हिटलर का DNA टेस्ट... पता चला क्यों महिलाओं से दूर भागता था खतरनाक तानाशाह?

एडॉल्फ हिटलर इतिहास में एक चर्चित और कुख्यात शख्स रहा है. उससे जुड़े कई किस्से, कहानियां और मिथ हैं, जिन पर आज भी चर्चा होती रहती है. हिटलर की मौत के 80 साल बाद उसका DNA टेस्ट किया गया और इसके रिजल्ट से जो चौंकाने वाले खुलासे हुए, उसे एक डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से सार्वजनिक किया गया. ऐसे में जानते हैं कि इस खतरनाक तानाशाह के डीएनए टेस्ट में ऐसा क्या मिला?

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हिटलर के डीएनए टेस्ट से हुए हैरान करने वाले खुलासे (Photo - X) हिटलर के डीएनए टेस्ट से हुए हैरान करने वाले खुलासे (Photo - X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST

हिटलर ने शादी नहीं की थी. इस बारे में कई अफवाहें और कहानियां हैं. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों में ऐसी चर्चाएं होती रहती थीं कि हिटलर महिलाओं से दूर भागता था. उसमें कुछ ऐसी कमी थी कि उसने शादी नहीं की. खासकर उसकी शारीरिक कमियों को लेकर हमेशा से अटकलें लगाई जाती रही हैं. अब हिटलर के डीएनए टेस्ट से ऐसे खुलासे हुए हैं, जो बताते हैं कि इन चर्चाओं की वजह बेबुनियाद नहीं थी. 

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हिटलर ने 30 अप्रैल 1945 की दोपहर को अपने बर्लिन बंकर में आत्महत्या कर ली थी.  हिटलर की मौत के 80 साल बाद 'Hitler's DNA: Blueprint of a Dictator' नाम की डॉक्यूमेंट्री के जरिए उसके डीएनए टेस्ट के परिणाम की जानकारी पहली बार सार्वजनिक की गई. बीबीसी हिस्ट्रीएक्स्ट्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डॉक्यूमेंट्री में यह बताया गया है कि कहां से हिटलर का डीएनए लिया गया और टेस्ट के बाद जो परिणाम सामने आए उससे क्या खुलासा हुआ है.  

टूरी किंग और एलेक्स जेके ने एडॉल्फ हिटलर के डीएनए के नमूने का अध्ययन किया और इस विश्लेषण से जुड़े जो परिणाम सामने आए वो चौंकाने वाले थे. डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि डीएनए के टेस्ट के लिए पहला कदम यह पुष्टि करना था कि रक्त का नमूना वास्तव में हिटलर का ही था. इसे ध्यान में रखते हुए, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि किसी भी फोरेंसिक मामले की तरह, डीएनए साक्ष्य का अकेले टेस्ट नहीं होता, इसे उसके दूसरे नमूने के परिणाम से मिलाकर देखना जरूरी है.  इसलिए पहले हिटलर की आत्महत्या के बारे में जानकारी प्राप्त करना और फिर यह पता लगाना कि डीएनए टेस्ट के लिए कपड़े का वह टुकड़ा कैसे उपलब्ध हुआ, इस बारे में बताना जरूरी है.

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हिटलर का डीएनए उस खून से लिया गया था जो उस कपड़े के एक छोटे से टुकड़े पर लगा था, जिसे उस सोफे से काटा गया था जिस पर हिटलर ने बैठकर खुद को गोली मारी थी. उसकी मृत्यु के बाद  कुछ ही लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी गई. जिन लोगों को प्रवेश की अनुमति दी गई थी, उनमें लेफ्टिनेंट कर्नल रोसवेल पी. रोसेनग्रेन भी शामिल थे, जो यूरोप में मित्र देशों के सर्वोच्च कमांडर जनरल ड्वाइट डी. आइजनहावर के जन सूचना अधिकारी थे.

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रोसेनग्रेन ने उस सोफे के कपड़े का एक टुकड़ा काट लिया जिस पर हिटलर ने खुद को गोली मारी थी. वह इसे अपने साथ संयुक्त राज्य अमेरिका ले गए और इसे ताला लगाकर सुरक्षित रखा, फिर इसे अपने बेटे को सौंप दिया. बाद में इसे पेंसिल्वेनिया के गेटिसबर्ग इतिहास संग्रहालय को दे दिया गया. इस टुकड़े के साथ रोसेनग्रेन के बेटे का एक हस्ताक्षरित हलफनामा भी था, जिसमें इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि की गई थी. निश्चित रूप से, कपड़ा सोफे की तस्वीरों से मेल खाता था. यहां तक तो सब ठीक था. अब बारी आती है हिटलर के डीएनए टेस्ट के परिणाम की पुष्टि करने के लिए उसके परिवार किसी सदस्य या किसी रिश्तेदार का नमूना या डीएनए चाहिए था.

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इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कोई करीबी रिश्तेदार उपलब्ध नहीं था. हिटलर की कोई संतान नहीं थी. लेकिन, एक दशक से भी पहले किए गए एक पिछले स्टडी के हिस्से के रूप में, जीन-पॉल मुल्डर्स नामक एक पत्रकार और मार्क वर्मीरन नामक एक वंशावली विशेषज्ञ ने यूरोप में रहने वाले हिटलर के फैमिली ट्री के दूर के पुरुष वंशजों का पता लगाया था और उनमें से एक से डीएनए प्राप्त किया था. अब सवाल था कि इतने वर्षों बाद, यदि कपड़े के टुकड़े पर लगा खून हिटलर का था, तो उससे प्राप्त वाई-क्रोमोसोम उसके दूर के उस संबंधी के वाई-क्रोमोसोम से मेल खाना चाहिए, जिसका डीएनए टेस्ट पहले ही किया जा चुका था.

डीएनए टेस्ट के परिणाम से क्या खुलासा हुआ
हिटलर के डीएनए टेस्ट प्रोजेक्ट के लिए यह बहुत बड़ा क्षण था. जब डीएनए मिलान की पुष्टि हुई और सबसे बड़ी राहत ये थी कि दोनों ही दोनों एक ही तरह के दुर्लभ वाई-क्रोमोसोम प्रकार थे. यानी ये डीएनए हिटलर का था. अब इस डीएनए के विश्लेषण से कई खुलासे हुए. पहला खुलासे से ये मिथक टूट गया कि हिटलर के पूर्वज यहूदी थे. क्योंकि, यहूदियों के प्रति उसके गुस्से को इस रूप में भी बताया जाता था कि हिटलर के दादा यहूदी वंश से थे. इसलिए उनमें यहूदियों के प्रति गुस्सा था. डीएनए टेस्ट से ये साफ हो गया कि ऐसा कुछ नहीं था. 

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डीएनए का विश्लेषण दो तरीकों से किय गया- पहला, विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट को जेनेटिक रिजल्ट भेजकर, ताकि वे उनके चिकित्सीय स्थितियों की पहचान कर सकें और दूसरा, जेनेटिक वेरिएंट के लिए स्टैंडर्ड चिकित्सा प्रक्रियाओं के माध्यम से इसकी जांच करके. इसे रिजल्ट आश्चर्यजनक थे.

इसलिए महिलाओं से दूर भागता था हिटलर
सबसे पहले, पेरिस के पाश्चर इंस्टीट्यूट में सहकर्मियों के प्रयासों की बदौलत, हमने पाया कि हिटलर में एक जीन में एक प्रसिद्ध  डिलीशन था, जो कल्मैन सिंड्रोम और जटिल नाम वाले जन्मजात हाइपोगोनैडोट्रोपिक हाइपोगोनैडिज्म से जुड़ा है. यह संभव है कि उनमें किसी प्रकार का कल्मैन सिंड्रोम रहा हो, जो उनके निजी जीवन या अंतरंग संबंधों के प्रति हिटलर की अरुचि की वजह बन गया. 

क्योंकि सभी उपलब्ध प्रमाण बताते हैं कि उन्होंने अपनी दीर्घकालिक साथी, ईवा ब्राउन के साथ भी फिजिकल रिलेशन नहीं बनाए थे. हिटलर हमेशा दावा करता था कि उसका जीवन जर्मनी के लिए समर्पित था, इसलिए उसमें पत्नी के लिए कोई स्थान नहीं था. ऐसा लगता है कि  कल्मैन सिंड्रोम की वजह से होने वाली शारीरिक और यौन कमियों के कारण वह ऐसा दावा करके इन्हें छिपाने की कोशिश करता था.

देश के प्रति समर्पित होने जैसे दावे अंतरंग संबंधों के प्रति उसकी अरुचि को छिपाने का एक तरीका था, और यह भी संभव है कि उनके जीन ने उनके विवाह न करने और संतान न पैदा करने के निर्णय में उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो.

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यह शारीरिक असामान्यता अगस्त कुबिज़ेक द्वारा दिए गए एक विवरण को समझाने में सहायक हो सकती है, जो हिटलर के किशोरावस्था के दौरान उनके सबसे करीबी (और शायद इकलौते) मित्र थे.  हिटलर और कुबिज़ेक ने फरवरी से जुलाई 1908 तक वियना में एक कमरा साझा किया था. कुबिजेक ने टिप्पणी की थी कि मेरे मित्र को निस्संदेह कई महिलाओं का साथ मिला, लेकिन मुझे आश्चर्य है कि उसने कभी इसका लाभ नहीं उठाया. 

दिलचस्प बात यह है कि 1920 और 1930 के दशक में हिटलर के सबसे करीबी विश्वासपात्रों में से एक अर्न्स्ट हनफस्टैंगल ने बाद में लिखा कि मुझे याद नहीं कि मैंने उसे कभी स्नान के कपड़ों में देखा हो, न ही किसी और ने. एक कहानी, जो शायद सच थी, अक्सर सुनाई जाती थी कि हिटलर के पुराने सेना के साथियों ने, जिन्होंने उसे स्नानघर में देखा था, गौर किया था कि उसके प्राइवेट पार्ट असामान्य रूप से अविकसित थे और निस्संदेह उसे वजह से शर्म आती थी.

ऐसे में डीएनए टेस्ट में हिटलर में पाया गया कल्मैन सिंड्रोम उसके शारीरिक कमी और महिलाओं से दूर भागने एक बड़ी वजह हो सकता है. क्योंकि, इसकी वजह से व्यक्ति में अलग-अलग तरह के म्यूटेशन सामने आते हैं. इसके परिणामस्वरूप टेस्टोस्टेरोन में कमी, अंतरंग संबंधों के प्रति अरुचि, जेनिटल ऑर्गन के ठीक से विकास नहीं होना जैसी गड़बड़ी हो सकती है.

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