इंग्लैंड के पूर्व राजकुमार एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को पिछले दिनों गिरफ्तार कर लिया गया था. उन पर बाल यौन शोषण करने वाले दोस्त जेफरी एपस्टीन को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, कुछ घंटे बाद ही उन्हें पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया. यह पहली बार नहीं है, जब इंग्लैंड के राजपरिवार के किसी सदस्य पर ऐसे आरोप लगे हैं और उन्हें गिरफ्तार किया गया है. इंग्लैंड का इतिहास एक ऐसी घटना का भी गवाह रहा है, जब वहां एक राजा पर राजद्रोह का मुकदमा किया गया और मौत की सजा सुनाई गई.
यहां इंग्लैंड के उस युग की बात हो रही है, जब 17वीं शताब्दी में गृहयुद्ध छिड़ गया था और वहां के राजा चार्ल्स प्रथम को गिरफ्तार, उनका सिर कलम कर दिया गया था. 30 जनवरी 1649 को लंदन में राजा चार्ल्स प्रथम को राजद्रोह के आरोप में फांसी दे दी गई थी. अपने पिता, राजा जेम्स प्रथम की मृत्यु के बाद, चार्ल्स 1625 में इंग्लैंड के सिंहासन पर बैठे थे.
किंग चार्ल्स फर्स्ट 1625-49 तक इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड के राजा रहे. राजाओं के दैवीय अधिकार (यह विचार कि सम्राट का अधिकार ईश्वर द्वारा प्रदत्त होता है) में अपने विश्वास के लिए जाने जाते थे. 16वीं शताब्दी में धर्म सुधार आंदोलन के बाद , प्रोटेस्टेंट और कैथोलिकों में टकराव शुरू हुआ. तब प्रोटेस्टेंट ने एक सिद्धांत दिया कि राजा अपनी सत्ता जनता से प्राप्त करते हैं और जनता को 'गलत' धर्म के किसी भी राजा को मारने का अधिकार है. वहीं जेम्स ने इसका खंडन करते हुए दावा किया कि राजाओं को उनकी सत्ता ईश्वर से प्राप्त होती है और इसलिए केवल ईश्वर ही उन्हें दंडित कर सकता है.
ऐसे छिड़ा था इंग्लैंड में गृह युद्ध
अपने शासनकाल के पहले वर्ष में ही चार्ल्स ने कैथोलिक फ्रांसीसी राजकुमारी हेनरीटा मारिया से विवाह करके अपने प्रोटेस्टेंट प्रजा को नाराज कर दिया था. इसके परिणामस्वरूप संसद में, जिस पर प्रोटेस्टेंट प्रभाव था. राजा की नीति का विरोध शुरू हो गया. तब किंग चार्ल्स ने अपने शासन के राजनीतिक विरोध का जवाब कई बार संसद भंग करके दिया और 1629 में पूरी तरह से संसद के बिना शासन करने का फैसला लिया. 1642 में राजा और संसद के बीच हुए टकराव को लेकर भीषण संघर्ष के कारण पहला अंग्रेजी गृहयुद्ध छिड़ गया.
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जब युद्ध छिड़ा, तब संसद का लंदन और इंग्लैंड की अधिकांश संपत्ति और जनसंख्या पर नियंत्रण था. कुछ समय के लिए उन्हें स्कॉटलैंड का समर्थन भी मिला. इन लाभों के बावजूद, चार्ल्स और उनकी राजशाही सेना को सैन्य रूप से हराने में उन्हें चार वर्ष लग गए. इसमें चार्ल्स को उनकी रानी से बहुत मदद मिली, जिन्होंने धन, सैनिक और हथियार जुटाए थे.
राजा का सिर कलम कर दी गई थी मौत की सजा
संसद सदस्यों की अगुआई ओलिवर क्रॉमवेल ने किया था, जिनकी शक्तिशाली आयरनसाइड्स सेना ने 1644 में मार्स्टन मूर और 1645 में नैस्बी में राजा की राजभक्त सेनाओं के खिलाफ जीत हासिल की. 1648 में, चार्ल्स को अपने कोर्ट के समक्ष पेश होने के लिए मजबूर किया गया, जहां उन्हें राजद्रोह का दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड दिया गया. एक साल बाद 30 जनवरी 1649 को लंदन में राजा चार्ल्स प्रथम को सिर कलम कर मौत की सजा दे दी गई थी.
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