जब चंगेज खान की बीवी को ही किडनैप कर ले गए थे दुश्मन, यहीं से शुरू हुआ उसका जंगी सफर

चंगेज खान जैसे खूंखार सैन्य कमांडर की पत्नी को भी दुश्मनों ने किडनैप कर लिया था. यह कहानी कम ही लोगों को पता होगी, लेकिन यही वो घटना थी, जहां से इस मंगोल सरदार के खून से सने जंगी सफर की शुरुआत हुई.

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चंगेज खान को अपनी बीवी के किडनैपर से करना पड़ा था जंग (Photo - Pexels) चंगेज खान को अपनी बीवी के किडनैपर से करना पड़ा था जंग (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:58 PM IST

चंगेज खान का जंग जीतने का सफर 40 वर्ष की आयु पार करने के बाद शुरू हुआ था. इससे पहले उसने कई असफलताओं का स्वाद चखा. एक समय उसकी जिंदगी मामूली से भी कमतर थी. फिर उसकी महत्वाकांक्षा ने हिलोरे मारना शुरू कर दिया. एक दिन अचानक उसके साथ ऐसी घटना घटी, जिसने उसे दुनिया का सबसे खूंखार सैन्य कमांडर बनने के रास्ते पर धकेल दिया. 

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1162 में एक कबीले के योद्धा सरदार के पुत्र के रूप में चंगेज खान का जन्म हुआ था. जन्म के वक्त उनका  नाम तेमुजिन रखा गया. 'द सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ़ मंगोल', जो मंगोलियाई भाषा में सबसे पुराना  साहित्यिक कार्य है और चंगेज खान की मृत्यु के तुरंत बाद लिखा गया था. इसमें जिक्र है कि उनके जन्म रक्त के थक्के के साथ हुआ था, जो इस बात का संकेत था कि वह एक बहादुर योद्धा बनेगा.

बुरे दौर से गुजरा था चंगेज खान का बचपन
बीबीसी के हिस्ट्रीएक्स्ट्रा के मुताबिक, अगर तेमुजिन महान बनने के लिए पैदा हुए थे, तो उनके शुरुआती जीवन में इसके कोई संकेत नहीं थे. आठ या नौ साल की उम्र में, उनके पिता को दुश्मन कबीले (तातार) वालों ने जहर दे दिया था. उन्हें और उनकी मां को उनके कबीले ने त्याग दिया और मंगोलिया के घास के मैदानों में भेज दिया. उस वक्त तेमुजिन की हालत ऐसी थी, जिसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वह आगे चलकर इतना बड़ा सैन्य कमांडर बन सकता है.

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13वीं शताब्दी के मंगोलिया में कबीलों के बीच की जंगी  प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में मित्रहीन होना कोई अच्छी बात नहीं थी. युवा तेमुजिन को यह अहसास हुआ कि अपनी किस्मत पलटने और अपने लिए एक मजबूत आधार बनाने का सबसे अच्छा तरीका दूसरे कबीलों के साथ दोस्ती और गठबंधन बनना था. इसके लिए शादी सबसे बढ़िया जरिया था. 

16 साल की उम्र में इस वजह से की थी शादी
महज 16 साल की उम्र में तेमुजिन ने ओल्खोनुद जनजाति की बोर्टे नामक लड़की से विवाह कर लिया. तेमुजिन ने कहा कि ऐसा करने के बाग बोर्टे भी मेरी थी और उसका कबीला भी मेरा था. तेमुजिन ने इस विवाह पर विजय का भाव व्यक्त कर दूसरे कबीलों के खिलाफ आगे की रणनीति बनाता. उससे पहले दुश्मन कबीला मेरकिट ने तेमुजिन पर घात लगाकर हमला किया और उनकी दुल्हन को अपने साथ ले गए.हिंसक और उग्र मंगोलियाई मैदानों में, विवाह करना भी मुसीबत का कारण बन सकता था. तेमुजिन और बोर्टे के विवाह के तुरंत बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ.

तेमुजिन बदला लेने के लिए बेताब था, लेकिन जानता था कि वह अकेले ऐसा नहीं कर सकता. ताक चाहने वालों को ताकतवर मित्रों की जरूरत होती है. 'द सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ़ मंगोल' में  लिखा है - इसलिए उसने एक और गठबंधन बनाने की कोशिश की. इस बार तोघरुल नामक एक शक्तिशाली मंगोलियाई नेता से हाथ मिलाने गया.  तेमुजिन ने तोघरुल को याद दिलाकर उसे अपने पक्ष में कर लिया कि वह उसके पिता के साथ लड़ा था. यह चाल कारगर साबित हुई.

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यह भी पढ़ें: चंगेज खां मुस्लिम नहीं थे... फिर वो किस धर्म को मानते थे, क्यों लगाते थे नाम के आगे 'खां'

तोघरुल के योद्धाओं की सहायता से, तेमुजिन ने मेरकिट जनजाति पर हमला किया और अपनी पत्नी को वापस पा लिया. चंगेज खान ने किताब में बताया है कि हमने उनके परिवारों को नष्ट कर दिया. एक शक्तिशाली जनजाति को तलवार से हराकर, मंगोलिया में सर्वोच्च शक्ति बनने की दिशा में तेमुजिन का सफर सही मायने में शुरू हो गया था. इसके बाद उसने अपनी सैन्य शक्ति संगठित करने की शुरुआत की. धीरे-धीरे कई सालों के संघर्ष के बाद वह एक खूंखार सैन्य कमांडर बनकर उभरा, जिसने ग्लोब के आधे से हिस्सों में ऐसी मारकाट मचाई, जिसे सदियों बाद भी याद कर सिहरन सी दौड़ जाती है.

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