आज ही पहली बार दुनिया की नजर में आया था अंटार्कटिका, जानें किसने इसका पता लगाया

आज का दिन एक ऐसी खोज से जुड़ा है, जिसने पृथ्वी का भूगोल बदल दिया. 28 जनवरी को ही पहली बार अंटार्कटिका का पता लगाया गया था.

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आज ही अंटार्कटिका की खोज हुई थी (Photo - Pexels) आज ही अंटार्कटिका की खोज हुई थी (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:25 PM IST

28 जनवरी, 1820 को दुनिया के एक नए हिस्से का पता लगा था, जिसे आज अंटार्कटिका के नाम से जाना जाता है. इससे पहले इसे कभी नहीं देखा गया था. अन्वेषण के इतिहास में यह ऐसी ऐतिहासिक घटना थी, जिसने पूरा भूगोल बदल दिया. इस पर सबसे पहले एक रूसी खोजकर्ता की नजर पड़ी थी. 

फादेयेविच बेलिंगशॉसेन (या फैबियन गॉटलीब वॉन बेलिंगशॉसेन) और मिखाइल लाजारेव के नेतृत्व में एक रूसी अभियान दल ने सबसे पहले अंटार्कटिका का पता लगाया. यही वजह है 28 जनवरी को अब अंटार्कटिका के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो दुनिया के सबसे अलग-थलग और रहस्यमय क्षेत्रों में से एक है. 

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पहला रूसी अंटार्कटिक अभियान 1819-1821 बाल्टिक जर्मन फैबियन गॉटलीब वॉन बेलिंगहॉसन के नेतृत्व में निकला था. फैबियन एक रूसी नौसेना अधिकारी थे और उन्होंने अपने द्वितीय-कमांड मिखाइल लाजारेव के साथ मिरी जहाज पर सवार होकर वोस्तोक जहाज की कप्तानी की थी. वे न केवल कैप्टन कुक के बाद अंटार्कटिक सर्कल को पार करने वाले पहले व्यक्ति थे , बल्कि वो जनवरी 1820 में अंटार्कटिक को देखने वाले पहले व्यक्ति भी बने और महाद्वीप की दो परिक्रमाएं कीं. बेलिंगहॉसन अंटार्कटिका में कई स्थलों का नामकरण भी किया. इनमें पीटर प्रथम द्वीप और अलेक्जेंडर तट शामिल हैं.

ऐसे शुरू हुआ रूस के अंटार्कटिक अभियान
सम्राट अलेक्जेंडर प्रथम द्वारा रूसी अंटार्कटिक अभियान शुरू किए जाने तक दक्षिणी महाद्वीप का अस्तित्व अज्ञात था. वह दक्षिणी भूभाग के अस्तित्व की पुष्टि करते हुए रूस के समुद्री ज्ञान का विस्तार करना चाहते थे. यह अभियान 4 जुलाई, 1819 को क्रोनस्टैड से 'वोस्तोक' और 'मिर्नी' नामक दो जहाजों पर सवार होकर रवाना हुआ. अभिया दल में वैज्ञानिक और नाविक शामिल थे, जो अज्ञात वैज्ञानिक खोज करने के लिए तैयार थे.

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लगभग दो साल तक विनाशकारी तूफानों और खतरनाक बर्फ से जूझने के बाद, यात्रा के दौरान बेलिंगशॉसेन और लाजारेव 28 जनवरी, 1820 को 69°21'28” दक्षिण अक्षांश पर पहुंचे. उन्हें बर्फ की विशाल संरचनाएं दिखाई दीं. इसे उन्होंने (मटेरी लेड) कहा, जो भूमि के निकट होने का स्पष्ट संकेत था. हालांकि, बहुत बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वे एक महाद्वीप को देख रहे थे. इस घटना को व्यापक रूप से अंटार्कटिका के पहले निश्चित झलक के रूप में स्वीकार किया जाता है.

दो दिन बाद एक और खोजकर्ता पहुंचा था अंटार्कटिक के पास
बेलिंगशॉसेन के अभियान को अंटार्कटिका का पता लगाने वाला माना जाता है. वहीं अन्य खोजकर्ता भी उसी समय इन दक्षिणी जलक्षेत्रों में खोजबीन कर रहे थे. महज दो दिन बाद, 30 जनवरी को, ब्रिटिश नाविक एडवर्ड ब्रैनफ़ील्ड ने ट्रिनिटी लैंड को देखा, जो अंटार्कटिक प्रायद्वीप का एक हिस्सा है. इसके अलावा, दक्षिण अमेरिकी सील शिकार के उस्ताद नथानिएल पामर ने कहा कि उन्होंने नवंबर 1820 में ज़मीन देखी थी.

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