पहले आजाद था बलूचिस्तान... आज पाकिस्तान से भी ताकतवर होता, तब नाम भी अलग था

आज बलूचिस्तान एक अलग देश के रूप में पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर होने की मांग कर रहा है. इसकी पीछे एक बड़ी और पुरानी वजह है. किसी समय बलूचिस्तान एक आजाद रियासत था और इसका नाम भी तब कुछ और ही था. अगर बलूचिस्तान अपनी शर्तों पर एक अलग देश होता तो आज कहानी कुछ और होती. ऐसे में समझते हैं, आखिर बलूचिस्तान पहले क्या नाम था और इसकी क्या मांग थी.

Advertisement
बलोच विद्रोहियों ने पाकिस्तान में 12 जगहों पर हमला किया था (Photo - AP) बलोच विद्रोहियों ने पाकिस्तान में 12 जगहों पर हमला किया था (Photo - AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बवाल मचा हुआ है. आजाद बलूचिस्तान की मांग करने वाले बलोच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान के नाक में दम कर रखा है. एक दिन पहले बलोचों ने एक साथ 12 शहरों में पुलिस चौकियों पर हमला बोल दिया. कभी ये बलूचिस्तान प्रांत एक आजाद और संप्रभु राज्य था और इस पर पाकिस्तान का कोई हक नहीं था. तब इसका नाम भी कुछ और था. ऐसे में समझते हैं बलूचिस्तान का पुराना नाम क्या था और अगर यह आजाद और अलग देश बनता तो पाकिस्तान से कैसे ताकतवर हो सकता था.

Advertisement

जब ब्रिटिश इंडिया का बंटवारा हुआ, तब कई रियासतें स्वतंत्र थीं. इनमें से कुछ स्टेट स्वेच्छा से भारत और पाकिस्तान में शामिल हो गए और कुछ स्वतंत्र बने रहना चाहते थे. इनमें से ही एक था स्टेट ऑफ कलात. स्टेट ऑफ कलात यानी आज का बलूचिस्तान 227 दिनों तक आजाद और संप्रभु रहा. 20 मार्च 1948 में पाकिस्तान में शामिल  होने के बाद से इसे बलूचिस्तान कहा जाने लगा. हालांकि, पहले भी ये बलूचिस्तान के नाम से जाना जाता था, लेकिन रियासत का नाम स्टेट ऑफ कलात था. 

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस वक्त स्टेट ऑफ कलात तीन देशों में बंटा था. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत, अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंज और कंधार के कुछ हिस्सों को मिलाकर स्टेट ऑफ कलात एक अलग देश बलूचिस्तान बनाने की मंशा रखता था. कहा जाता है तब इसने ब्रिटिश साम्राज्य, पाकिस्तान और अन्य देशों से इस बारे में बात भी की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अगर इस प्रस्ताव पर बात बन जाती तो आज बलूचिस्तान पाकिस्तान से ज्यादा ताकतवर देश हो सकता था. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: बलूचिस्तान का वो इलाका... जहां पाकिस्तान से ज्यादा चीन का रसूख! कभी भारत को हुआ था ऑफर

चूंकि, हमेशा से बलूचिस्तान का झुकाव भारत की ओर रहा. यही वजह है कि अगर बलूचिस्तान एक अलग देश होता, तो ऐसी उम्मीद की जा सकती थी कि ये भारत का अच्छा दोस्त भी होता. हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ और पाकिस्तान ने जबरन इसे अपना हिस्सा बना लिया. यही वजह है कि हमेशा से बलूचिस्तान अपने अस्तित्व को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाता रहा है.

इस शर्त पर पाकिस्तान में शामिल हुआ था बलूचिस्तान 
जर्मन लेखक मार्टिन एक्समैन ने बलोच राष्ट्रवाद और उसके इतिहास पर एक किताब लिखी है -  'बैक टू द फ्यूचर: द ख़ानेट ऑफ कलात एंड द जेनेसिस ऑफ बलोच नेशनलिज़म 1915-1955'. इस किताब के मुताबिक, जब स्टेट ऑफ कलात के संप्रभु रहने के प्रस्ताव पर अफगानिस्तान और भारत की ओर से निराशा हाथ लगी, तब उसने पाकिस्तान के साथ जाने का निर्णय किया और 20 मार्च 1948 को उसका विलय हो गया.

इतिहासकारों का कहना है कि स्टेट ऑफ कलात ने पाकिस्तान के साथ इस शर्त पर विलय किया था किया कि  पाकिस्तान की सरकार उनके आतंरिक मामले में दखल नहीं देगी. आगे जाकर ऐसा कुछ नहीं हुआ. पाकिस्तान ने बलपूर्वक बलूचिस्तान पर अपना पूरा नियंत्रण करने की कोशिश की और हमेशा ऐसा करता रहा है. 

Advertisement

इसलिए होता रहता है विद्रोह
यही वजह है कि बलूचिस्तान हमेशा से पाकिस्तान शासन का विरोध करता रहा है. पाकिस्तान के दमनकारी नीतियों को लेकर वहां निरंतर विद्रोह होता रहा है. आज भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी उसी पुराने मांग पर अड़े हुए हैं कि बलूचिस्तान का पाकिस्तान से अलग अस्तित्व हो. दूसरी तरह किसी भी तरह से पाकिस्तान इन विद्रोहों को दबाना चाहता है और इसके लिए व्यापक तौर पर हिंसक कार्रवाईयों का इस्तेमाल किया जाता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement