ग्रीन जॉब्स क्या हैं? 2030 तक भारत में क्यों आने वाला है बड़ा बूम, ये कोर्स दिलाएंगे सरकारी नौकरी!

CEEW की रिपोर्ट के अनुसार, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 34 लाख नौकरियां, ग्रीन हाइड्रोजन में 6 लाख से अधिक स्किल्ड जॉब्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम में 10 मिलियन डायरेक्ट रोजगार बन सकते हैं. यह सेक्टर न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है बल्कि आने वाले दशक का बड़ा रोजगार इंजन भी है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की बढ़ती चुनौती के बीच दुनिया भर में “ग्रीन इकोनॉमी” की ओर रुख तेज हो रहा है. ऐसे काम जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे बचाने, ऊर्जा बचाने या साफ ऊर्जा पैदा करने में मदद करें, उन्हें ग्रीन जॉब्स कहा जाता है.

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. इसमें सोलर, विंड और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर अहम भूमिका निभाएंगे. इसी बदलाव के साथ रोजगार के नए अवसर भी तेजी से पैदा हो रहे हैं.

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कितनी नौकरियां आ सकती हैं?

काउंसिल ऑफ एनर्जी एनवायर्नमेंट एंड वाटर (CEEW) की हाल‍िया रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में लगभग 34 लाख नौकरियां पैदा हो सकती हैं, खासकर सोलर और विंड एनर्जी में. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से 6 लाख से ज्यादा स्किल्ड जॉब्स आने का अनुमान है. 

वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इकोसिस्टम में 10 मिलियन डायरेक्ट और 50 मिलियन इंडायरेक्ट रोजगार बनने की संभावना जताई जा रही है. ये आंकड़े बताते हैं कि ग्रीन सेक्टर सिर्फ पर्यावरण की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले दशक का बड़ा रोजगार इंजन भी है.

ग्रीन जॉब्स में कौन-कौन से काम आते हैं?

सोलर पैनल इंस्टॉलर
विंड टरबाइन टेक्नीशियन
EV सर्विस इंजीनियर
बैटरी मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन
एनवायरमेंटल कंसल्टेंट
सस्टेनेबिलिटी मैनेजर
वेस्ट मैनेजमेंट एक्सपर्ट
ग्रीन बिल्डिंग डिजाइनर

12वीं के बाद क्या करें?

अगर आप 12वीं (साइंस/मैथ्स) के बाद इस सेक्टर में आना चाहते हैं, तो ये विकल्प देख सकते हैं:

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डिप्लोमा कोर्स

रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी
सोलर टेक्निशियन ट्रेनिंग
इलेक्ट्रिकल या मैकेनिकल डिप्लोमा

ITI कोर्स

इलेक्ट्रिशियन
वायरमैन
सोलर पैनल इंस्टॉलेशन ट्रेड

ग्रेजुएशन के बाद कौन-से कोर्स?

बीटेक/बीई इन इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग
बीएससी इन एनवायरमेंटल साइंस
एमटेक इन रिन्यूएबल एनर्जी
सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट में MBA

इसके अलावा कई यूनिवर्सिटीज शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स भी चला रही हैं, जिनसे आप खास स्किल सीख सकते हैं.

सैलरी कितनी मिल सकती है?

एंट्री लेवल पर सोलर या EV सेक्टर में 2.5 से 4 लाख सालाना पैकेज मिल सकता है.इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट बैकग्राउंड के साथ 6 से 12 लाख सालाना तक पहुंचना संभव है. अनुभव और विशेषज्ञता के साथ पैकेज तेजी से बढ़ सकता है.

क्यों है यह ‘फ्यूचर-प्रूफ’ सेक्टर?

बता दें कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है. सरकार की नीतियां, विदेशी निवेश और निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले 10–15 साल में ग्रीन जॉब्स का दायरा और फैलने वाला है. ऐसे में 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद सही दिशा में पढ़ाई और स्किल डेवलपमेंट करने वाले युवाओं के लिए यह सुनहरा मौका हो सकता है.

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