राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा थाना 20 इलाके से हाल ही के दिनों में दो नाबालिग छात्रों के डीएम के ट्वीट से छेड़छाड़ कर उसे वायरल करने का मामला सामने आया था. जिसके बाद छात्रों ने ठिठुरती ठंड में करीब 8 घंटे तक डीएम आवास के सामने कान पकड़कर माफी भी मांगी थी. लेकिन डीएम को नाबालिगों की गलती इतनी नागवार गुजरी कि दोनों छात्रों को चार गंभीर धाराओं के तहत बाल सुधार गृह भेज दिया गया.
बार एसोसिएशन ने पुलिस को दी नसीहत
जब इस बात की जानकारी वकीलों के बार एसोसिएशन को मिली तो उन्होंने हस्तक्षेप किया. जिसके बाद नोएडा पुलिस को नाबालिग बच्चों पर लगाई गई धाराओं को वापस लेना पड़ा. वहीं एसोसिएशन ने पुलिस को नसीहत भी दी कि पहले जुवेनाइल एक्ट को पढ़ें, उसके बाद ही नाबालिग बच्चों पर कार्रवाई करें.
छात्रों ने कान पकड़कर मांगी थी माफी
बता दें कि बीते रविवार को डीएम के नाम से 23 और 24 दिसंबर को स्कूल बंद करने का फर्जी आदेश सोशल मीडिया पर जारी करने वाले सेक्टर-12 स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के दो छात्रों को पुलिस ने डीएम के आदेश पर गिरफ्तार किया था. उन्हें आईपीसी की धारा 420, 419, 500 सहित आईटी एक्ट 66 के तहत मुकदमा दर्ज करके बाल सुधार गृह भेज दिया गया था. जिसके बाद अपने साथियों को छुड़ाने के लिए कान पकड़कर डीएम कार्यालय के सामने बैठकर छात्रों ने माफी मांगी थी. साथ ही परिजनों ने भी डीएम और पुलिस ने उन्हें माफ करने की गुहार लगाई थी.
बैकफुट पर क्यों आई पुलिस?
यह मामला जब वकीलों के बार एसोसिएशन के कानों में पड़ा तो उनके हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने आनन-फानन में मामले की जांच की. जिसके बाद धारा 420, 419, 500 को वापस लेते हुए कोर्ट को जानकारी दी गई कि इन धाराओं जैसा कोई अपराध नहीं पाया गया है. पुलिस ने कहा कि इस मामले से स्कूल और छात्र प्रभावित नहीं हुए. मौज-मस्ती के चलते नाबालिगों ने अपने दोस्तों को मैसेज वायरल किया था.
पुलिस ने आनन-फानन में लगाईं धाराएं
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील के बताया कि पुलिस ने आनन-फानन में दोनों नाबालिगों के खिलाफ चार धाराएं जो जुवेनाइल पर मान्य ही नहीं होतीं लगाकर कोर्ट में पेश किया. उन्होंने कहा कि पुलिस को देखना चाहिए कि नाबालिगों को गिरफ्तार करने कोर्ट के सामने पेश करने और बाल सुधार गृह भेजने तक जो धाराएं लागू होती हैं वो हैं या नहीं. मामला संज्ञान में आने के बाद 419, 420 और 500 जैसी आईपीसी एक्ट की धाराओं को पुलिस ने हटा दिया क्योंकि वो लागू ही नहीं थीं. बच्चों के समर्थन में बार एसोसिएशन नहीं आता और विरोध नहीं होता तो यह धाराएं नहीं हटाई जातीं.
दोनों नाबालिगों को मिली जमानत
वकील ने बताया कि जेजे एक्ट में प्रोविजन है कि ऐसे मामले में नाबालिगों को समझाने के बाद कस्टडी उसके परिजनों को दे दी जाती है. इन बच्चों का यह कोई ऐसा क्राइम नहीं था और ना ही कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा जिसकी वजह से उन्हें हिरासत में रखा जाए. इसलिए दोनों नाबालिगों को जमानत दे दी गई.
बाल सुधार गृह से वापस आकर सहमा हुआ है छात्र
अभी तक इस बात का पता नहीं लगा है कि जो मैजेस वायरल हुआ वो उन्होंने ही किया या फिर सिर्फ फॉरवर्ड किया गया. डीएम की मानें तो उनके पूर्व आदेश को री-एडिट कर वायरल किया गया था. जिसके बाद नोएडा पुलिस ने डीएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया. 12 से 14 घंटे में वायरल करने वाले दो नाबालिगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. बाल सुधार गृह से बेल मिलने के बाद छात्र ने बताया कि उसके साथ अन्य सजा काट रहे नाबालिग अपराधियों ने रैगिंग की कोशिश की.
करीब 20 घंटे बाल गृह में रहने के बाद छात्र इतना सहमा हुआ है कि वो किसी से न बात कर पा रहा है और न ही अपनी पढ़ाई. छात्र का कहना है कि वहां के बच्चों का व्यवहार बहुत गलत है. परिजनों से बताया कि उनका बच्चा जब से घर आया है तो डरा हुआ है.उन्होंने कहा कि हम डीएम और कोर्ट में माफी के लिए अर्जी दाखिल करेंगे.
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