2026 में भारत में व्हाइट-कॉलर जॉब मार्केट में धीरे-धीरे ही सही लेकिन कई महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, जो नौकरी में तेजी के बजाय बाजार धीरे-धीरे संतुलित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं. इंफो एज (इंडिया) लिमिटेड की जॉबस्पीक इंडेक्स रिपोर्ट (जनवरी 2026) के अनुसार, व्हाइट-कॉलर नौकरियों में सालाना आधार पर 3% की बढ़ोतरी हुई है. यह संकेत देता है कि नौकरी बाजार फिर से स्थिर विकास की ओर बढ़ रहा है. यह सुधार मुख्य रूप से गैर-आईटी सेक्टर में बढ़ती नौकरियों और फ्रेशर्स की हायरिंग में सुधार के कारण है. वहीं, पारंपरिक आईटी सेक्टर में भर्ती अब भी धीमी है, जो बताता है कि भारत में रोजगार बाजार में बड़ा बदलाव हो रहा है.
फाइनेंशियल कंडीशन में सुधार
बता दें कि जनवरी 2026 में जॉबस्पीक इंडेक्स के 2,637 नंबरों पर पहुंचने के साथ व्हाइट-कॉलर हायरिंग की शुरुआत हुई, जो जनवरी 2025 में 2,550 से अधिक है. 3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि एक ऐसे बाजार का संकेत देती है जो लंबे समय तक अस्थिरता के बाद स्थिर हो रहा है, हालांकि अभी तक इसमें तेजी नहीं देखी जा रही है लेकिन बदलाव हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक धीमी और सावधानी से हो रही सुधार प्रोसेस है. कंपनियां बड़े पैमाने पर हायरिंग के बजाय जरूरत के हिसाब से चुनिंदा पोस्ट पर ही लोगों को रख रही है.
विकास की रफ्तार
सबसे ज्यादा बढ़त गैर-आईटी सेक्टर में देखने को मिली है. यहीं सेक्टर अब हायरिंग बढ़ने का मुख्य कारण बन रहा है.
हेल्थकेयर सेक्टर में 5 प्रतिशत बढ़त दर्ज की गई. हालांकि, सभी सेक्टर में सुधार नहीं हुआ है. बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज में 15% की गिरावट आई है, जिससे पता चलता है कि हर क्षेत्र में स्थिति एक जैसी नहीं है.
आईटी सेक्टर में ऐसा है हाल
जनवरी में आईटी सेक्टर में कुल नौकरियां लगभग स्थिर रहीं, यानी इसमें ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई. लेकिन एक क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और वह है एआई और मशीन लर्निंग से जुड़ी नौकरियां. इनमें पिछले साल की तुलना में 34% की बढ़ोतरी हुई है.
क्या बढ़ रही है फ्रेशर्स की मांग?
रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेशर्स के लिए नौकरियों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है. कुल मिलाकर फ्रेशर्स की हायरिंग में सालाना 8% की बढ़ोतरी हुई है, यानी 0-3 साल के अनुभव वाले लोगों के लिए नए अवसर बढ़ रहे हैं.
गैर-आईटी सेक्टर में फ्रेशर्स की बढ़ती मांग-
पिछले तीन महीनों की लगातार बढ़त दिखाती है कि कंपनियां सिर्फ तुरंत काम के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में योग्य कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए भी निवेश कर रही हैं.
क्या गैर-मेट्रो शहर रोजगार के नए केंद्र बन रहे हैं?
हायरिंग के आंकड़े दिखाते हैं कि अब नौकरियों केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. कोयंबटूर में हायरिंग में सालाना 16% की बढ़ोतरी हुई. यह आंकड़ा जयपुर में15 फीसदी रहा. हैदराबाद में कुल हायरिंग में 10% की वृद्धि हुई, जिसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) में 14% का योगदान रहा. अहमदाबाद जैसे शहर में भी फ्रेशर्स की मांग बढ़ रही है.
भारत के रोजगार बाजार पर इसका असर
जनवरी के आंकड़े दिखाते हैं कि नौकरी बाजार धीरे-धीरे बदल रहा है. कुल हायरिंग में सिर्फ 3% की मामूली बढ़त हुई है, जो कंपनियों के सतर्क रवैये को दिखाती है. यह बढ़त ज्यादातर गैर-आईटी सेक्टर की वजह से हो रही है, जबकि पारंपरिक आईटी नौकरियां अभी भी स्थिर हैं. एआई और मशीन लर्निंग जैसी नई स्किल वाली नौकरियां पारंपरिक तकनीकी जॉब्स से कहीं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे मांग में बड़ा बदलाव नजर आता है.
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