राम रहीम केस: बाबा, परिवार को आरोपी न बनाने पर हरियाणा सरकार को नोटिस

हाईकोर्ट ने बाबा व उसके परिवार को आरोपी न बनाए जाने को लेकर हरियाणा सरकार, हरियाणा पुलिस, राम रहीम और उसके परिवार को नोटिस भी जारी किया है.

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अभी और बढ़ेगी राम रहीम की मुसीबत अभी और बढ़ेगी राम रहीम की मुसीबत

मनजीत सहगल / आशुतोष कुमार मौर्य

  • चंडीगढ़,
  • 05 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 4:21 PM IST

अपनी दो शिष्याओं के साथ रेप के जुर्म में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम से संबंधित एक केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस को फटकार लगाई है. दरअसल कोर्ट ने हिंसा भड़काने और राम रहीम को पुलिस की हिरासत से भगाने की साजिश रचने के मामले में बाबा के परिवार को आरोपी न बनाए जाने को लेकर पुलिस को लताड़ लगाई है.

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हाईकोर्ट ने बाबा व उसके परिवार को आरोपी न बनाए जाने को लेकर हरियाणा सरकार, हरियाणा पुलिस, राम रहीम और उसके परिवार को नोटिस भी जारी किया है. यह नोटिस राम रहीम के दो चेलों- पटियाला के सुखविंदर सिंह और सिरसा के रामकुमार बिश्नोई की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी की गई है.

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि 25 अगस्त के दिन गुरमीत राम रहीम और उसका परिवार पंचकूला में मौजूद था और दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने, हिंसा भड़काने, आतंक फैलाने, आगजनी और था. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन अपराधों के लिए राम रहीम और उसका परिवार उतना ही जिम्मेवार हैं जितने कि दूसरे आरोपी.

याचिकाकर्ताओं ने साथ ही हैरानी जताई है कि पुलिस ने सात महीने बाद भी राम रहीम और उसके परिवार को आरोपी क्यों नहीं बनाया है. यहां तक कि पिछले साल नवंबर में पंचकूला की एक अदालत में पेश किए गए चालान में भी गुरमीत राम रहीम और उसके परिवार का कोई जिक्र नहीं किया गया है.

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याचिकाकर्ताओं ने साथ ही अगस्त 2017 के दौरान सिरसा स्थित डेरा के मुख्यालय से नकदी और दूसरी कीमती वस्तुएं डेरे से बाहर ले जाने वाले मामले की भी जांच की मांग की है. हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार, पुलिस, गुरमीत राम रहीम और उसके परिवार के 6 सदस्यों को 15 मई तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. उधर प्रवर्तन निदेशालय ने भी गुरमीत राम रहीम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करके उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

डेरे में चल रहे स्कूल, अस्पताल पर भी हुई सुनवाई

बुधवार की सुनवाई में हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल की. वहीं, अदालत ने डेरा में चल रहे स्कूलों और कॉलेज को जारी रखने के लिए एक कमेटी गठित करने को कहा है. इस कमेटी में सिरसा के शिक्षा अधिकारी, दो रिटायर्ड प्रिंसिपल और डीसी सिरसा शामिल होंगे. इस कमेटी के खर्चे को डेरा मैनेजमेंट वहन करेगा. इन स्कूलों और कॉलेजों को चलाने के लिए समिति से पूछकर खर्च करना होगा.

डेरे में स्थित अस्पताल, ब्लड बैंक और दूसरे मेडिकल संस्थान की देखरेख के लिए सिविल सर्जन रिपोर्ट देंगे. कोर्ट इस पर बाद में अपना फैसला सुनाएगा. सिरसा डेरे को राम रहीम द्वारा गांव बनाने के मसले पर बहस अगली सुनवाई में होगी. उधर, टाउन एंड कंट्री विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि डेरे में बनी 13 बिल्डिंग का NOC कैंसिल कर दिया गया है. इस पर कोर्ट ने सवाल खड़े किए कि आखिर कैसे एग्रीकल्चर लैंड पर इतना बड़ा डेरा खड़ा कर दिया गया. अब मामले की अगली सुनवाई 15 मई को होगी.

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