दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े और बेहद शातिर हाईटेक नकल रैकेट का खुलासा किया है, जिसने पुलिस भर्ती परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है. करीब दो महीने तक चली जांच के बाद इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ, जिसमें अब तक कम से कम 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस रैकेट में 3 पुलिसकर्मी भी शामिल पाए गए हैं. यह गिरोह कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल भर्ती परीक्षाओं में तकनीक के जरिए धांधली कर रहा था और उम्मीदवारों से लाखों रुपये वसूल रहा था.
जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल रिमोट एक्सेस और वर्चुअल ऐप्स के जरिए चलाया जा रहा था. परीक्षा केंद्रों पर बैठे उम्मीदवार सिर्फ दिखावे के लिए कंप्यूटर के सामने बैठते थे, जबकि असली परीक्षा कहीं और बैठे सॉल्वर दे रहे होते थे. ये सॉल्वर रिमोट डेस्कटॉप ऐप्स के जरिए परीक्षा के कंप्यूटर से कनेक्ट होकर सवाल देखते और तुरंत सही जवाब भर देते थे.
उम्मीदवार नहीं दे रहे थे परीक्षा
उम्मीदवार को सिर्फ ऐसा दिखाना होता था कि वही परीक्षा दे रहा है, ताकि किसी को शक न हो।इस रैकेट की सबसे खतरनाक बात यह थी कि इसमें अंदरूनी मिलीभगत भी शामिल थी. परीक्षा केंद्र के टेक्नीशियन और स्टाफ ने कंप्यूटर सिस्टम में छेड़छाड़ की और अनऑथराइज्ड सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए. इसके जरिए एक तरह का डिजिटल ब्रिज तैयार किया गया, जिससे बाहर बैठे सॉल्वर सीधे परीक्षा सिस्टम तक पहुंच सकें. यहां तक कि नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर्स ने जानबूझकर फायरवॉल और सिक्योरिटी सिस्टम को बायपास किया, ताकि यह पूरा खेल बिना किसी रुकावट के चलता रहे.
लेते थे लाखों रुपये
गिरोह उम्मीदवारों से इस सेटअप के बदले भारी रकम वसूलता था. हर उम्मीदवार से करीब 10 से 15 लाख रुपये तक लिए जाते थे. कई मामलों में गिरोह उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट अपने पास गिरवी रख लेते थे और पूरी रकम मिलने के बाद ही उन्हें वापस करते थे. इस पूरे नेटवर्क में पैसों का लेन-देन भी बेहद गुप्त तरीके से किया जाता था, ताकि कोई सबूत न मिले.
दिल्ली पुलिस ने चलाया जांच
दिल्ली पुलिस ने इस रैकेट को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर जांच की. करीब 200 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, 100 से ज्यादा फोन रिकॉर्ड्स की जांच की गई और डिजिटल चैट और मैसेज के जरिए पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया गया. इस दौरान कई राज्यों में छापेमारी की गई और दर्जनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जिनमें परीक्षा केंद्र के मालिक, एडमिनिस्ट्रेटर और तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं.
दिल्ली तक नहीं सीमित...
जांच में यह भी सामने आया कि यह रैकेट सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान तक फैला हुआ था. यानी यह एक संगठित मल्टी-स्टेट नेटवर्क था, जो लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में धांधली कर रहा था. इस मामले में आईजीआई एयरपोर्ट थाने में तैनात एक पुलिसकर्मी सहित तीन पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस
यह परीक्षा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन के माध्यम से आयोजित की जा रही थी और इस खुलासे के बाद SSC ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है. अब परीक्षा केंद्रों के प्रोटोकॉल को और मजबूत बनाने की तैयारी की जा रही है, साथ ही यह भी जांच हो रही है कि कहीं अन्य केंद्रों पर भी इसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई. फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. कुछ आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी चल रही है. इसके अलावा पूरे रैकेट के फाइनेंशियल ट्रेल को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस धांधली से कितने उम्मीदवारों को फायदा पहुंचा और कितनी बड़ी रकम का लेन-देन हुआ. कुल मिलाकर यह मामला सिर्फ नकल का नहीं, बल्कि सिस्टम में गहरी सेंध का है. इस हाईटेक रैकेट ने यह दिखा दिया है कि अगर अंदरूनी लोग ही शामिल हो जाएं, तो किसी भी सुरक्षित माने जाने वाले सिस्टम को भी आसानी से तोड़ा जा सकता है.
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अरविंद ओझा