पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बवाल मचा हुआ है. आजाद बलूचिस्तान की मांग करने वाले बलोच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान के नाक में दम कर रखा है. एक दिन पहले बलोचों ने एक साथ 12 शहरों में पुलिस चौकियों पर हमला बोल दिया. कभी ये बलूचिस्तान प्रांत एक आजाद और संप्रभु राज्य था और इस पर पाकिस्तान का कोई हक नहीं था. तब इसका नाम भी कुछ और था. ऐसे में समझते हैं बलूचिस्तान का पुराना नाम क्या था और अगर यह आजाद और अलग देश बनता तो पाकिस्तान से कैसे ताकतवर हो सकता था.
जब ब्रिटिश इंडिया का बंटवारा हुआ, तब कई रियासतें स्वतंत्र थीं. इनमें से कुछ स्टेट स्वेच्छा से भारत और पाकिस्तान में शामिल हो गए और कुछ स्वतंत्र बने रहना चाहते थे. इनमें से ही एक था स्टेट ऑफ कलात. स्टेट ऑफ कलात यानी आज का बलूचिस्तान 227 दिनों तक आजाद और संप्रभु रहा. 20 मार्च 1948 में पाकिस्तान में शामिल होने के बाद से इसे बलूचिस्तान कहा जाने लगा. हालांकि, पहले भी ये बलूचिस्तान के नाम से जाना जाता था, लेकिन रियासत का नाम स्टेट ऑफ कलात था.
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस वक्त स्टेट ऑफ कलात तीन देशों में बंटा था. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत, अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंज और कंधार के कुछ हिस्सों को मिलाकर स्टेट ऑफ कलात एक अलग देश बलूचिस्तान बनाने की मंशा रखता था. कहा जाता है तब इसने ब्रिटिश साम्राज्य, पाकिस्तान और अन्य देशों से इस बारे में बात भी की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अगर इस प्रस्ताव पर बात बन जाती तो आज बलूचिस्तान पाकिस्तान से ज्यादा ताकतवर देश हो सकता था.
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चूंकि, हमेशा से बलूचिस्तान का झुकाव भारत की ओर रहा. यही वजह है कि अगर बलूचिस्तान एक अलग देश होता, तो ऐसी उम्मीद की जा सकती थी कि ये भारत का अच्छा दोस्त भी होता. हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ और पाकिस्तान ने जबरन इसे अपना हिस्सा बना लिया. यही वजह है कि हमेशा से बलूचिस्तान अपने अस्तित्व को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाता रहा है.
इस शर्त पर पाकिस्तान में शामिल हुआ था बलूचिस्तान
जर्मन लेखक मार्टिन एक्समैन ने बलोच राष्ट्रवाद और उसके इतिहास पर एक किताब लिखी है - 'बैक टू द फ्यूचर: द ख़ानेट ऑफ कलात एंड द जेनेसिस ऑफ बलोच नेशनलिज़म 1915-1955'. इस किताब के मुताबिक, जब स्टेट ऑफ कलात के संप्रभु रहने के प्रस्ताव पर अफगानिस्तान और भारत की ओर से निराशा हाथ लगी, तब उसने पाकिस्तान के साथ जाने का निर्णय किया और 20 मार्च 1948 को उसका विलय हो गया.
इतिहासकारों का कहना है कि स्टेट ऑफ कलात ने पाकिस्तान के साथ इस शर्त पर विलय किया था किया कि पाकिस्तान की सरकार उनके आतंरिक मामले में दखल नहीं देगी. आगे जाकर ऐसा कुछ नहीं हुआ. पाकिस्तान ने बलपूर्वक बलूचिस्तान पर अपना पूरा नियंत्रण करने की कोशिश की और हमेशा ऐसा करता रहा है.
इसलिए होता रहता है विद्रोह
यही वजह है कि बलूचिस्तान हमेशा से पाकिस्तान शासन का विरोध करता रहा है. पाकिस्तान के दमनकारी नीतियों को लेकर वहां निरंतर विद्रोह होता रहा है. आज भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी उसी पुराने मांग पर अड़े हुए हैं कि बलूचिस्तान का पाकिस्तान से अलग अस्तित्व हो. दूसरी तरह किसी भी तरह से पाकिस्तान इन विद्रोहों को दबाना चाहता है और इसके लिए व्यापक तौर पर हिंसक कार्रवाईयों का इस्तेमाल किया जाता है.
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