क्या आप भी यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रही हैं और खाकी वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं? अगर हां, तो क्या आपमें इस लेडी अफसर जैसी हिम्मत और जज्बा है? मिलिए तेलंगाना के एक छोटे से गांव से निकलकर पुलिसिंग की नई मिसाल पेश करने वाली जांबाज IPS बी.सुमति से. सुमति ने साबित किया है कि एक अधिकारी का काम सिर्फ फाइलों और दफ्तर तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज की कड़वी सच्चाई जानने के लिए खुद जमीन पर उतरना पड़ता है. खेतों से आईपीएस की कुर्सी तक और फिर आधी रात को 'अंडरकवर' होकर मनचलों की शामत लाने तक, बी.सुमति का यह सफर हर उस लड़की के लिए एक बड़ी सीख है जो सिस्टम को बदलने का ख्वाब देखती है. आइए जानते हैं उनकी प्रेरणादायक करियर प्रोफाइल...
गांव की पगडंडियों से IPS की कुर्सी तक
बी.सुमति का जन्म तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल जिले के एक छोटे से गांव कलुगोतला में हुआ. उनके पिता गांव के सरपंच थे, जिससे उन्हें बचपन से ही समाज सेवा की प्रेरणा मिली. हालांकि, ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा 'UPSC' की तैयारी करना एक बड़ी चुनौती थी. सुमति ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती.
कृषि विज्ञान से शुरू हुई 'एजुकेशन प्रोफाइल'
अक्सर माना जाता है कि सिविल सेवा के लिए केवल आर्ट्स के विषय जरूरी हैं, लेकिन सुमति की प्रोफाइल अलग है. उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन 'B.Sc Agriculture' (कृषि विज्ञान) में की. इसके बाद उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से MBA (HR) और फिर नामी NALSAR यूनिवर्सिटी से 'सिक्योरिटी और डिफेंस लॉ' में मास्टर्स डिग्री हासिल की. उनकी यह विविध शैक्षणिक पृष्ठभूमि (Educational Background) उन्हें एक स्मार्ट और तार्किक अधिकारी बनाती है.
छोटी उम्र में रचा इतिहास
सुमति के करियर की शुरुआत ही धमाकेदार रही. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तकरीबन 25 साल की उम्र में उन्होंने ग्रुप-1 की परीक्षा पास की और अविभाजित आंध्र प्रदेश की पहली महिला DySP बनकर इतिहास रच दिया. यह उनकी कार्यक्षमता ही थी कि साल 2006 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुना गया. तब से लेकर आज तक, उन्होंने सुरक्षा और कानून व्यवस्था की प्रणाली में कई क्रांतिकारी बदलाव किए हैं.
नक्सलियों के सामने 'आयरन लेडी' का खौफ
बी. सुमति को सिर्फ शहरी पुलिसिंग ही नहीं, बल्कि कठिन मोर्चों पर काम करने का भी अनुभव है. स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) की पहली महिला IG रहते हुए उन्होंने अपनी सटीक रणनीति और 'जीरो स्ट्रैटेजी' से 591 नक्सलियों का आत्मसमर्पण (Surrender) कराया. इस ऑपरेशन में कई बड़े नक्सली कमांडर शामिल थे. उनका यह मिशन उनकी निडरता और बेहतरीन संवाद कौशल का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है.
महिला सुरक्षा के लिए 'अंडरकवर' मिशन
हाल ही में मल्काजगिरी की पुलिस कमिश्नर बनने के बाद, सुमति ने खुद 'ग्राउंड जीरो' की हकीकत देखने का फैसला किया. वे साधारण सूट-सलवार पहनकर आधी रात को दिलसुखनगर बस स्टैंड पहुंचीं. 3 घंटे के इस सीक्रेट ऑपरेशन के दौरान उन्होंने उन खतरों का सामना किया, जो रात में अकेली महिलाएं झेलती हैं. इस दौरान उन्होंने 40 मनचलों को पकड़ा, जिसने पूरे देश में पुलिसिंग की एक नई मिसाल पेश की.
2026 की हाई-टेक पुलिसिंग का विजन
सुमति का मानना है कि आज के दौर में सिर्फ डंडा चलाने से अपराध नहीं रुकेंगे. वे मल्काजगिरी में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और 'TG QUEST' जैसे आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं. उनका ध्यान साइबर क्राइम को तेजी से सुलझाने और नशीली दवाओं (Drugs) के जाल को तकनीक के जरिए काटने पर है. वे पुलिसिंग को पारदर्शी और जनता के लिए जवाबदेह बनाने के मिशन पर काम कर रही हैं.
लड़कियों के लिए बनीं प्रेरणा
IPS बी. सुमति की कहानी हर उस युवा बच्ची के लिए सबक है जो मुश्किलों से घबरा जाती हैं. उनका जीवन सिखाता है कि अगर आपका विजन 'अथेंटिक' है और आप 'संवैधानिक' मूल्यों के प्रति ईमानदार हैं, तो आप सिस्टम में रहकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं. सुमति कहती हैं कि सफलता के लिए निरंतर पढ़ते रहना और समाज की समस्याओं को गहराई से समझना सबसे जरूरी है.फिर आज किसी भी जेंडर में हों आपको हिम्मत आ ही जाती है.