पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की नौकरी के लिए AI बनता जा रहा है खतरा, क्या कहता है रिसर्च  

AI की वजह से नौकरियों का तरीका तेजी से बदल रहा है. लेकिन क्या आपको पता है कि इसका असर पुरुषों से ज्यादा महिलाओं पर ही हो रहा है. लेकिन कैसे? एक नए रिसर्च में पाया गया है कि आने वाले समय में AI की वजह से महिलाओं की नौकरियों पर पुरुषों की तुलना में ज्यादा असर पड़ सकता है. 

Advertisement
AI बन रहा महिलाओं की नौकरी के लिए खतरा. AI बन रहा महिलाओं की नौकरी के लिए खतरा.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:39 PM IST

AI केवल तेजी से दुनिया को ही नहीं बदल रहा है बल्कि काम करने के तरीके और नौकरी में हो रही छंटनी का भी बड़ा कारण बनती जा रही है. बड़ी कंपनियां AI में निवेश कर रही हैं, जिसकी वजह से कई जगह नौकरियों में कटौती हो रही है. अमेजन, मेटा और ओरेकल जैसी कंपनियों ने भी हाल के महीनों में कर्मचारियों की संख्या कम की है. लेकिन अगर कहा जाए कि AI का सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं पर दिखाई दे रहा है. तो आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि क्या टेक्नोलॉजी भी ऐसा कर सकती है अगर हां, तो कैसे? एक नए रिसर्च में पाया गया है कि AI के कारण नौकरी जाने का खतरा महिलाओं के लिए पुरुषों की तुलना में ज्यादा हो सकता है. 

Advertisement

अमेरिका के नेशनल पार्टनरशिप फॉर विमेन एंड फैमिलीज की ओर से किए गए अध्ययन में दावा किया गया है कि एआई महिला कर्मचारियों के लिए अधिक खतरा साबित हो सकती है. अध्ययन में कहा गया है कि जहां अमेरिकी वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 47 प्रतिशत है, वहीं एआई से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले 15 व्यवसायों में 83 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं. हालांकि, यह अमेरिकी कार्यबल पर केंद्रित है लेकिन इससे हमें भारतीय वर्कफोर्स में भी क्या उम्मीद की जा सकती है, इसके बारे में कुछ सुराग मिलता है. 

कैसे ज्यादा प्रभावित हो रही महिलाएं? 

इस रिसर्च में उन 15 बिजनेस पर फोकस किया गया है जो एआई से सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना रखते हैं. इनमें सचिव, रिसेप्शनिस्ट, ऑफिस क्लर्क, बीमा एजेंट आदि शामिल हैं.  इसमें कहा गया है कि लगभग 60 लाख महिलाएं इन एआई-प्रभावित व्यवसायों में काम करती हैं. इन महिलाओं के पास नए बदलावों के अनुसार खुद को ढालने के लिए कम साधन और मौके हो सकते हैं, जिससे AI के दौर में आगे बढ़ना उनके लिए ज्यादा मुश्किल बन सकता है.

Advertisement

हालांकि, महिलाएं नर्सिंग, बच्चों और मरीजों की देखभाल जैसी नौकरियों में ज्यादा काम करती हैं, जहां इंसानी संपर्क जरूरी होता है और AI पूरी तरह उनकी जगह नहीं ले सकता. लेकिन फिर भी AI आधारित निगरानी और मैनेजमेंट सिस्टम इन नौकरियों को प्रभावित कर सकते हैं. इन सिस्टम्स को बॉसवेयर भी कहा जाता है. इन्हें समझना या इनके खिलाफ आवाज उठाना कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो सकता है. भले ही नौकरी न जाए लेकिन इससे काम का दबाव बढ़ सकता है और नौकरी की गुणवत्ता खराब हो सकती है. 

कम है महिलाओं की भागीदारी 

रिपोर्ट बताती है कि AI बनाने और चलाने वाली नौकरियों जैसे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और लीडरशिप रोल्स में महिलाओं की संख्या अभी भी कम है. इसका असर यह होता है कि AI सिस्टम कैसे बनाए जाएं और कैसे इस्तेमाल हों. इसमें महिलाओं की भागीदारी कम रहती है जबकि यही सिस्टम उनके कामकाजी जीवन को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं. 

रिसर्च में यह भी बताया गया कि अगर AI को पक्षपातपूर्ण डेटा दिया जाए, तो उसके फैसले भी पक्षपातपूर्ण हो सकते हैं. एक प्रयोग में ChatGPT से पुरुष और महिला नामों वाले रिज्यूमे बनवाए गए. इसमें महिलाओं के रिज्यूमे को कम अनुभव वाला दिखाया गया, जबकि पुरुषों के रिज्यूमे को बेहतर माना गया. बाद में जब AI से इन रिज्यूमे का मूल्यांकन कराया गया, तो उसने ज्यादा उम्र और अनुभव वाले पुरुषों के रिज्यूमे को ज्यादा अच्छी रेटिंग दी. 

Advertisement

एआई को अपनाने में पीछे हो सकती हैं महिलाएं 

हालांकि, महिलाएं AI को अपनाने में पीछे रह सकती हैं लेकिन अगर वे काम में AI का इस्तेमाल करती हैं तो उन्हें ज्यादा आलोचना या नुकसान झेलना पड़ सकता है. रिसर्च में पाया गया कि जब एक ही तरह का काम AI की मदद से किया गया तो महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा नकारात्मक तरीके से देखा गया. रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि AI का गलत इस्तेमाल महिलाओं को निशाना बनाने के लिए बढ़ रहा है. कुछ मामलों में लोगों ने AI की मदद से महिलाओं की फर्जी और आपत्तिजनक डीपफेक तस्वीरें बनाई हैं. यहां तक कि कुछ AI चैटबॉट्स पर भी ऐसे गलत इस्तेमाल के आरोप लगे हैं. 

क्या महिलाएं कम कर रही हैं एआई का यूज? 

रिसर्च में पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं जनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल कम करती हैं. 18 अध्ययनों में दोनों के इस्तेमाल के बीच करीब 25% का अंतर देखा गया. इससे यह भी संकेत मिलता है कि महिलाएं वर्कप्लेस पर AI टूल्स अपनाने में पीछे हो सकती हैं. हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि महिलाओं के बीच AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. 2022 से 2024 के बीच ChatGPT के करोड़ों यूजर्स में बड़ी संख्या महिलाओं की थी और आगे यह संख्या और बढ़ने की संभावना है.  महिलाएं खास तौर पर लेखन और रोजमर्रा की सलाह लेने के लिए AI का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं. 

Advertisement

फिलहाल यह साफ नहीं है कि AI का महिलाओं की नौकरियों पर कितना असर पड़ेगा. रिपोर्ट के अनुसार, इसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां और सरकारें AI को लेकर कैसी नीतियां बनाती हैं और कार्यस्थलों पर इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है. 

---- समाप्त ----
रिपोर्टर- अरमान अग्रवाल

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement