नीट (NEET UG) की परीक्षा 3 मई को होनी है. कायदे से इस वक्त घरों में चर्चा रिवीजन की रणनीतियों और मन को शांत रखने पर होनी चाहिए थी, लेकिन देश भर के लाखों घरों में एक अलग ही तरह की बेचैनी पल रही है. यह घबराहट प्रश्न पत्र या ऊंचे कट-ऑफ को लेकर नहीं है, बल्कि उस 'सिस्टम' को लेकर है जिससे जूझकर एक छात्र को परीक्षा हॉल के भीतर कदम रखना है.
करीब 24 लाख छात्र इस परीक्षा में बैठने जा रहे हैं. जहां बच्चों को अपनी पढ़ाई पर फोकस करना चाहिए, वहीं उनके माता-पिता बुनियादी लेकिन बेहद जरूरी सवालों के जवाब तलाश रहे हैं. एक अभिभावक प्रशांत झिंगरन ने 26 अप्रैल को एक ऐसा ही सवाल उठाया, जो आज हर मां-बाप के मन में है, उन्होंने पूछा कि अगर परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल हो गया, तो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पास बैकअप प्लान क्या है?.
प्रशांत, जो खुद 'वीजा डायरेक्ट' में ऊंचे पद पर हैं, कहते हैं कि उन्होंने ईमेल से लेकर ट्वीट और चिट्ठी तक लिख डाली है. उनकी चिंता जायज है क्योंकि पिछले साल फिंगरप्रिंट न मिलने, गेट पर देरी होने और बिजली गुल होने जैसी समस्याओं ने छात्रों को पैनिक में डाल दिया था. नीट जैसी परीक्षा में, जहां हर मिनट कीमती है, वहां तकनीकी खामी की सजा छात्र क्यों भुगतें?
कोटा से दिल्ली तक एक ही डर
कोटा में अपनी बेटी की तैयारी करवा रही वैष्णवी शर्मा कहती हैं कि उन्हें अपनी बच्ची की मेहनत पर पूरा भरोसा है, लेकिन डर इस बात का है कि अगर सेंटर पर फिंगरप्रिंट मैच नहीं हुआ तो क्या उसे पूरा समय मिलेगा? वैष्णवी जैसे कई माता-पिता सिर्फ सिस्टम के 'तैयार' होने का इंतजार कर रहे हैं.
वहीं, दिल्ली के संजीव वर्मा सेंटर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हैं. उनका कहना है कि हर साल खराब वेंटिलेशन और भीड़भाड़ जैसी खबरें आती हैं, तो आखिर प्रशासन पहले से साफ-साफ सब कुछ बताता क्यों नहीं?
NTA की सलाह: आधी राहत, आधी आफत
NTA ने एक एडवाइजरी जारी कर छात्रों को अपना आधार बायोमेट्रिक अपडेट करने और वेरिफिकेशन का वीडियो देखने की सलाह दी है. चेतावनी साफ है कि अगर डेटा मैच नहीं हुआ, तो सेंटर पर एंट्री में देरी या दिक्कत हो सकती है. छात्रों ने इसे गंभीरता से लिया है और अपनी डिटेल्स अपडेट भी की हैं. लेकिन माता-पिता का सवाल अब भी वहीं खड़ा है कि अगर छात्र ने सब कुछ सही किया और फिर भी सिस्टम फेल हो गया, तब क्या होगा?.
बता दें कि पिछले साल की वो कड़वी यादें आज भी ताजा हैं जब बायोमेट्रिक की छोटी सी गलती ने छात्रों का कीमती समय खा लिया था. नीट सिर्फ एक एग्जाम नहीं है, बल्कि 24 लाख बच्चों के लिए डॉक्टर बनने का इकलौता रास्ता है. परिवार सालों तक इसके लिए प्लानिंग करते हैं.
आज जब छात्र फिजिक्स और बायोलॉजी के फार्मूले रट रहे हैं, उनके पीछे माता-पिता की एक ही दुआ है कि बस उस दिन सब कुछ सही से हो जाए. माता-पिता कोई खास रियायत या आसान पेपर नहीं मांग रहे, वे बस एक पारदर्शी और पुख्ता सिस्टम मांग रहे हैं, जहां किसी तकनीकी खराबी की कीमत उनके बच्चे के भविष्य से न वसूली जाए.
दीबाश्री मोहंती