Republic Day 2023: दुनिया के हर आजाद देश का अपना एक झंडा होता है जो उसकी पहचान का प्रतीक है. असल में यह एक आजाद देश का प्रतीक है. 15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक के दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज को उसके वर्तमान स्वरूप में अपनाया गया था. यह 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच डोमिनियन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आया जो बाद में भारत गणराज्य का राष्ट्रीय ध्वज बना. भारत में, शब्द "तिरंगा" भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की आम जनमानस में पहचान है.
झंडे का डिजाइन
भारत के राष्ट्रीय ध्वज में समान अनुपात में तीनों रंग होते हैं. इसमें सबसे ऊपर गहरा केसरिया (केसरी), बीच में सफेद और नीचे गहरे हरे रंग का क्षैतिज तिरंगा है. झंडे की चौड़ाई और उसकी लंबाई का अनुपात दो से तीन होता है. सफेद पट्टी के केंद्र में गहरे नीले रंग का पहिया है जो चक्र का प्रतिनिधित्व करता है. इसका डिजाइन उस चक्र का है जो अशोक के सारनाथ सिंह शीर्ष के गणक पर दिखाई देता है. इसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तीलियां होती हैं.
क्या कहते हैं झंडे के रंग
तिरंगे के ये रंग यूं ही नहीं चुने गए, इन रंगों के चयन के पीछे गूढ़ अर्थ छुपे हुए हैं. भारत के राष्ट्रीय ध्वज में सबसे ऊपर की पट्टी केसरिया रंग की है. यह केसरिया रंग देश की ताकत और साहस को दर्शाती है. वहीं धर्म चक्र के साथ सफेद रंग की बीच की पट्टी हिंदुस्तान के मूल स्वरूप शांति और सच्चाई को दर्शाती है. इसकी अंतिम पट्टी का हरा रंग भारत भूमि की उर्वरता, वृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
चक्र क्या कहता है
इस धर्म चक्र ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाई गई सारनाथ शेर की राजधानी में "कानून का पहिया" दर्शाया. इस चक्र के जरिये ये दर्शाने की कोशिश की गई है कि गति में जीवन है और ठहराव में मृत्यु है.
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