भारत में डिग्रियां तो बढ़ रही हैं, लेकिन क्या उन डिग्रियों के दम पर नौकरी मिल रही है? जवाब डराने वाला है. अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की ताजा 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट ने एक ऐसी सच्चाई सामने रखी है, जिसने देश के एजुकेशन सिस्टम और जॉब मार्केट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
40 साल से वहीं खड़ी है गाड़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के लगभग 40% युवा ग्रेजुएट आज भी बेरोजगार हैं. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा आज का नहीं है. साल 1983 से लेकर 2023 तक, यानी पिछले 40 सालों में ग्रेजुएट बेरोजगारी की दर 35% से 40% के बीच ही अटकी हुई है. मतलब साफ है कि चार दशकों में हालात जस के तस बने हुए हैं.
अगर आप सोचते हैं कि डिग्री मिलते ही पक्की नौकरी मिल जाएगी, तो आंकड़े देख लीजिए. रिपोर्ट बताती है कि ग्रेजुएट होने के एक साल के भीतर सिर्फ 7% युवाओं को ही ऐसी नौकरी मिल पाती है जिसे हम 'परमानेंट' या सुरक्षित कह सकें. ज्यादातर युवाओं को छोटे-मोटे या अस्थाई कामों से ही संतोष करना पड़ रहा है.
पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी: 72% ने बताया आर्थिक तंगी
महंगाई और आर्थिक दबाव का असर अब बच्चों की पढ़ाई पर भी दिख रहा है. साल 2017 में पढ़ाई जारी रखने वाले युवाओं की संख्या 38% थी, जो 2024 के अंत तक गिरकर 34% रह गई है. पढ़ाई छोड़ने की सबसे बड़ी वजह 'पैसों की तंगी' है. साल 2017 में 58% युवाओं ने आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ी थी, लेकिन 2023 तक यह आंकड़ा बढ़कर 72% पहुंच गया है. यानी अब ज्यादा युवा मजबूरी में अपनी पढ़ाई बीच में ही रोक रहे हैं.
खेती की ओर लौट रहे हैं हाथ
एक और चिंताजनक बात यह है कि नई नौकरियां फैक्ट्री या ऑफिस के बजाय खेती में बढ़ रही हैं. पिछले दो सालों में जो 8.3 करोड़ नई नौकरियां जुड़ीं, उनमें से करीब 4 करोड़ नौकरियां अकेले कृषि क्षेत्र (Agriculture) में हैं. यह एक उल्टा ट्रेंड है, क्योंकि आमतौर पर विकास का मतलब होता है लोगों का खेती से निकलकर मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर में जाना.
अब समय कम है!
भारत के पास फिलहाल 15 से 29 साल के करीब 36 करोड़ युवा हैं. इसे 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' कहा जाता है, यानी वो ताकत जो देश की अर्थव्यवस्था को आसमान पर ले जा सकती है. लेकिन रिपोर्ट चेतावनी दे रही है कि 2030 के बाद कामकाजी उम्र वाली यह आबादी घटने लगेगी. अगर अगले कुछ सालों में क्वालिटी नौकरियां पैदा नहीं की गईं, तो भारत के लिए यह सुनहरा मौका हाथ से निकल जाएगा यह रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि सिर्फ डिग्री बांटने से काम नहीं चलेगा, अब उन डिग्रियों को काम में बदलने की सख्त जरूरत है.
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