क्या आप भी ऑफिस में अकेले रहना करते हैं पसंद? तो खराब हो सकता है आपका करियर

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस में फालतू की बातचीत से बचते हैं? आपको लगता है कि आप सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन यह आपकी ये आदत आपको नुकसान पहुंचा सकती है. रिसर्च भी इस बात का समर्थन करते हैं. जानिए क्यों, चुपचाप काम करना और बातचीत से दूर रहना आपके करियर की तरक्की को प्रभावित कर सकता है. 

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ऑफिस में केवल काम करने के हो सकते हैं कई नुकसान. (Photo : Pexels) ऑफिस में केवल काम करने के हो सकते हैं कई नुकसान. (Photo : Pexels)

प्रिंसी शुक्ला

  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

क्या आप भी उन कर्मचारियों में से एक हैं, जो ऑफिस आते हैं, काम करते हैं और समय से चले जाते हैं. किसी तरह की कोई फालतू बात नहीं करते हैं, कोई टीम लंच में नहीं जाते हैं या ऑफिस के बाद किसी से मुलाकात करना पसंद नहीं करते हैं. आज के दौर में कई लोग इस तरह की तरीके को अपना रहे हैं. यह दूरी बनाना के लिए नहीं बल्कि अपनी पर्सनल लाइफ और मानसिक शांति को महत्व देने के लिए कर रहे हैं. लेकिन इस बीच एक सवाल यह है कि क्या सिर्फ अच्छा काम करना ही करियर में आगे बढ़ने के लिए काफी है?

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आज की सच्चाई यह है कि कई जगहों पर सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि लोगों से आपके रिश्ते और नेटवर्किंग भी मायने रखती है. यही वजह है कि रिसर्च भी बताती है कि काम के साथ रिश्ते बनाना भी करियर ग्रोथ में बड़ा रोल प्ले करते हैं. 

क्या कहती हैं रिपोर्ट?

हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में पब्लिश वर्कप्लेस नेटवर्क पर एक रिसर्च में पाया गया कि जो कर्मचारी ऑफिस में अच्छे रिश्ते बनाते हैं उन्हें नई जानकारी, सही सलाह और बेहतर मौके ज्यादा मिलते हैं. ये चीजें उनके करियर को आगे बढ़ाने में मदद करती है. आज के दौर में केवल आपका काम मायने नहीं रखता बल्कि यह भी जरूरी है कि लोग आपको कितना जानते और समझते हैं.  

अकेले रहने के हो सकते हैं कई नुकसान 

ऑफिस में कुछ नियम ऐसे भी होते हैं जो लिखे नहीं जाते लेकिन असर जरूर डालते हैं. जैसे नए आइडिया पर बात करते हुए किसा नाम सबसे पहले लिया जा रहा है या किसे उस काबिल समझा जा रहा है, जो ये काम कर सकता है. लीडरशिप की बातों में किसका नाम लिया जाता है या किसे भरोसेमंद और टीम के साथ चलने वाला माना जाता है. एमआईटी स्लोअन मैनेजमेंट रिव्यू की एक स्टडी बताती है कि ऑफिस में होने वाली छोटी-छोटी अनौपचारिक बातों से भरोसा बढ़ता है, जानकारी शेयर करने में मदद करती है और टीम को मजबूत बनाती है.

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ऐसे लोग अक्सर बेहतर टीम प्लेयर माने जाते हैं. दूसरी तरफ सोचिए. अगर कोई व्यक्ति हमेशा इन बातचीतों और मेलजोल से दूर रहता है, चाहे उसकी वजह बिल्कुल सही ही क्यों न हो, तो लोगों की नजर में उसकी एक अलग छवि बन सकती है. वर्कलाइन के फाउंडर साईकिरण मुरली के मुताबिक, लगातार अनौपचारिक बातचीत से दूरी बनाने का असर किसी कर्मचारी की इमेज पर पड़ सकता है, भले ही उसका काम शानदार हो. 

यहीं से मौन बहिष्कार (Silent Exclusion) की बात सामने आती है. इंस्टाहायर के सह-संस्थापक सरबोजित मल्लिक का कहना है कि आज के ऑफिस माहौल में अगर कोई व्यक्ति खुद को अनौपचारिक मेलजोल से अलग रखता है, तो धीरे-धीरे उसके लिए मौके कम हो सकते हैं. यह सिर्फ एक सोच नहीं बल्कि रिसर्च में भी सामने आया है. जर्नल बिहेवियरल साइंसेज (एमडीपीआई) में 2023 में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जिन कर्मचारियों को छोटी-छोटी सामाजिक बातचीत से भी अलग रखा जाता है, उन्हें अक्सर कम पहचान और कम ग्रोथ के मौके मिलते हैं.

मल्लिक ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक अच्छा काम करने वाले डेवलपर को सिर्फ इसलिए लीडरशिप रोल नहीं मिला क्योंकि वह ऑफिस के बाद होने वाली सोशल एक्टिविटीज में हिस्सा नहीं लेता था. उसकी जगह ऐसे कर्मचारी को मौका मिला जो लोगों के बीच ज्यादा एक्टिव था. इस बीच एक सवाल खड़ा होता है कि क्या सिर्फ अच्छा प्रदर्शन ही करियर में आगे बढ़ने के लिए काफी है या लोगों से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी हो गया है?

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कितनी जरूरी है पहचान? 

मुरली कहते हैं कि ऑफिस में पहचान सिर्फ अच्छे रिजल्ट देने से नहीं बनती, बल्कि रोज होने वाले छोटे-छोटे टीम के साथ लंच, बातचीत से भी बनती है. इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर टीम डिनर या हर सोशल इवेंट में जाना जरूरी है. लेकिन सच यह है कि छोटी बातचीत, हल्की-फुल्की चर्चा और अनौपचारिक मीटिंग्स अक्सर लोगों की सोच और आपकी छवि को प्रभावित करती हैं. जर्नल ऑफ ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जो कर्मचारी ऑफिस में अनौपचारिक बातचीत में हिस्सा लेते हैं, उन्हें फैसलों में ज्यादा अहमियत मिलती है और लीडरशिप रोल के लिए भी ज्यादा देखा जाता है. अब सवाल यह है कि अगर आप इन जगहों पर मौजूद ही नहीं हैं, तो क्या आप अनजाने में लोगों की नजरों से दूर होते जा रहे हैं? 

लीमिट है जरूरी 

साथ ही वर्कप्लेस में भी कई बदलाव आ रहे हैं. आज कई प्रोफेशनल्स उस ऑफिस कल्चर से दूरी बना रहे हैं जिसे वे सिर्फ दिखावा मानते हैं. लोग अब बेवजह की मीटिंग्स, काम के बाद होने वाले सोशल इवेंट्स और हर समय उपलब्ध रहने की उम्मीद से बचना चाहते हैं. वे अपने पर्सनल टाइम और मानसिक शांति को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. वह आगे कहते हैं कि आज के दौर में लोग अपनी स्पष्ट सीमाएं तय कर रहे हैं और यह बिल्कुल स्वाभाविक भी है और जरूरी भी. लेकिन असली चुनौती यह है कि जहां कर्मचारी काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कई कंपनियां अब भी कर्मचारियों को पुराने पैमानों से ही आंक रही है. यानी सिर्फ काम नहीं, बल्कि ऑफिस में आपकी मौजूदगी और मेलजोल भी कई जगहों पर मायने रखता है. 

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काम ही है इनफ? 

देखा जाए तो किसी भी कर्मचारी की पहचान उसके काम से होनी चाहिए. लेकिस सच्चाई कुछ अलग ही होती है. सरबोजीत मल्लिक के मुताबिक, सिर्फ अच्छा प्रदर्शन ही काफी नहीं होता. लोगों की धारणा भी तय करती है कि आपको कौन नोटिस करेगा, किस पर भरोसा किया जाएगा और किसे आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. यही वजह है कि कई बार परफॉर्मेंस और पर्सेप्शन के बीच का अंतर करियर की रफ्तार को धीमा कर देता है. इस समस्या का समाधान सिर्फ कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि कंपनियों पर भी है. मुरारी का कहना है कि संगठनों को ऐसे सिस्टम बनाने चाहिए जहां प्रमोशन और पहचान सिर्फ सोशल एक्टिविटी या दिखावे पर नहीं, बल्कि काम पर आधारित हो. 

तो क्या है निष्कर्ष? 

लेकिन सच यह है कि करियर ग्रोथ केवल काम करने से नहीं आती है बल्कि काम और सही तरीके से दिखाई देने के संतुलन से बनती है. आपको ऑफिस में सबसे ज्यादा मिलनसार या हर किसी से घुलने-मिलने वाला व्यक्ति बनने की जरूरत नहीं है लेकिन अगर आप पूरी तरह से खुद को अलग कर लेते हैं, तो इसका असर आपके करियर पर पड़ सकता है. इसके लिए वर्कप्लेस में केवल काम ही नहीं, बल्कि आपकी दिखाई देने की क्षमता भी मायने रखती है. कई बार करियर में सबसे बड़ा खतरा खराब प्रदर्शन नहीं होता, बल्कि यह होता है कि अच्छा काम करने के बावजूद आप नजर ही नहीं आते. 

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