'बने रहो पगला-काम करेगा अगला...'ऑफिस में 'फेक वर्क' का नया ट्रेंड, कर्मचारी ने बताया कैसे बॉस को बनाया बेवकूफ, बचाए 2 घंटे

बने रहो पगला, काम करेगा अगला... अभी तक आपने ऐसे कई देसी जुगाड़ सुने होंगे. लेकिन साहब, एक कॉपरेट 'महारथी' ने तो इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है. जब ऑफिस की चारदीवारी में काम से ज्यादा 'दिखावे' की कीमत होने लगे, तो लोग क्या-क्या तिगड़म भिड़ाते हैं, इसका एक नमूना सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

Advertisement
जितनी सैलरी, उतना ही काम! कर्मचारी के इस 'पायथन कोड' ने खोली कॉर्पोरेट कल्चर की पोल जितनी सैलरी, उतना ही काम! कर्मचारी के इस 'पायथन कोड' ने खोली कॉर्पोरेट कल्चर की पोल

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:10 AM IST

क्या कभी आपने शुक्रवार की दोपहर स्क्रीन को घूरते हुए सिर्फ इसलिए वक्त काटा है क्योंकि आपको 'व्यस्त' दिखना था? कई दफ्तरों में आज भी काम से ज्यादा 'दिखावे' को अहमियत दी जाती है. इसी कड़वी हकीकत को एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसने ऑफिस प्रेशर से निपटने के लिए एक अनोखा और 'चालाकी भरा' रास्ता निकाला है.

Advertisement

रेडिट पर एक गुमनाम यूजर की यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है. इस कर्मचारी ने बताया कि कैसे उसके ऑफिस का माहौल उसे काम का दिखावा करने के लिए मजबूर करता है. उसके मुताबिक, वहां उत्पादकता से ज्यादा इस बात की कीमत है कि आप अपनी डेस्क पर बैठे दिख रहे हैं या नहीं.

वो 'Fake' वर्क हैक जिसने सबको चौंका दिया
इस कर्मचारी ने 'गेम खेलने' का फैसला किया और एक ऐसा तकनीकी जुगाड़ निकाला जिससे लगे कि वह बहुत ही पेचीदा काम कर रहा है. उसने बताया कि मैंने अपने दूसरे मॉनिटर पर एक 'डमी पायथन स्क्रिप्ट' चला रखी है. यह स्क्रिप्ट धीरे-धीरे सैकड़ों लाइनों को प्रिंट करती है जो सर्वर लॉग की तरह दिखती हैं. अगर कोई मैनेजर पास से गुजरता है या मेरा स्क्रीन शेयर चेक करता है, तो उसे लगता है कि मैं किसी बड़े डेटा पाइपलाइन डिप्लॉयमेंट की मॉनिटरिंग में गहराई से जुटा हूं.

Advertisement

हकीकत में, वह उस समय किताबें पढ़ता है या अपने वीकेंड की प्लानिंग करता है.

वर्क प्रेशर या स्मार्ट सर्वाइवल?
इस पोस्ट ने उन हजारों लोगों का ध्यान खींचा है जो ऐसे माहौल में फंसे महसूस करते हैं जहां लंबे घंटों तक बैठे रहने को ही मेहनत मान लिया जाता है. कर्मचारी का कहना है कि यह तरीका उसे हर शुक्रवार को कम से कम 2 घंटे की शांति देता है. वह इसे 'एक्टिंग माई वेज' यानी अपनी सैलरी के हिसाब से काम करना कहता है.

इंटरनेट पर भी इस पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोग इसे आलस कह रहे हैं, तो कई इसे अपनी मेंटल हेल्थ बचाने का 'स्मार्ट तरीका' मान रहे हैं. कई यूजर्स ने अपने भी ऐसे ही 'हैक' शेयर किए हैं, जिससे यह पोस्ट एक 'कॉर्पोरेट विद्रोह' जैसी चर्चा में बदल गई है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement