अमेरिका में किस तरह होती है पढ़ाई? इन स्किल्स पर होता है फोकस   

भारत के एजुकेशन सिस्टम से तो आप परिचित होंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में किस तरह से पढ़ाई करवाई जाती है और वहां का एजुकेशन पैटर्न क्या है. वहां पर रटने की लर्निंग पर फोकस नहीं किया जाता है बल्कि इसके बजाय समझकर पढ़ने पर फोकस किया जाता है.

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भारत से कितना अलग है अमेरिका का एजुकेशन सिस्टम. (Photo : Pexels) भारत से कितना अलग है अमेरिका का एजुकेशन सिस्टम. (Photo : Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:46 PM IST

भारत के एजुकेशन सिस्टम से तो आप अच्छी तरह परिचित होंगे, जहां पढ़ाई का फोकस अक्सर सिलेबस,परीक्षा और अच्छे नंबर लाने पर रहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका में पढ़ाई का तरीका इससे काफी अलग है? वहां, शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती. अमेरिका का एजुकेशन पैटर्न इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर बच्चा अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सके. यहां स्कूलों में रटने के बजाय समझकर याद करने पर (Concept-Based Learning) पर ज्यादा जोर दिया जाता है. यानी बच्चे सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि समझते हैं, सवाल पूछते हैं और अपने विचार खुलकर व्यक्त करते हैं. 

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क्या है अमेरिका का स्कूल सिस्टम?

अमेरिका में स्कूल शिक्षा को मुख्य रूप से तीन पार्ट में बांटा गया है- 

  • एलीमेंट्री स्कूल (कक्षा 1–5) – इस स्तर पर बच्चों को मैथ, इंग्लिश और साइंस जैसी बेसिक पढ़ाई जाती हैं. 
  • मिडिल स्कूल (कक्षा 6–8)– यहां विषयों की गहरी समझ और नए स्किल विकसित करने पर फोकस किया जाता है. 
  • हाई स्कूल(कक्षा 9–12) – बच्चों को करियर और आगे की पढ़ाई के लिए तैयार किया जाता है. 

पढ़ाई का तरीका भी होता है अलग 

अमेरिका में पढ़ाई रटने यानी कि Rote Learning पर निर्भर नहीं होता है. वहां पर समझकर यानी Concept-Based Learning अपनाई जाती है. साथ ही प्रोजेक्ट, प्रेजेंटेशन और ग्रुप वर्क पढ़ाई का अहम हिस्सा है. क्लास में चर्चा और सवाल पूछने को बढ़ावा दिया जाता है. साथ ही, स्पोर्ट्स, म्यूजिक और आर्ट्स को भी पढ़ाई का अहम हिस्सा माना जाता है. 

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टीचिंग स्टाइल

भारत के क्लासरूम में छात्र ज्यादा सुनते हैं लेकिन अमेरिकी टीचर सिर्फ पढ़ाने के लिए नहीं जाते हैं बल्कि गाइड की तरह बच्चों की मदद करते हैं. वे बच्चों को खुद सोचने, सवालों का जवाब ढूढंने के लिए प्रेरित करते हैं. इससे बच्चों में आत्मनिर्भरता और क्रिएटिविटी बढ़ती है. 

ग्रेडिंग सिस्टम भी है बहुत अलग 

भारत में पढ़ाई अच्छे नंबरों और रैंक पर फोकस करता है लेकिन अमेरिका में नंबरों पर ज्यादा फोकस नहीं किया जाता है. इसके बजाय ग्रेड (A, B, C) दिए जाते हैं. मूल्यांकन केवल फाइनल एग्जाम पर नहीं बल्कि पूरे साल के असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और टेस्ट के बेसिस पर किया जाता है. कुछ स्कूलों में GPA (Grade Point Average) सिस्टम भी होता है. 

 

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