भारत में 16 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जनगणना की शुरुआत हो चुकी है.आखिरी बार देश में जनगणना साल 2011 में हुई थी. वैसे तो जनगणना हर 10 साल में कराई जाती है जिसकी शुरुआत आजादी के पहले से ही हो गई थी. स्वतंत्र भारत में अब तक 7 बार जनगणना हो चुकी है लेकिन इस बार जनगणना के तरीके में बदलाव देखे जा रहा है. ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि ये क्यों जरूरी है और इसकी प्रक्रिया कैसे काम करती है? लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर जनगणना हो रही है तो इसके लिए नौकरी के भी अच्छे मौके मिलेंगे लेकिन किस तरह के पोस्ट पर नौकरी मिलती है. तो चलिए जान लेते हैं इससे जुड़ी सभी प्रक्रिया के बारे में.
क्या है जनगणना?
भारत में जनगणना एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों से जुड़ी जानकारी को एक समय में इकट्ठा किया जाता है. इसमें जानकारी में लोगों की संख्या, उम्र, शिक्षा समेत कई बातें शामिल होती हैं. इकट्ठा की गई सारी जानकारी को व्यवस्थित करके उसका एनालिसिसि किया जाता है और फिर लोगों और सरकार तक पहुंचाया जाता है. वैसे तो भारत में हर 10 साल पर जनगणना करवाया जाता है लेकिन आखिरी बार ये साल 2011 में हुआ था. ये भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से आयोजित किया जाता है.
इस बार बदला है जनगणना का तरीका
इस बार यानी 2026-2027 के जनगणना का प्रोसेस शुरू हो चुका है लेकिन इस बार कुछ बदलाव देखें जा रहे हैं. ट्रेडिशनल प्रक्रिया के साथ इस बार डिजिटल तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है. गणना करने वाले कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करेंगे. इसके अलावा जनता खुद भी ऑनलाइन जानकारी दे सकेंगे. इस साल की जनगणना दो चरण में होगी. इसे बेहतर तरीके से काम करने के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS)' पोर्टल बनाया गया है. इस पोर्टल से अधिकारी जनगणना से जुड़ी तैयारियों को देख सकेंगे.
स्व-गणना की सुविधा: पहली बार आम जनता को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की छूट दी गई है. नागरिक आधिकारिक पोर्टल पर जाकर 16 भाषाओं में से किसी भी भाषा में अपने परिवार की जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं. इसके बाद उन्हें एक यूनिक SE ID मिलती है, जिसे बाद में आने वाले प्रगणक को दिखाना होता है.
जातिगत जनगणना : इस बार की जनगणना में एक बड़ा नीतिगत बदलाव यह है कि इसमें व्यापक स्तर पर जातिगत डेटा भी जुटाया जा रहा है, जिसकी मांग लंबे समय से हो रही थी.
कैसे होती है जनगणना?
जनगणना की प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है. सबसे पहले घरों की लिस्ट तैयार की जाती है. इसके बाद प्रशिक्षित गणना करने वाले घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाते हैं लेकिन अब डिजिटल पोर्टल से डेटा सीधे दर्ज किया जाएगा. फिर इस डेटा का वेरिफिकेशन और एनालिसिस किया जाता है. अंत में रिपोर्ट तैयार कर सरकार और जनता के लिए जारी की जाती है.
क्या हैं नौकरी के अवसर?
जनगणना के इस महा-अभियान को पूरा करने के लिए सरकार को जमीनी स्तर से लेकर उच्च प्रशासनिक और तकनीकी स्तर तक भारी संख्या में जनशक्ति की आवश्यकता होती है. इस बार डिजिटल जनगणना होने के कारण नौकरियों का प्रोफाइल पहले से काफी बदल गया है.
फील्ड और जमीनी स्तर के पद
ये वे पद हैं जो सीधे जनता के बीच जाकर डेटा जुटाने का काम करते हैं. इसके लिए राज्यों/जिलों में स्थानीय स्तर पर चयन प्रक्रिया या कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्तियां की जाती हैं.
एन्यूमरेटर: यह जनगणना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. एन्यूमरेटर का मुख्य काम घर-घर जाकर मोबाइल ऐप के जरिए लोगों की जानकारी दर्ज करना होता है. इसमें अक्सर स्थानीय सरकारी शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं या कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए युवाओं को मौका मिलता है.
पर्यवेक्षक: हर 5 से 6 एन्यूमरेटर के ऊपर एक सुपरवाइजर नियुक्त किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि डेटा सही तरीके से और समय पर फीड हो रहा है या नहीं.
टेक्निकल और डेटा एंट्री पद
चूंकि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल है, इसलिए देश के लगभग सभी राज्यों में जिला कार्यालयों और नगर निकायों में आउटसोर्सिंग/एजेंसियों के माध्यम से कई पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं.
टेक्निकल असिस्टेंट: इस बार इस पद की भारी मांग है. इनका काम एन्यूमरेटर को डिजिटल उपकरणों (स्मार्टफोन, टैबलेट और वेब पोर्टल) के इस्तेमाल में मदद करना, ऐप की तकनीकी दिक्कतों को दूर करना और डेटा सिंक्रनाइज़ेशन देखना होता है. (इसके लिए कंप्यूटर/आईटी की जानकारी या डिप्लोमा मांगा जाता है).
डेटा एंट्री ऑपरेटर: जो लोग स्व-गणना (Self-Enumeration) नहीं कर पाते या जहां ऑफलाइन डेटा को डिजिटल फॉर्मेट में बदलना होता है, वहां इन ऑपरेटरों की जरूरत होती है.
मल्टी-टास्किंग स्टाफ: जिला जनगणना कार्यालयों और स्थानीय तहसीलों में प्रशासनिक और सामान्य आधिकारिक कार्यों में सहायता के लिए 10वीं/12वीं पास युवाओं को इस पद पर रखा जाता है.
उच्च प्रशासनिक और आधिकारिक पद
गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय महापंजीयक कार्यालय (ORGI) और राज्यों के जनगणना निदेशालयों (DCO) की ओर से कुछ पदों पर भर्ती की जाती है.
कार्यकारी अधिकारी - यह लेवल-11 (7th CPC) का एक बड़ा पद है, जो जनगणना रणनीतियों को लागू करने और फील्ड गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार होता है.
रिसर्च एसोसिएट: जनगणना के विशाल डेटा का विश्लेषण, रिपोर्ट राइटिंग और कोडिंग करने के लिए सांख्यिकी या अर्थशास्त्र पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञों को नियुक्त किया जाता है.
कंसल्टेंट्स- हाल ही में सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को भी उनके अनुभव के आधार पर सलाहकार या कंसल्टेंट के रूप में अनुबंध पर रखने के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं.
भर्ती की जानकारी कहां मिलेगी?
भारत सरकार के जनगणना पोर्टल (censusindia.gov.in)पर नजर रखें. तकनीकी सहायक और MTS पदों के लिए अपने राज्य के जनसंपर्क विभाग (PRD), स्थानीय जिला कलेक्ट्रेट की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय समाचार पत्रों के भर्ती विज्ञापनों को चेक करते रहें.
आजतक एजुकेशन डेस्क