केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शिक्षा को आधुनिक बनाने और छात्रों के कल्याण के लिए एक नए पहल की शुरुआत की है. बोर्ड ने स्कूल काउंसलरों और वेलनेस शिक्षकों के लिए AI की मदद से ऑनलाइन मूल्यांकन शुरू किया है, जिसे घर बैठे भी दिया जा सकता है. यह पहल काउंसलरों की क्षमता बढ़ाने और उनके काम की गुणवत्ता सुधारने के लिए की गई है. इसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के लिए बेहतर काउंसलिंग सिस्टम तैयार करना है. बता दें कि यह परीक्षा CBSE के क्षमता विकास कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके जरिए ये जांचा जाएगा कि काउंसलर बच्चों की मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को समझने और उन्हें संभालने में कितने सक्षम हैं. इस प्रक्रिया के तहत कुल 10,000 काउंसलर शामिल होंगे और इसे अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा.
इस एग्जाम के लिए पहला बैच फरवरी 2026 से शुरू हो चुका है. इस परीक्षा की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल किताबी नॉलेज नहीं बल्कि काउंसलर के व्यवहार, स्किल और स्कूल के माहौल में उनके काम करने के तरीके को भी परखा जाएगा. मतलब साफ है कि ये देखा जाएगा कि वो असल जिंदगी की स्थितियों को कैसे संभालते हैं और किस तरह छात्रों की मदद करते हैं.
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी परीक्षा
CBSE ने स्कूल काउंसलरों और वेलनेस टीचर्स के लिए एक नया ऑनलाइन टेस्ट शुरू किया है, जिसमें AI की मदद से निगरानी की जाती है. यह टेस्ट DIGI-EXAM प्लेटफॉर्म पर होता है और फरवरी 2026 से शुरू होकर करीब 10,000 काउंसलरों का धीरे-धीरे आकलन किया जा रहा है.
इसमें क्या देखा जाता है?
यह परीक्षा सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि असली काम पर ध्यान देती है, जैसे:
इसका उद्देश्य सिर्फ सर्टिफिकेट देना नहीं है, बल्कि काउंसलरों को बेहतर बनाना और उनकी काम करने की गुणवत्ता बढ़ाना है.
कौन-कौन दे सकता है एग्जाम?
वहीं, अगर चयन की बात करें, तो इसके लिए CBSE की ओर से नाम भेजा जाता है या स्कूल पोर्टल पर काउंसलरों का डेटा अपलोड करते हैं. स्कूल को यह डेटा हमेशा अपडेट रखना होता है ताकि कोई गलती न हो और सही लोगों को ही परीक्षा में शामिल होने का मौका मिले.
AI प्रोक्टरिंग सिस्टम कैसे करता है काम?
बता दें कि यह परीक्षा AI की मदद से ऑनलाइन निगरानी में होती है, ताकि परीक्षा पूरी तरह सही और निष्पक्ष हो सके. इसके लिए-
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