भारत में लगभग हर माता-पिता 'शर्मा जी का लड़का' का नाम कभी न कभी जरूर लेते हैं. वह वही अदृश्य बेंचमार्क है जो सही समय पर परीक्षा पास कर लेता है, बिना किसी मोड़ के वयस्कता में कदम रखता है और कॉलेज खत्म होते ही नौकरी भी पा लेता है. पैरेंट गर्व से कहते हैं देखो शर्मा जी का लड़का 22 की उम्र में नौकरी करने लगा, तुम अब तक क्या कर रहे हैं. यानी ये जैसे यह कोई वैज्ञानिक नियम हो,22 की उम्र तक तो पहली जॉब शुरू ही कर देना चाहिए.
धीरे-धीरे 22 की उम्र एक ऐसी आदर्श उम्र मानी जाने लगी.जहां इंसान न पूरी तरह बच्चा होता है, न पूरी तरह थका हुआ. पर क्या विज्ञान इस सोच को सही ठहराता है? स्टडी इसपर कुछ और कहती है और इसका जवाब इतना सीधा नहीं है.
बहुत जल्दी काम शुरू करना नुकसानदेह
कई इंटरनेशनल स्टडी में पाया गया है कि बहुत कम उम्र में फुल-टाइम काम शुरू करना खासकर पढ़ाई पूरी होने से पहले लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है. स्टडी बताते हैं कि बहुत जल्दी नौकरी शुरू करने से,एजुकेशन अधूरी रह जाती है, जीवनभर की कमाई कम होती है,तनाव और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं.इसीलिए दुनिया के अधिकतर देशों में नाबालिगों के फुल-टाइम काम पर रोक है, ताकि पढ़ाई पर असर न पड़े.
लेकिन पार्ट-टाइम काम की कहानी अलग है
यहीं पर आम धारणाएं गलत साबित हो जाती हैं.इटरनेशन स्टडी की समीक्षा करने वाले Organisation for Economic Co-operation and Development के अध्ययन के अनुसार, पढ़ाई के साथ हल्का-फुल्का पार्ट-टाइम काम करना फुल-टाइम नौकरी जैसा नहीं होता.अपने पॉलिसी ब्रीफ 'Teenage Part-Time Working' में OECD बताता है कि पढ़ाई के दौरान सीमित घंटे का काम कई बार कौशल विकसित करने का साधन बन जाता है.OECD के अनुसार, पार्ट-टाइम काम तब फायदेमंद होता है जब वह पढ़ाई में दखल न दे.
क्या स्किल्स बनते हैं?
शोध के अनुसार, स्टूडेंट्स में पार्ट-टाइम काम से अक्सर इन स्किल का विकास होता है. जैसे कम्युनिकेशन और इंटरपर्सनल स्किल,समय प्रबंधन और अनुशासन टीमवर्क और जिम्मेदारी समझाता है. करियर पसंद को समझने में मदद मिलती है पर साथ ही चेतावनी साफ है कि अगर काम के घंटे ज्यादा हो जाएं, तो तनाव बढ़ता है और पढ़ाई पर नेगेटिल असर पड़ता है.
तो 22 की उम्र कहां फिट होती है?
अधिकतर देशों में नौकरी का पैटर्न कुछ ऐसा होता है:
स्कूल के समय: थोड़ा-बहुत पार्ट-टाइम
शुरुआती 20s: पढ़ाई खत्म करके नौकरी ढूंढना
22–25: स्थिर फुल-टाइम करियर की शुरुआत
इसीलिए 22 उम्र को 'सही उम्र' माना जाने लगा क्योंकि इसी समय पढ़ाई खत्म होती है और लोग नौकरी के लिए तैयार रहते हैं.लेकिन वैज्ञानिक तौर पर टयही सही उम्र है.ऐसी कोई बात नहीं.
साइंस क्या कहता है?
शोध साफ संकेत देता है किपढ़ाई को जल्दी कमाई की वजह से त्यागना नुकसानदेह है.पढ़ाई के साथ सीमित पार्ट-टाइम काम लाभदायक हो सकता है. शिक्षा पूरी करने के बाद शुरू हुआ फुल-टाइम करियर (अक्सर शुरुआती 20s में) लंबे समय में बेहतर परिणाम देता है.इसलिए 'शर्मा जी का लड़का' 22 की उम्र में काम शुरू कर दे. इससे परेशान नहीं हो खुद के लड़के पर अनचाहा दबाव नहीं डाले. ये कोई नियम नहीं.
मेघा चतुर्वेदी