'5 महीने से जॉब खोज रहा, हर जगह ट्राई क‍िया, अब बेघर हो जाऊंगा' 25 साल के बेरोजगार ने बताया दर्द, लोगों ने दी उम्मीद

बेरोजगारी का दंश झेलना भी किसी सजा से कम नहीं है. पांच महीने से नौकरी की तलाश, खत्म होती बचत और अब बेघर होने की कगार पर एक ग्रेजुएट ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है. हर कोई उसे सांत्वना दे रहा है. आइए जानते हैं उनकी कहानी...

Advertisement
A Reddit user's post went viral. (Representational image from Pexels) A Reddit user's post went viral. (Representational image from Pexels)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:17 AM IST

कहते हैं कि 'पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब', लेकिन आज के दौर में एक डिग्री आपको सिर छिपाने की छत की गारंटी भी नहीं दे पा रही है. एक 25 साल के युवक ने सोशल मीडिया रेड‍िट पर अपनी जो आपबीती साझा की है, वह बताती है कि जॉब मार्केट की स्थिति कितनी डरावनी हो चुकी है. मनोविज्ञान में ग्रेजुएशन करने के बाद भी यह युवक आज दाने-दाने को मोहताज होने की स्थिति में है.

Advertisement

बता दें कि इस युवक को 5 महीने पहले उसकी नौकरी से निकाल दिया गया था. तब से वह लगातार काम ढूंढ रहा है, लेकिन नतीजा स‍िर्फ 'रिजेक्शन' रहा है. उसने लिखा कि मैंने अपनी पिछली नौकरी की जो भी बचत की थी, उससे अब तक किराया भरा, लेकिन अब मेरे पास स‍िर्फ इस आखिरी महीने के लिए ही पैसे बचे हैं. इसके बाद मेरे पास रहने को जगह नहीं होगी.

हर दरवाजा खटखटाया, पर हर तरफ... 
यह युवक किसी बड़ी कंपनी में ऑफिसर बनने के सपने नहीं देख रहा, बल्कि वह पेट पालने के लिए 'एंट्री लेवल' की किसी भी नौकरी के लिए तैयार है. उसने बताया कि उसने दर्जनों जॉब बोर्ड्स और कंपनियों की वेबसाइट्स पर आवेदन किया. यही नहीं स्थानीय बिजनेस के पास जाकर काम मांगा. यहां तक कि फास्ट फूड चेन और किराना स्टोर्स में भी अप्लाई किया.

Advertisement

युवक के मुताबिक, 1 लाख 20 हजार से ज्यादा की आबादी वाले शहर में रहने के बावजूद उसे हर जगह से 'घोस्ट' (अनदेखा) किया जा रहा है. उसे कोई जवाब तक नहीं मिल रहा.

न गाड़ी, न सरकारी मदद, न घर वापसी का रास्ता
किस्मत ने इस युवक को चारों तरफ से घेर लिया है. उसकी कार इतनी पुरानी और जर्जर है कि वह डिलीवरी बॉय का काम भी नहीं कर सकता. सरकारी मदद की बात आई तो वहां से भी खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि उसे नौकरी से निकाला गया था. उसे बताया गया कि मदद पाने के लिए पहले उसे कम से कम 750 डॉलर कमाने होंगे यानी एक ऐसी शर्त जिसे पूरा करना एक बेरोजगार के लिए मुमकिन नहीं है.

उसने दर्द भरे लहजे में लिखा कि मेरे पास अब न कुछ बेचने को बचा है और न ही मैं अपने घर वापस जा सकता हूं. मैं पूरी तरह से फंस चुका हूं. मैं बेघर होने वाला हूं और बस किसी भी तरह की एक नौकरी चाहता हूं.

सच्चाई यह है कि यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है. यह आज के 'जॉब मार्केट' की वो तस्वीर है जहां अनुभव की कमी, बढ़ती महंगाई और गलाकाट प्रतियोगिता ने युवाओं को तोड़कर रख दिया है. एक पढ़ा-लिखा युवा आज समाज में अपनी जगह बनाने के लिए नहीं, बल्कि स‍िर्फ 'सर्वाइवल' के लिए संघर्ष कर रहा है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement