बीती 26 फरवरी को, जेएनयू छात्र संघ ने जेएनयू की कुलपति द्वारा की गई जातिवादी टिप्पणी के खिलाफ प्रदर्शन किया. इस प्रोटेस्ट में यूनिवर्सिटी के फंड में कटौती, छात्रसंघ के पदाधिकारियों को निकालने और UGC इक्विटी रेगुलेशंस के साथ-साथ रोहित एक्ट को लागू करने की मांग उठी. इस प्रोटेस्ट में छात्रों ने मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन तक 'लॉन्ग मार्च' का आह्वान किया था. बता दें कि जेएनयू कुलपति ने एक पॉडकास्ट में टिप्पणी दी थी कि हमेशा पीड़ित बन कर रहने से प्रगति नहीं होतीी.ये टिप्पणी कई छात्रों को जाातिवादी लगी जिस पर कुलपति ने सफाई भी दी थी.
आरोप है कि सैकड़ों छात्रों की लोकतांत्रिक सभा के बावजूद, दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के VC के साथ मिलकर, प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बेरहमी से और हिंसक हमला किया, जिसमें दर्जनों छात्र बुरी तरह घायल हो गए, उनके शरीर पर चोट के निशान थे और खून बह रहा था. JNUSU प्रेसिडेंट अदिति, सेक्रेटरी गोपिका और जॉइंट सेक्रेटरी दानिश के साथ-साथ आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा और 50 अन्य छात्रों को 14 घंटे से ज़्यादा समय तक पुलिस स्टेशन में रखा गया. एक लोकतांत्रिक प्रदर्शन पर हिंसक कार्रवाई के बाद, दिल्ली पुलिस ने इनमें से 14 छात्रों को गिरफ्तार किया है और FIR में सेक्शन 212, 121(1), 132, 3(5) लगाए हैं.
यह सब किसलिए?
सवाल ये है कि ये सब किसलिए, सोशल जस्टिस की मांग के लिए, अच्छी शिक्षा की मांग के लिए, डेमोक्रेसी की मांग के लिए! जेएनयू छात्रसंघ का कहना है कि दिल्ली पुलिस किसे बचाने की कोशिश कर रही है? दिल्ली पुलिस की हिंसक कार्रवाई - गिरफ्तारी से लेकर सादे कपड़ों में अराजक तत्वों को भेजने तक, यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स पर बेरहमी से हमला करने तक, VC और BJP सरकारों की ब्राह्मणवादी सोच को दिखाता है जो हर कीमत पर अपने मनुवादी एकाधिकारों की रक्षा कर रहे हैं. हालांकि, उनके जानबूझकर किए गए हमले उनकी हताशा को भी दिखाते हैं.
क्या हैं छात्रों की मांगें
रोहित एक्ट के साथ रेगुलेशन लागू करें.
जातिवादी JNU VC अविलंब माफी मांगे और इस्तीफा दें.
नई शिक्षा नीति 2020 वापिस लो.
सिद्धांता फाउंडेशन वापस जाओ.
सार्वजनिक शिक्षा में फंड कट नहीं चलेगा.
उस दिन क्या हुआ?
11 AM: JNUSU का दावा कि कैंपस के अंदर RAF तैनात
12 NOON: JNUSU ने प्रदर्शन का आह्वान किया
3 PM: औपचारिक रूप से प्रदर्शन शुरू
4 PM: प्रदर्शनकारी मुख्य गेट तक पहुंचे
4:15 PM: दिल्ली पुलिस के साथ धक्का-मुक्की शुरू
4:30 PM: पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लेना शुरू किया
6:30 PM: JNUSU ने SOS कॉल जारी कर छात्रों से मौके पर जुटने की अपील की
10:30 PM: पुलिस ने गैर-जमानती धाराओं में FIR दर्ज की
11 PM: JNUSU ने वसंत कुंज नॉर्थ थाने तक मार्च का ऐलान किया (कैंपस के भीतर ही रोका गया)
7:30 AM: 14 प्रदर्शनकारियों की औपचारिक गिरफ्तारी
9:30 AM: गिरफ्तार छात्रों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, न्यायिक हिरासत की मांग
क्या है पुलिस का पक्ष
प्रदर्शन मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी. प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी कर रहे सरकारी अधिकारियों पर हमला किया. 2 ACP और 2 SHO सहित 25 पुलिसकर्मी घायल हुए, इसलिए 51 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया अैर 14 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया.
अंशुल सिंह