IIT के रिजेक्शन ने मुझे तोड़ दिया... Meta का करोड़ों का ऑफर भी नहीं आया काम, टेक प्रोफेशनल ने साझा किया दर्द

कई बार जीवन में रिजेक्शन बहुत फायदेमंद साबित होते हैं. इससे आपके ऊपर अच्छा प्रभाव पड़ता है. भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमित दत्ता की आईआईटी प्रवेश परीक्षा में फेल होने से लेकर गूगल में नौकरी पाने और लंदन में मेटा में 1.7 करोड़ रुपये का पैकेज पाना किसी प्रेरणा से कम नहीं है. 

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 आईआईटी में हुए फेल, गूगल में लगी नौकरी, मेटा में 1.7 करोड़ रुपये की नौकरी हासिल की. (Photo: Instagram/@AmitDutta) आईआईटी में हुए फेल, गूगल में लगी नौकरी, मेटा में 1.7 करोड़ रुपये की नौकरी हासिल की. (Photo: Instagram/@AmitDutta)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST

अक्सर हम रिजेक्शन को फेलियर की तरह देखते हैं. ऐसे लगता है कि एक बार रिजेक्ट होने के बाद कभी लाइफ में आगे नहीं बढ़ पाएंगे. लेकिन अमित दत्ता के लिए यह एक ऐसे रास्ते का खुलना था जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. आईआईटी (IIT) प्रवेश परीक्षा में फेल होने के बाद टूटने के बजाय अमित ने अपनी मेहनत से गूगल जैसी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी में नौकरी की और आज वे लंदन में मेटा के साथ ₹1.7 करोड़ के शानदार पैकेज पर काम करने का सफर तय किया है. ये सब तब ही हुआ जब उन्होंने रिजेक्शन का सामना किया. अमित की ये जर्नी साबित करती है कि आपकी डिग्री से ज्यादा आपका हुनर और हार न मानने का जज्बा मायने रखता है. 

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सोशल मीडिया पर शेयर की जर्नी 

अमित दत्ता ने हाल ही में इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए अपनी करियर से जुड़ी जर्नी शेयर की. उस पोस्ट में उन्होंने 2018 में आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास करने में असफल होने के बाद गूगल में नौकरी पाने और मेटा में अवसर मिलने के बाद लंदन चले जाने के बारे में खुलकर बात की है. उनकी जर्नी ने ऑनलाइन हजारों लोगों को इंस्पायर कर रही है.  

IIT में रिजेक्शन के बाद क्या...

दत्ता ने बताया कि आईआईटी प्रवेश परीक्षा पास न कर पाना उनके लिए मानसिक रूप से बहुत तनाव भरा था, खासकर की तब जब उन्होंने अपने दोस्तों को टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश मिलने का जश्न मनाते देखा. लेकिन अमित ने हार मानकर बैठने के बजाय अपनी सोच बदली. उन्होंने इस बात का दुख मनाना छोड़ दिया कि उन्हें IIT नहीं मिला और इसके बजाय उन्होंने खुद को एक बेहतरीन सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाने पर पूरा ध्यान लगा दिया. उन्होंने सख्य रूटीन अपनाया और अपनी स्किल्स को सुधारने पर फोकस किया. अमित का मानना है कि अपनी असफलता को स्वीकार कर आगे बढ़ने का उनका फैसला उनकी सफलता की शुरुआत थी. 

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दूसरे रिजेक्शन ने और बढ़ाया हौसला 

अगली चुनौती साल 2021 में सामने आई, जब उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया. हालांकि, 
हफ्तों की तैयारी के बावजूद उनका सिलेक्शन नहीं हुआ. उस समय के बारे में सोचते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे रिजेक्शन ने मुझे मानों अंदर से तोड़ दिया लेकिन दोबारा खड़े होने में मदद की. इस रिजेक्शन ने उनकी विल पावर को और मजबूत किया. साल 2022 में उन्हें उनकी मेहनत का फल मिला, जब उन्हें गूगल जैसी कंपनी में फुल-टाइम नौकरी का ऑफर मिला. दुनिया भर के इंजीनियरों के लिए गूगल में काम करना एक सपने जैसा होता है, वहीं, अमित के लिए यह सिर्फ एक शुरुआत थी. 

मेटा में मिला 1.7 करोड़ का पैकेज 

अमित की कामयाबी का अगला चैप्टर तब शुरू हुआ जब मेटा ने खुद अपने लंदन ऑफिस के लिए उनसे संपर्क किया. यह सफर आसान नहीं था,उन्हें इंटरव्यू के छह राउंड से गुजरना पड़ा. सफलता मिलने के बाद वे लंदन शिफ्ट हो गए, जहां उनका सालाना पैकेज 1.7 करोड़ रुपये है. अमित अपनी इस जर्नी को एक बड़े बदलाव के रूप में देखते हैं. एक ऐसा कॉलेज जिसे कोई जानता तक नहीं था, वहां से निकलकर लंदन के ग्लोबल ऑफिस तक पहुंचना उनके लिए साल 2018 में एक सपने जैसा था. 

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