नौकरी का संकट! इस नामी और बड़ी कंपनी में भी छंटनी की तैयारी, 15 हजार की जाएगी जॉब, जान लें वजह

कंपनियां अब पुराने तौर-तरीकों को छोड़कर एआई (AI) और ऑटोमेशन की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही हैं, जिसके चलते इंसानी हुनर पर मशीनी दिमाग भारी पड़ता दिख रहा है. आखिर कौन सी है वह कंपनी जो 12,000 से 15,000 लोगों की छुट्टी करने जा रही है? और क्यों भारत के टेक प्रोफेशनल्स इसकी रडार पर हैं? चलिए, समझते हैं इस 'डिजिटल विदाई' का पूरा सच.

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Cognizant से न‍िकाले जाएंगे हजारों कर्मचारी. (Image generated using AI) Cognizant से न‍िकाले जाएंगे हजारों कर्मचारी. (Image generated using AI)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST

आईटी (IT) सेक्टर में काम करने वाले युवाओं के लिए एक ऐसी खबर आई है, जो किसी बुरे सपने से कम नहीं है. दुनिया की एक दिग्गज टेक कंपनी ने अपने 'प्रोजेक्ट लीप' के तहत हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना लिया है. सबसे ज्यादा फिक्र की बात यह है कि इस महा-छंटनी की सबसे बड़ी गाज भारत पर गिरने वाली है, जहां हजारों परिवारों के चूल्हे इस नौकरी से जलते हैं.

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आईटी की दुनिया की दिग्गज कंपनी कॉग्नीजेंट से एक ऐसी खबर आई है जो हजारों लोगों की रातों की नींद उड़ा सकती है. कंपनी दुनिया भर में अपने 12,000 से 15,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने पर विचार कर रही है. सबसे ज्यादा फिक्र की बात यह है कि इस छंटनी का सबसे बड़ा हिस्सा भारत में होगा.

क्या है कंपनी का 'प्रोजेक्ट लीप'?
कॉग्नीजेंट ने अपनी इस छंटनी को 'प्रोजेक्ट लीप' का नाम दिया है. कंपनी का अनुमान है कि इस पूरे तामझाम में करीब $230 मिलियन से $320 मिलियन का भारी-भरकम खर्च आएगा.

इसमें से $200 मिलियन से $270 मिलियन तो सिर्फ लोगों को निकालने के खर्च (सेवरेंस पैकेज) और कर्मचारियों से जुड़े अन्य खर्चों के लिए अलग रखे गए हैं.

भारत पर क्यों है सबसे ज्यादा खतरा?
देखा जाए तो कॉग्नीजेंट में कुल 3,57,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 2,50,000 से ज्यादा कर्मचारी अकेले भारत में ही बसे हैं. यही वजह है कि जब भी वैश्विक स्तर पर कटौती की बात आती है, तो भारत के ऑफिसों में सबसे ज्यादा हलचल मच जाती है.

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क्यों हो रही है छंटनी?
इंडस्ट्री के बड़े जानकारों का कहना है कि अब क्लाइंट्स पुराने 'पिरामिड' स्टाइल वाले स्टाफिंग मॉडल से ऊब चुके हैं. अब जमाना बदल रहा है और कंपनियां ऑटोमेशन और डिजिटल आईटी लेबर की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं. सीधा मतलब ये है कि अब इंसानी दिमाग की जगह मशीनों और एआई को तरजीह दी जा रही है. 

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