे सरकारी स्कूल के शिक्षकों और विद्यार्थियों की है. पहली बार 24 लाख माता-पिता ने मेगा पी.टी.एम. में हिस्सा लिया है. उन्होंने आगे कहा कि अप्रैल 2022 से 14,525 शिक्षकों की भर्ती की गई है और शिक्षा विभाग के 12,316 कर्मचारियों की सेवाएं रेगुलर की गई हैं. क्षमता निर्माण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए 264 शिक्षा अधिकारियों, प्रिंसिपलों और शिक्षकों के आठ बैच सिंगापुर भेजे गए हैं. साथ ही 216 प्राइमरी शिक्षकों के तीन बैच फिनलैंड के तुर्कू में प्रशिक्षण के लिए भेजे गए. पांच बैच आई.आई.एम. अहमदाबाद भेजे गए, जहां 249 मुख्य शिक्षकों ने लीडरशिप प्रशिक्षण प्राप्त किया. 

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बुनियादी ढांचे और सुरक्षा

सरकारी स्कूलों में सुरक्षा और रखरखाव पर ध्यान दिया गया. इसके तहत 1,932 कैंपस मैनेजर, 1,323 सुरक्षा गार्ड, 7,876 सफाई कर्मचारी, 1,792 चौकीदार की भर्ती की गई है. 

  • डिजिटल सुविधा: सभी स्कूलों में 20 करोड़ रुपये के बजट से हाई-स्पीड फाइबर वाई-फाई. 
  • नए निर्माण: क्लासरूम, साइंस लेब, कंप्यूटर लैब, बहुउद्देशीय कमरे, रसोई, मेडिकल रूम, खेल मैदान, लड़कों-लड़कियों के शौचालय. 
  • पाठ्य सामग्री: किताबें समय पर उपलब्ध, मुफ्त वर्दियां. 
  • नामकरण: 25 सरकारी स्कूलों का नाम शहीदों और प्रमुख व्यक्तित्वों के नाम पर. 

 

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