जब चीन में हुआ राजशाही का अंत, अंतिम सम्राट को छोड़ना पड़ा था सिंहासन

आज के दिन ही चीन में राजशाही का अंत हो गया. 12 फरवरी को ही चीन के अंतिम सम्राट ने अपना सिंहासन त्याग दिया था. इसके बाद वहां गणतंत्रवादी व्यवस्था कायम हुई थी.

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आज के दिन चीन के अंतिम सम्राट ने छोड़ दिया था अपना सिंहासन (Photo - Pexels) आज के दिन चीन के अंतिम सम्राट ने छोड़ दिया था अपना सिंहासन (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:48 AM IST

आज का इतिहास चीन में बड़ी व्यवस्था परिवर्तन से जुड़ा हुआ है. आज के दिन यानी 12 फरवरी 1912 को सन यात-सेन की गणतंत्रवादी क्रांति के बाद चीन के अंतिम सम्राट  ह्सियान-तुंग को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी. सम्राट की जगह पर एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया . 

इसी दिन चीन में 267 वर्षों के मांचू शासन और 2000 वर्षों के राजशाही का अंत हो गया था. पूर्व सम्राट उस वक्त केवल छह वर्ष के थे. तब उनको अपना नाम बदलकर बीजिंग के फॉरबिडन सिटी में रहने की अनुमति मिली थी. उन्होंने अपना नया नाम  हेनरी पु यी रखा था.

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पु यी को 1908 में उनके चाचा, कुआंग-ह्सू सम्राट की मृत्यु के बाद सम्राट के रूप में सिंहासन पर बैठे थे. उन्होंने एक प्रतिनिधि के अधीन शासन किया और आगे के शासन के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया. हालांकि, अक्टूबर 1911 में, सन यात-सेन की क्रांति के कारण उनका राजवंश गिर गया और चार महीने बाद उन्होंने पद त्याग दिया.

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 नई चीनी सरकार ने उन्हें एक बड़ी सरकारी पेंशन प्रदान की और 1924 तक शाही महल में रहने की अनुमति दी. इसके बाद उन्हें निर्वासन में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा. 1925 के बाद, वह जापान के कब्जे वाले तियानजिन में रहने लगे और 1932 में जापान ने उनके शासन के अधीन मंचूरिया में मंचुकुओ नामक एक कठपुतली राज्य की स्थापना की.

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1934 में हेनरी पु यी को मंचुकुओ के सम्राट के रूप में सिंहासन पर बैठाया गया. अपनी कठपुतली सरकार के विरुद्ध गुरिल्ला प्रतिरोध के बावजूद, उन्होंने 1945 तक सम्राट का पद संभाला. जब तक की उन्हें सोवियत सैनिकों द्वारा पकड़ नहीं लिया गया. 1946 में, पु यी ने टोक्यो युद्ध अपराध न्यायाधिकरण के समक्ष गवाही दी कि वह जापानियों का एक मोहरा था, न कि जैसा कि जापानियों ने दावा किया था, मंचूरिया ने खुद से उनका साथ देने का निर्णय लिया था. 

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 मंचूरिया और रेहे प्रांत चीन को वापस कर दिए गए और 1950 में पु यी को चीनी कम्युनिस्टों के हवाले कर दिया गया. उन्हें 1959 तक शेनयांग में कैद रखा गया, जब चीनी नेता माओत्से तुंग ने उन्हें क्षमादान दे दिया. रिहाई के बाद, उन्होंने बीजिंग में एक यांत्रिक मरम्मत की दुकान में काम किया.

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