लखनऊ के गोमतीनगर इलाके के विभूतीखण्ड में पार्शवनाथ प्लानेट के नाम से लोगों को आशियाना देने का एक प्रोजेक्ट शुरू हुआ. ये प्रोजेक्ट 2006 में शुरू हुआ लेकिन अब 10 साल गुजर जाने के बाद भी 2016 तक 16 मंजिला इमारत का ये प्रॉजेक्ट कम्पलीट नही हुआ है. नतीजा ये है कि लोगों ने बिल्डर्स के खिलाफ पोस्टर भी लगाए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.
जबकि इसके पास में ही 1 साल के बाद जो प्रोजेक्ट शुरू हुआ वो कम्पलीट हो गया है. लेकिन यहां के लोग भी अपना आशियाना पाने के लिए तरस रहे हैं. आज तक ने 'ऑपरेशन गृहप्रवेश' के जरिए लोगों से जानने की कोशिश की कि बिल्डर्स ने उनके साथ किस तरह से धोखेबाजी की.
ग्राहकों की टूटती उम्मीदें
ग्राहक हेमलता का कहना है कि उन्होंने 2006 में अपना फ्लैट बुक कराया था जो कि 2010 में देने का वादा किया गया था. पिछले 8-10 साल से वो किराए पर रह रही हैं. अपना घर पाने का
उनका सपना जैसे कहीं खो गया है. वहीं नीलम भार्गव ने बताया कि उनके पति 2012 में रिटायर्ड हो गए थे. उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी इन बिल्डर को दे दी. 10 साल हो गए लेकिन वह
अभी भी किराए पर रह रहे हैं. बिल्डिंग में जो फ्लैट हैं वो अलॉट तो हो गए हैं लेकिन रहने लायक नहीं हैं. बिल्डर्स का कहना है कि इसमें जो पैसा लगाना है आप खुद लगाइए.
अब नए रेट पर पैसे मांग रहें हैं बिल्डर
ग्राहकों का कहना है कि 2006 में बुक किए गए फ्लैट जो अभी तक पूरे नहीं हुए हैं. उसके लिए बिल्डर नए रेट के हिसाब से पैसे मांग रहा है. 10 साल पहले प्रोजेक्ट डील का नुकसान ये हुआ
कि प्रोजेक्ट जब शुरू हुआ था तो 1500-1600 रुपये स्क्वायर फिट पर शुरू हुआ था. लेकिन आज इस इलाके में रेट 3200 से 3500 रुपये पंहुच गया है. बिल्डर को लग रहा है कि उसको
नुकसान हो रहा है.
जल्दबाजी में हो रहा है काम
लखनऊ के गोमती नगर के विभूती खण्ड में बन रहे पार्शनाथ प्लानेट में रहने वाले लोगों के विरोध के बाद बिल्डर ने काम तो शुरू किया है. लेकिन जल्दबाजी में जो काम किया जा रहा हैउसमें
भी तकनीकी खामियां दिखाई दे रही हैं. बाहर से सीवर लाइन बनाई जा रही है. जो बीम में छेद करके बनाई जा रही है. इससे भूकंप या इस तरह की कोई घटना होने पर दरारे आ सकती
हैं.
सना जैदी / अनूप श्रीवास्तव