दुनिया भर की सड़कों पर राज करने वाली कार का सफर आज के दिन ही शुरू हुआ था. दुनिया का पहला मोटर कार चार-पहिया नहीं, बल्कि तीन चक्कों वाला एक मोटर वैगन था. क्योंकि 29 जनवरी, 1886 को, कार्ल बेंज ने अपने पेट्रोल इंजन से चलने वाली पहली तीन पहिया मोटर वैगन का पेटेंट कराया था.
इस पेटेंट संख्या 37435 को ऑटोमोबाइल का बर्थ सर्टिफिकेट माना जाता है. जुलाई 1886 में समाचार पत्रों ने तीन पहियों वाली बेंज पेटेंट मोटर कार, मॉडल संख्या 1 के पहले सार्वजनिक प्रदर्शन की रिपोर्ट भी की थी. कार्ल बेंज पहले आविष्कारक थे, जिनके मन में न केवल इंजन से चलने वाले कार का विचार आया, बल्कि उन्होंने इसे डिज़ाइन भी किया और फिर उसका निर्माण और टेस्ट भी किया.
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने अपने बिना घोड़े वाली गाड़ी के विचार को निरंतर विकास के साथ एक ऐसे प्रोडक्ट में बदल दिया जो रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए परफेक्ट था और आखिरकार इसे उन्होंने बाजार में भी उतार दिया. यह दुनिया की पहली कार थी, जिसे परिवहन जगत का क्रांतिकारी आविष्कार माना जाता है.
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पेटेंट से पहले कार्ल बेंज द्वारा विकसित पहला स्थिर गैसोलीन इंजन एक-सिलेंडर टू-स्ट्रोक यूनिट था जो पहली बार 1879 की नव वर्ष की पूर्व संध्या पर चला था. बेंज को इस इंजन के साथ इतनी व्यावसायिक सफलता मिली कि वह गैसोलीन इंजन द्वारा संचालित एक हल्की कार बनाने के अपने सपने को पूरा करने के लिए अधिक समय देने लगे. इसमें चेसिस और इंजन एक इकाई बनाते थे.
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पहले कार की ये थी विशेषता
1885 में बनकर तैयार हुए इस दो सीटों वाले वाहन की प्रमुख विशेषताएं थीं पीछे की ओरस्थापित कॉम्पैक्ट हाई-स्पीड सिंगल-सिलेंडर फोर-स्ट्रोक इंजन, ट्यूबलर स्टील फ्रेम, डिफरेंशियल और तीन वायर-स्पोक वाले पहिए. इंजन की शक्ति 0.75 हॉर्सपावर (0.55 किलोवाट) थी. इसमें ऑटोमैटिक इंटेक स्लाइड, कंट्रोल्ड एग्जॉस्ट वाल्व, स्पार्क प्लग के साथ हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल वाइब्रेटर इग्निशन और वाटर/थर्मो साइफन इवेपोरेशन कूलिंग जैसी विशेषताएं भी थीं.
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