आज का इतिहास जुड़ा है आइसक्रीम स्कूप से...जिसका 2 फरवरी कराया गया था पेटेंट

आज का दिन इतिहास में एक ऐसे आविष्कार से जुड़ा है, जिसने आइसक्रीम को आसानी से आम लोगों के बीच उपलब्ध कराने में काफी मदद की. क्योंकि 2 फरवरी को ही पहले आइसक्रीम स्कूप का पेटेंट कराया गया था.

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आइसक्रीम स्कूप का आज ही पेटेंट कराया गया था (Photo - Pexels) आइसक्रीम स्कूप का आज ही पेटेंट कराया गया था (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:16 AM IST

गर्मी के दिनों में आइसक्रीम, कोन, सॉफ्टी एक अलग ही स्वाद और गले को सुकून देता है. क्या कभी इस बात पर हमने गौर किया है कि आज इतनी आसानी जिस आइसक्रीम स्कूप का हम मजा लेते हैं और  इतने आराम से हमारे सामने उसे परोस दिया जाता है, वो आया कहां से? आज जो आइसक्रीम स्कूप काफी आसान सी चीज लगती है, हमेशा से ऐसा नहीं था. किसी जमाने में आइसक्रीम बनना और इसे परोसना काफी मुश्किल था. इसलिए ये एलीट क्लास तक ही सीमित था. क्योंकि इसे बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल थी.धीरे-धीरे आइसक्रीम बनाने के तौर-तरीके अपटेड होते गए. 

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ये सब संभव हुआ एक के बाद एक ऐसे आविष्कार से, जिनकी वजह से आइसक्रीम बनाने और परोसने की प्रक्रिया आसान होती चली गई.  फिर ये अलग-अलग रूपों में आम लोगों के लिए भी सुलभ होता चला गया. इसी कड़ी में आज के दिन यानी 2 फरवरी 1897 को एक अश्वेत आविष्कारक और व्यवसायी अल्फ्रेड क्रेल ने पहले आइसक्रीम स्कूप का पेटेंट कराया. इससे पहले आइसक्रीम स्कूप या कोन बनाना काफी मुश्किल था. चलते-फिलते आइसक्रीम के मजे लेना आज की तरह आसान नहीं था.

पिट्सबर्ग में मार्केल ब्रदर्स ड्रगस्टोर में कुली का काम करते समय, अल्फ्रेड क्रेल ने देखा कि उनके साथी कर्मचारी ग्राहकों के लिए आइसक्रीम कोन निकालने में काफी संघर्ष करते हैं.  क्रेल ने एक ऐसा उपकरण बनाने का फैसला किया जिससे एक हाथ से आसानी से आइसक्रीम निकाली जा सके. उनके इस आविष्कार को, जिसे उन्होंने "आइसक्रीम मोल्ड और डिशर" नाम दिया, 2 फरवरी, 1897 को फेडरल पेटेंट प्राप्त हुआ.

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 उनके पेटेंट आवेदन के अनुसार , डिशर अपनी बनावट में बेहद सरल, मजबूत, टिकाऊ, प्रभावी और अपेक्षाकृत कम लागत वाला था. पिट्सबर्ग प्रेस ने बताया कि क्रेल के आइसक्रीम डिशर से एक मिनट में 40 से 50 कटोरी आइसक्रीम निकाली जा सकती थी. साथ ही हाथ गंदे भी नहीं होते थे. क्रेल का आविष्कार तेजी से लोकप्रिय हुआ और इसने देश भर में आइसक्रीम की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद की.

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अल्फ्रेड क्रेल का जन्म 1866 में, गृहयुद्ध की समाप्ति के कुछ ही समय बाद, वर्जीनिया के केनब्रिज में हुआ था. बचपन में ही क्रेल ने अपने पिता से बढ़ईगिरी का काम सीखा. युवावस्था में वे वाशिंगटन डीसी चले गए और गृहयुद्ध के बाद स्वतंत्र अश्वेत समुदाय को शिक्षित करने के लिए स्थापित संस्था, वेरलैंड थियोलॉजिकल सेमिनरी में दाखिला लिया. बाद में क्रेल पिट्सबर्ग चले गए, जहां उन्होंने सेंट चार्ल्स होटल और मार्केल ब्रदर्स ड्रगस्टोर में कुली के रूप में काम किया.

 उन्होंने शहर के अफ्रीकी-अमेरिकी वित्तीय, संचय, व्यापार और व्यवसाय संघ के सहायक प्रबंधक के रूप में भी कार्य किया. 1920 में 54 वर्ष की आयु में एक कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया. वे पिट्सबर्ग शहर के पहले अश्वेत व्यक्ति थे जिन्हें अपना पेटेंट प्राप्त हुआ था. क्रैले उन अश्वेत पेटेंट धारकों की लहर का हिस्सा थे, जो युद्ध के बाद 1899 में अपने चरम पर पहुंच गई थी. 1868 में पारित 14वें संशोधन ने यह सुनिश्चित किया कि सभी अश्वेत अमेरिकियों को समान नागरिकता अधिकार प्राप्त हों.

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पेटेंट प्राप्त करने के लिए नागरिकता अनिवार्य था. इस काल के अन्य उल्लेखनीय अश्वेत आविष्कारकों में कार्बन लाइट बल्ब फिलामेंट के आविष्कारक लुईस लैटिमर, रेलरोड टेलीग्राफ के आविष्कारक ग्रानविले वुड्स और अश्वेत महिलाओं के लिए हेयर केयर उत्पादों की निर्माता मैडम सीजे वॉकर शामिल हैं. स्वयं क्रैले का नाम पेटेंट परीक्षक हेनरी ई. बेकर द्वारा तैयार की गई अश्वेत आविष्कारकों की पहली सूची में शामिल था, जिसे अंततः 1913 में "द कलर्ड इन्वेंटर: ए रिकॉर्ड ऑफ 50 इयर्स" के रूप में प्रकाशित किया गया.

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