इन दिनों देशभर में यूजीसी के नए इक्विटी रूल को लेकर घमासान मचा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर स्टे लगा दिया है. ऐसे में ये समझने की जरूरत है कि यूजीसी को ऐसे रेगुलेशन बनाने की शक्तियां कहां से मिली है. आखिर वो कौन से नियम और कानून हैं, जो इस विधायी निकाय को इतना शक्तिशाली बनाते हैं.
आज यूजीसी के जिस नए रेगुलेशन पर विवाद हो रहा है, उसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट 1956, के सेक्शन 12 के क्लॉज- j और सेक्शन 26 के सब सेक्शन 1 के क्लॉज - G के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है. ऐसे में ये जानना जरूरी है यूजीसी को रूल्स और रेगुलेशंस बनाने की शक्तियां कहां से मिलती हैं. इसके लिए पहले समझते हैं कि यूजीसी का गठन क्यों, कैसे और किस उद्देश्य से हुआ और किस कानून के तहत इसकी स्थापना हुई.
यूजीसी का गठन कैसे हुआ
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन यूजीसी एक्ट 1956(3) के तहत की गई. इसमें विश्वविद्यालयों के स्टैंडर्ड्स को तय करने और उन्हें को-ऑर्डिनेट करने के लिए एक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना का प्रावधान है. यह अधिनियम भारतीय गणराज्य के सातवें वर्ष यानी की 1956 में संसद द्वारा बनाया गया था.
इसी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 (3) की धारा 25 द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, केंद्र सरकार इस एक्ट की धारा 25 के सबसेक्शन (2) के क्लॉज (a), (b) और (c) में बताए गए मामलों में नियम बनाती है. इसी के मुताबिक आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति, सेवा और रिटायरमेंट का प्रावधान है. इन नियमों के मुताबिक सिर्फ आयोग का स्ट्रक्चर तय होता है. यहां असल मुद्दा पावर का है कि आखिर यूजीसी को रूल्स और रेगुलेशंस बनाने की शक्ति किस कानून के तहत मिलती है.
यहां से मिलती है यूजीसी को नियम और अधिनियम बनाने की शक्ति
दरअसल, यूजीसी एक्ट 1956 के सेक्शन 25 में नियम बनाने की और सेक्शन 26 के तहत अधिनियम बनाने की शक्तियां दी गई है. वहीं यूजीसी एक्ट 1956 के सेक्शन 12 में पावर एंड फंक्शन ऑफ कमीशन का प्रावधान है. यानी यूजीसी एक्ट के इन सेक्शन में दी गई शक्तियों के तहत ही यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग कोई भी अधिनियम और नियम बना सकता है. एक्ट के इन तीन सेक्शन से ही यूजीसी को ऐसी शक्तियां मिलती हैं.
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यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में समानता का माहौल बनाने के लिए यूजीसी जो नया इक्विटी रूल लेकर आया था, उसे भी यूजीसी एक्ट 1956 के सेक्शन 12 और सेक्शन 26 में दिए गए प्रावधानों के मुताबिक की बनाया गया था. 13 जनवरी को प्रभावी होने के साथ ही इस नए रेगुलेशन का विरोध शुरू हो गया. इसके कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई. चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस नए रेगुलेशन पर फिलहाल स्टे लगा दिया है.
सिद्धार्थ भदौरिया