प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान के बाद अब दिल्ली के वास्तुकार कहे जाने वाले लुटियंस और राजाजी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. दरअसल, पीएम मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 131वें एपिसोड में कहा कि अब ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा को राष्ट्रपति भवन से हटाया जाएगा. अब लुटियंस की जगह 'राजाजी' की मूर्ति लगाई जाएगी.
पीएम मोदी के इस बयान के बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर मूर्तियों की इस अदला-बदली का संदेश क्या माना जाए. ऐसे में जानते हैं कि आखिर राजाजी कौन थे, जो राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह लेंगे. बता दें कि 23 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में राजाजी उत्सव मनाया जाएगा. राजाजी उत्सव के दौरान 24 फरवरी से 1 मार्च तक सी. राजगोपालाचारी पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी.
राजाजी और राष्ट्रपति भवन का कनेक्शन
आजाद भारत के पहले गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी को 'राजाजी' कहा जाता है. अब राष्ट्रपति भवन में लुटियंस की जगह सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगाई जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में कहा था कि स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह स्थापित की जाएगी.
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने सी. राजगोपालाचारी को उन नेताओं में से एक बताया जिन्होंने सत्ता को पद नहीं बल्कि सेवा का एक रूप माना. पीएम मोदी ने कहा था कि राजगोपालाचारी का आचरण, संयम और सार्वजनिक जीवन में स्वतंत्र सोच आज भी हमें प्रेरित करती है.
राजाजी यानी सी. राजगोपालाचारी आजाद भारत के पहले और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल (1948–1950) थे. आज का राष्ट्रपति भवन ही गवर्नर-जनरल का आधिकारिक निवास था, जिसे पहले वायसरॉय हाउस कहा जाता था. यानी ब्रिटिश शासन में जिस भवन में वायसरॉय रहते थे, वहीं आजाद भारत में राजाजी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए बसे. यह औपनिवेशिक से स्वदेशी सत्ता-परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है.
ऐसे में इस बदलाव के जरिए संदेश दिया जा रहा है कि राष्ट्रीय प्रतीकों में औपनिवेशिक व्यक्तित्वों की जगह स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय नेतृत्व से जुड़े चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है.
राजाजी का योगदान
राजाजी को समाज सुधारक, महान विचारक, योग्य प्रशासक के रुप में जाना जाता है. उनका जन्म 10 दिसम्बर, 1878 को मद्रास प्रांत (आज का तमिलनाडु) के सेलम जिले के थोरापल्ली गांव में हुआ था. राजगोपालाचारी की प्रारम्भिक शिक्षा उनके गांव के स्कूल में ही हुई. उन्होंने सेंट्रल हिन्दू कॉलेज, बंगलौर से स्नातक डिग्री प्राप्त की और लॉ कॉलेज में प्रवेश लिया और उसके बाद वकालत शुरू की.
राजाजी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के उस आह्वान से बहुत प्रभावित हुए जिसमें उन्होंने प्रत्येक भारतीय को पूर्ण स्वराज के लिए अंग्रेजी साम्राज्य से लड़ने की अपील की थी। उन्होंने तिलक को अपना गुरु मान लिया. राजाजी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और उसके बाद जुलाई, 1917 में उन्हें सेलम नगरपालिका का चेयरमैन मनोनीत किया गया. इसके बाद राजाजी ने जनता के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए. राजगोपालाचारी एक छोटी सी कुटिया में रहते थे. 12 मार्च, 1930 को जब गांधी जी ने ऐतिहासिक दांडी मार्च की योजना बनाई तो मद्रास प्रांत में राजगोपालाचारी ने नमक कानून तोड़ने के लिये समुद्र तट की ओर एक लम्बी यात्रा का नेतृत्व किया.
इस दौरान उन्हें अरेस्ट कर 6 महीने के लिए जेल भेज दिया गया. इसके बाद राजाजी राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरे. वे 1937 में तत्कालीन मद्रास प्रांत के प्रधान मंत्री भी रहे. आजादी के बाद राजाजी को बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया. फिर 1947 में जब स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल लार्ड माउंटबेटन का कार्यकाल समाप्त हुआ, तो चक्रवर्ती राजाजी इस पद के लिए चुने गये.
फिर 1950 में सरदार पटेल के निधन के बाद राजगोपालाचारी गृह मंत्री नियुक्त किए गए. राजाजी को राष्ट्र के प्रति उनकी सराहनीय सेवाओं के लिए 1954 में 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया. वह इस सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किए जाने वाले पहले व्यक्ति थे. 25 दिसम्बर, 1972 को 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया.
कौन थे लुटियंस?
एडविन लुटियंस ब्रिटेन के प्रसिद्ध वास्तुकार थे, जिन्हें खास तौर पर भारत की राजधानी नई दिल्ली की डिजाइनिंग के लिए जाना जाता है. ब्रिटिश शासन ने 1911 में राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट करने का फैसला किया, तब नई दिल्ली की योजना और डिजाइन की जिम्मेदारी लुटियंस को दी गई. उन्होंने राष्ट्रपति भवन (तब वायसरॉय हाउस), नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और राजपथ क्षेत्र की योजना बनाई. इसी कारण दिल्ली का केंद्रीय प्रशासनिक इलाका आज भी “लुटियंस दिल्ली” कहलाता है.
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