काम-10 साल, सैलरी जीरो! जानिए- आख‍िर क्यों ऐसी नौकरी में ही ट‍िका रहा कर्मचारी?

आज के समय में जहां नौकरी बदलना तेजी से आगे बढ़ने का एक तरीका माना जाता है, वहीं लंबे समय तक एक ही कंपनी में रहने का ट्रेंड खत्म होता जा रहा है. लेकिन हाल ही की एक घटना सामने आई है जो दिखाती है कि कई बार काम की जगह पर बने मजबूत रिश्ते, पैसे या करियर में तरक्की से भी ज्यादा अहम हो सकते हैं. 

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आखिर क्यों एक कर्मचारी 10 साल तक एक ही कंपनी में था. (Photo: Pexels) आखिर क्यों एक कर्मचारी 10 साल तक एक ही कंपनी में था. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST

आज के समय में जहां नौकरी बदलना करियर में तेजी से आगे बढ़ने का सबसे आसान तरीका माना जाता है, वहीं करियर काउंसलर साइमन इंगारी की एक हालिया घटना ने इस सोच को अलग नजरिए से दिखाती है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि क्यों कुछ लोग बार-बार नौकरी बदलने के बजाय एक ही कंपनी के साथ लंबे समय तक जुड़े रहते हैं. यह घटना बताती है कि कई बार वर्कप्लेस पर मिलने वाला इमोशनल हेल्प और समझदारी, पैसे या बड़ी सैलरी से भी ज्यादा अहम हो सकती है और यही चीज लोगों के करियर से जुड़े फैसलों को प्रभावित करती है.

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क्या कोई एक कंपनी में 10 साल तक रह सकता है?

आज के कॉम्पिटेटिव जॉब मार्केट में प्रोफेशनल्स बेहतर सैलरी, बढ़ी हुई जिम्मेदारियां या अंतरराष्ट्रीय अनुभव पाने के लिए अपनी नौकरी बदलते रहते हैं. करियर में ग्रोथ, सीखने के अवसर और कार्य संस्कृति ऐसे फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं. लेकिन इस घटना में, एक कर्मचारी ने ग्रोथ हासिल करने के बजाय पूरे 10 साल तक उसी कंपनी में बने रहने का फैसला किया. लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह फैसला सैलरी ग्रोथ, बोनस या अन्य सुविधाओं के कारण नहीं था बल्कि यह उस व्यक्ति के एक बेहद व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित था, जिसने उनकी कंपनी के प्रति वफादारी को मजबूती दी. 

क्या इतनी जरूरी है ईमानदारी?

करियर काउंसलर साइमन इंगारी ने पोस्ट में बताया गया कि एक कर्मचारी को परिवार में कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा. उस दौरान उनके मैनेजमेंट ने बहुत समझदारी और सहानुभूति दिखाई. कई जगहों पर डॉक्यूमेंटेशन को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. मैनेजमेंट ने न तो पूछताछ की और न ही कोई सबूत मांगा. इसके बजाय कर्मचारी को काम की चिंता किए बिना अपने परिवार पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया. कंपनी के इस व्यवहार का कर्मचारी पर गहरा असर पड़ा. नतीजा यह हुआ कि कर्मचारी का संगठन के साथ जुड़ाव और भी मजबूत हो गया. 

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क्या आज के समय में कर्मचारी करते हैं ऐसा?

यह घटना हमें वर्कप्लेस की एक अहम लेकिन अक्सर अनदेखी बात दिखाती है जिसे इमोशनल सेफ्टी कहते हैं. हाई सैलरी, बोनस या आधुनिक ऑफिस जैसी सुविधाएं कर्मचारियों को आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन उन्हें लंबे समय तक रोकने के लिए हमेशा काफी नहीं होती. साइमन इंगारी के उदाहरण से यह साफ है कि कर्मचारी वहीं रहना पसंद करते हैं जहां उन्हें सिर्फ काम करने वाले के रूप में नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में भी महत्व दिया जाता हो. 

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