जब पहली बार किसी अश्वेत ने अंतरिक्ष में कदम रखा, ऐसे बर्नार्ड हैरिस ने रच दिया था इतिहास

आज के दिन ही नासा के अंतरिक्ष यात्री बर्नार्ड हैरिस अंतरिक्ष में कदम रखने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बन गए थे. उनके इस मिशन ने अंतरिक्ष अन्वेषण में संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते सहयोग में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.

Advertisement
जब पहली बार किसी अश्वेत शख्स ने अंतरिक्ष में अपने कदम रखे (Photo - Pixabay) जब पहली बार किसी अश्वेत शख्स ने अंतरिक्ष में अपने कदम रखे (Photo - Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:58 AM IST

बर्नार्ड हैरिस 9 फरवरी, 1995 को अंतरिक्ष यान डिस्कवरी से बाहर निकले और स्पेस में कदम रखने वाले पहले अश्वेत शख्स बन गए. उन्होंने अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष-यात्रा के इस सफर की शुरुआत बचपन में ही कर दी थी, जब वे अपने गृह राज्य टेक्सास में तारों को घंटों निहारते रहते थे. 

हैरिस ने अपने अंतरिक्ष यात्री बनने की प्रेरणा के बारे में बताया कि ऐसे समय में जब अपोलो 11 के चंद्रमा पर उतरने की घटना नागरिक अधिकारों के संघर्ष के साथ सुर्खियां बटोर रही थी.मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती मेरी त्वचा का रंग था.हैरिस ने अपनी मेडिकल डिग्री हासिल की और मेयो क्लिनिक में रेजीडेंसी पूरी करने के बाद नासा में फ्लाइट सर्जन के रूप में शामिल हुए. 

Advertisement

नासा में डॉक्टर के रूप में, हैरिस ने इस बात पर शोध किया कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मानव हड्डियां कैसे प्रतिक्रिया करती हैं. इसके साथ ही  उन्होंने अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर को अनुकूल बनाने में मदद करने के लिए एक मेडिकल डिवाइस भी डिजाइन किया.  1990 में, नासा ने उन्हें अपने 13वें अंतरिक्ष यात्री दल के हिस्से के रूप में चुना.

 एक अंतरिक्ष यात्री के रूप में अपने करियर में, हैरिस ने अंतरिक्ष में 18 दिन बिताए—और अपनी ऐतिहासिक स्पेसवाक पर लगभग पांच घंटे बिताए. उन्होंने अंतरिक्ष में तैरने के एहसास को याद करते हुए कहा था कि इस नीले और सफेद ग्रह को तारों के बैकग्राउंड में देखना लाजवाब था. अपने नासा करियर के दौरान, उन्होंने अंतरिक्ष में 72 लाख मील से अधिक की यात्रा की.

यह भी पढ़ें: पहली बार स्पेस में कोई इंसान बिना सहारे के चला, इस शख्स ने रचा था इतिहास

Advertisement

हैरिस का 1995 का मिशन एसटीएस-63 , सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिकी-रूसी सहयोग की एक मिसाल बनी.  शीत युद्ध के दौरान अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में दशकों की प्रतिद्वंद्विता के बाद , दोनों विश्व शक्तियों ने अंतरिक्ष अन्वेषण में सहयोग करना शुरू कर दिया था. एसटीएस-63 न केवल रूसी अंतरिक्ष स्टेशन मीर के करीब पहुंचने और उसके चारों ओर उड़ान भरने वाला पहला नासा मिशन था, बल्कि यह रूसी अंतरिक्ष यात्री को शामिल करने वाला दूसरा नासा मिशन भी था. इन सहयोगों के परिणामस्वरूप अंततः इंटरनेशनल अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण हुआ, जो 1998 में कक्षा में स्थापित हुआ.

यह भी पढ़ें: जब पहली बार स्पेस से ली गई पृथ्वी की तस्वीर, नजर आया था गोलाकार क्षितिज

1996 में नासा से सेवानिवृत्त होने के बाद, हैरिस ने गणित और विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने वंचित समुदायों में शिक्षा और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए 1998 में हैरिस इंस्टीट्यूट एंड फाउंडेशन की स्थापना की. वे नेशनल मैथ एंड साइंस इनिशिएटिव के बोर्ड सदस्य और सीईओ भी रह चुके हैं और स्वास्थ्य सेवा उद्योग पर केंद्रित एक वेंचर कैपिटल फर्म का संचालन करते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement