इस समय AI को लेकर चारों ओर बहस जारी है. यह अब केवल लोगों के काम करने के तरीके को ही नहीं बदल रही है बल्कि यह भी तय कर रही है कि कौन काम करेगा और कौन नहीं. हाल ही में फिनटेक कंपनी Block ने कहा कि वह लगभग 4,000 कर्मचारियों की नौकरी कम करेगा. कंपनी का कहना है कि अब AI टूल्स की मदद से छोटी टीम भी पहले जितना काम कर सकती है, इसलिए इतने ज्यादा लोगों की जरूरत नहीं है.
लेकिन इसके साथ ही कंपनी एआई के एक्सपर्ट इंजीनियरों की हायरिंग करने को तैयार है. मतलब, कुछ नौकरियां कम हो रही हैं, लेकिन AI से जुड़ी नई नौकरियां बढ़ रही हैं. यह पूरी दुनिया में बढ़ता हुआ ट्रेंड है. कंपनियां सामान्य और साधारण नौकरियों में कमी कर रही हैं.
लेकिन जो लोग एआई को सीख सकते हैं, संभाल सकते हैं या उसके साथ काम कर सकते हैं उनकी मांग लगातार बढ़ रही है.
बदल रहा है नौकरी का स्वरूप
पहले पढ़ने में ऐसा लगता है कि AI आपकी नौकरियां छीन रहा है. लेकिन असली बात सिर्फ नौकरी जाने की नहीं है बल्कि नौकरियों के बदलने की है. गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि पिछले साल सबसे ज्यादा प्रभावित कंपनियों में AI की वजह से हर महीने 5 से 10 हजार नौकरियां खत्म हुई और जनवरी के महीने में छंटनी में लगभग 7 फीसदी भूमिका AI की थी. लेकिन कंपनियां सिर्फ पुराने कर्मचारियों की जगह नए लोग नहीं रख रहीं बल्कि वे अपने पूरे काम करने के तरीके को AI के हिसाब से बदल रही है. उदाहरण के लिए जान लेते हैं कि एक कंपनी के CEO ने कहा कि छंटनी पैसों की कमी की वजह से नहीं थी बल्कि कंपनी को AI बेस्ड बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा थी. मतलब साफ है कि AI सिर्फ नौकरियां कम नहीं कर रहा, बल्कि पूरी रोजगार व्यवस्था का ढांचा बदल रहा है.
बदलते दौर में AI स्किल है जरूरी
अब नौकरी मार्केट में AI स्किल सबसे अहम स्किल बनता जा रहा है. हायरिंग प्रोसेस में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. भारत में एआई से जुड़े सही लोगों से जुड़ना और इस स्किल को सीखना थोड़ा कठिन हो गया है. 80% से ज्यादा कंपनियां कह रही हैं कि उन्हें योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहे. दुनिया भर में भी कंपनियां एआई से जुड़ी नौकरियों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं और ज्यादा हायरिंग कर रही हैं. वहीं, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की रिपोर्ट्स बताती हैं कि एआई के कारण खासकर शुरुआती (एंट्री लेवल) नौकरियों में कमी आ रही है. इससे नौकरी बाजार दो हिस्सों में बंटता जा रहा है. एक तरफ वे लोग जिनके पास एआई स्किल है, जिन्हें ज्यादा मौके मिल रहे हैं और दूसरी तरफ वे लोग जिनके पास ये स्किल नहीं है और अवसर कम हो रहे हैं.
एंट्री लेवल के लोग हो रहे हैं प्रभावित
इससे सबसे ज्यादा नुकसान उन युवा कर्मचारी को हो रहा है, जिन्होंने अभी अपने करियर की शुरुआत की है. AI एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे मशीनें और बेहतर काम करने लगेंगी, वैसे-वैसे शुरुआत की अच्छी (एंट्री लेवल) नौकरियां कम हो सकती हैं. पहले यही नौकरियां लाखों लोगों के करियर की शुरुआत का मौका देती थीं. अगर इनकी संख्या कम हो गई, तो लोगों के लिए नौकरी की दुनिया में कदम रखना ही मुश्किल हो सकता है. आने वाले समय में करियर शुरू करने के तरीके में भी बदलाव हो सकता है.
कम कर्मचारी ... ज्यादा उत्पाद
AI तेजी से काम करने के तरीके में बदलाव कर रही है. Cognizant जैसी कंपनियां अब अपने कोड का लगभग 30 फीसदी AI से बनवा रही हैं, फिर भी वे हजारों नए ग्रैजुएट्स को नौकरी पर रखने की योजना बना रही हैं. इसका मतलब यह है कि AI काम खत्म नहीं कर रहा बल्कि काम करने का तरीका बदल रहा है.
इसका असर ये है कि:
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