छोटे से गांव के लड़के ने किया NDA टॉप, पिता हुए भावुक-बेटे से मिलने बलिया से पहुंचे देहरादून   

कई बार तैयारी इतनी खामोशी से होती है कि सफलता शोर मचा देती है. ऐसी ही एक कहानी है बलिया जिले के एक छोटे से गांव जकरिया के रहने वाले पार्थ कुमार तिवारी की. उन्होंने NDA 2025 की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का नाम ऊंचा किया है बल्कि अपने गांव का नाम भी रौशन किया है. इतना ही नहीं जब उनके पिता को उनके रैंक के बारे में मालूम चला तो बिना सोचा उन्होंने बलिया से देहरादून की टिकट कर ली और उनसे मिलने पहुंच गए. 

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 NDA Topper Parth Tiwari (Photo: Instagram) NDA Topper Parth Tiwari (Photo: Instagram)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले पार्थ कुमार तिवारी ने कुछ ऐसा करके दिखाया है जिसका सपना लाखों युवा देखते हैं. उन्होंने देश की नामी NDA परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है. रैंक-1 हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिला का नाम रौशन किया है. उनकी इस सफलता के बारे में जब उनके पिता को मालूम चला तो वह अपने आप को रोक नहीं पाएं और बेटे से मिलने बलिया से देहरादून पहुंच गए. 

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कौन हैं पार्थ कुमार तिवारी? 

बता दें कि पार्थ का जन्म 2009 में हुआ था और उनकी शुरुआती पढ़ाई कर्नाटक के कोडगु जिले से हुई. LKG से कक्षा 3 तक उन्होंने ज्ञाम गंगा स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद से उन्होंने यूनिक कॉन्वेंट स्कूल से आगे की पढ़ाई की. इसके बाद नवोदय विद्यालय से कक्षा 6 और 7 की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद से उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा यू- टर्न तब आया जब कक्षा 8वीं में उनका चयन देहरादून के राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) में हुआ.

इंटरव्यू होता है सबसे टफ 

पार्थ ने 14 सितंबर को देहरादून में NDA की लिखित परीक्षा दी. इसके बाद उन्होंने जनवरी में बंगलुरु में SSB इंटरव्यू का सामना किया. माना जाता है कि NDA के लिए इंटरव्यू पास करना बहुत मुश्किल होता है. इसमें उम्मीदवार की मेंटल एबिलिटी, लीडरशिप स्किल और पर्सनालिटी का आकलन किया जाता है. 

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पिता पहुंचे देहरादूर 

पार्थ की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का सबसे बड़ा हाथ है. उनके लिए हिंदी के टीचर थे जो अब रिटायर हो चुके हैं वहीं, माता भी प्राइवेट स्कूल में टीचर थी. उनके परिवार में हमेशा से पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया है. जब पार्थ के पिता को मालूम चला कि बेटे से परीक्षा में रैंक-1 हासिल किया है, तो उन्होंने बिना कुछ सोचे बलिया से देहरादून बेटे से मिलने चले गए. 

एक बहन इंजीनियर तो दूसरी एडवोकेट 

बता दें कि पार्थ की दो बहनें हैं जो पढ़ने में बहुत अच्छी है. बड़ी बहन संध्या बेंगलुरु में इंजीनियर हैं वहीं, दूसरी बहन निवेदिता सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट हैं. 

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