न मिसाइल हमले- न ट्रंप की धमकी का डर... ईरान में प्रोफेसर ने खंडहर में बैठकर ली क्लास, दुनिया को दिया मैसेज

यह खबर केवल एक क्लास की नहीं है, बल्कि उस 'रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध) की है जो शिक्षा के जरिए दी जा रही है. जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय राजनीति में धमकियों का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ ये शिक्षक मलबे के बीच बैठकर 'कल का ईरान' तैयार कर रहे हैं. यह तस्वीर बताती है कि इमारतें फिर बन सकती हैं, लेकिन अगर हौसला टूट गया, तो देश कभी खड़ा नहीं हो पाएगा.

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मिसाइल से जर्जर बिल्डिंग और लैपटॉप पर क्लास! ईरान के इस प्रोफेसर के जज्बे ने दुनिया को किया हैरान(Photo: Aajtak.in/Screengrab) मिसाइल से जर्जर बिल्डिंग और लैपटॉप पर क्लास! ईरान के इस प्रोफेसर के जज्बे ने दुनिया को किया हैरान(Photo: Aajtak.in/Screengrab)

aajtak.in

  • तेहरान,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:00 PM IST

वाह ईरान! शरीफ यून‍िवर्स‍िटी में मिसाइल हमले के बाद भी चल रही क्लास, दुन‍िया को मैसेज क्ल‍ियर है? युद्ध की विभीषिका इमारतों को ढहा सकती है, लेकिन क्या वो ईरान को रोक नहीं सकती, न लड़ने से, न पढ़ने से, और न ही सीखने के जुनून को खत्म कर सकती है. 

आज ईरान की प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से आई एक तस्वीर इस सवाल का सबसे सशक्त जवाब है. जिस आईटी और कम्युनिकेशन सेंटर को 'अमेरिकी-ज़ायोनी आतंकी हमले' (US-Zionist attack) ने मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था, उसी खंडहर की एक मेज पर बैठकर यूनिवर्सिटी के आईटी हेड और गणित के प्रोफेसर ने अपनी ऑनलाइन क्लास ली.

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जब टूटने के बाद भी नहीं रुके कदम
इंसान तब टूट जाता है जब उसकी आंखों के सामने उसकी मेहनत से खड़ी की गई इमारतें जमींदोज हो जाती हैं. शरीफ यूनिवर्सिटी का आईटी सेंटर, जो कभी ईरान की तकनीकी प्रगति का चेहरा था, आज मलबे का ढेर है. 'अमेरिकी-ज़ायोनी' हमले के बाद वहां सन्नाटा होना चाहिए था, लेकिन वहां गूंज रही थी 'मैथ्स' की थ्योरम्स.

(VIDEO : TASNIM NEWS)

यूनिवर्सिटी के आईटी हेड और गणित के प्रोफेसर ने उसी खंडहर की एक टूटी मेज पर अपना लैपटॉप जमाया और ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी. यह सिर्फ एक लेक्चर नहीं था, बल्कि उन धमकियों को जवाब था जो ईरान के भविष्य को अंधकार में धकेलना चाहती हैं.

ट्रंप की धमकी और 'साइकोलॉजिकल वॉर'
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की जो खुली धमकी दी है, उसने वहां के नागरिकों में एक गहरा मानसिक दबाव पैदा कर दिया है. युद्ध का डर जब घर कर जाता है, तो लोग अक्सर घरों में दुबक जाते हैं या पलायन कर जाते हैं. लेकिन शरीफ यूनिवर्सिटी के इन शिक्षकों ने यह साबित कर दिया कि जब इंसान अंदर से मजबूत हो, तो बड़ी से बड़ी 'मिसाइल' भी उसकी कलम नहीं रोक सकती.

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