असम पुलिस बनाम सिंगापुर पुलिस... कोरोनर्स कोर्ट की रिपोर्ट से उठा बड़ा सवाल- जुबिन गर्ग की मौत हादसा थी या साजिश?

सिंगापुर कोरोनर्स कोर्ट ने जुबिन गर्ग की मौत को हादसा बताया, जबकि असम पुलिस ने इसे साजिशन हत्या करार दिया है. पोस्टमार्टम, विसरा रिपोर्ट, शराब, लाइफ जैकेट और चार्जशीट के विरोधाभासों के बीच एक सवाल अब भी खड़ा है- सच क्या है?

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सिंगापुर कोर्ट की रिपोर्ट ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं (फोटो-ITG) सिंगापुर कोर्ट की रिपोर्ट ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:07 AM IST

Zubeen Garg Murder or Accident: एक शख्स, एक मौत... लेकिन दो देशों की दो बिल्कुल उलट जांच रिपोर्टें. सिंगापुर पुलिस कहती है उसकी मौत एक दर्दनाक हादसा था, जबकि असम पुलिस का दावा है कि यह सोची-समझी साजिश और कत्ल है. असम की आवाज कहे जाने वाले जुबिन गर्ग की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कानून, जांच और राजनीति के टकराव की कहानी बन चुकी है. पोस्टमार्टम, विसरा रिपोर्ट, शराब, लाइफ जैकेट और चश्मदीदों के बयान.. हर कड़ी कुछ और इशारा करती है. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि जुबिन की मौत कैसे हुई, सवाल यह है कि आखिर सच क्या है?

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  • असम पुलिस - जुबिन गर्ग का क़त्ल हुआ 
  • सिंगापुर पुलिस - जुबिन गर्ग की मौत हादसा थी 
  • असम पुलिस - डूबते वक्त जुबिन को बचाने की कोशिश नहीं की गई 
  • सिंगापुर पुलिस - जुबिन ने खुद लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था 
  • असम पुलिस - जुबिन को साजिश के तहत शराब पिलाई गई 
  • सिंगापुर पुलिस - जुबिन खुद शराब पी रहे थे 
  • असम पुलिस - जुबिन को जानबूझ कर समंदर में उतारा गया 
  • सिंगापुर पुलिस - जुबिन खुद ही तैराकी के लिए समंदर में उतरे 
  • असम पुलिस - जुबिन के कत्ल के लिए सीधे चार लोग जिम्मेदार 
  • सिंगापुर पुलिस - जुबिन की मौत कत्ल नहीं है 

आखिरकार, जिस रिपोर्ट का हरेक को इंतजार था, वो रिपोर्ट आ गई. 14 जनवरी को सिंगापुर के कोरोनर्स कोर्ट में असम की आवाज जुबिन गर्ग की मौत पर सुनवाई थी. सिंगापुर में कोरोनर्स कोर्ट उस कोर्ट को कहते हैं जहां पर अस्वाभाविक मौत का केस आता है. चूंकि जुबिन की मौत सिंगापुर में डूबने से हुई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की वजह डूबना ही लिखा था, इसीलिए सिंगापुर पुलिस ने इसे एक क्रिमिनल केस यानी मर्डर का केस न मानते हुए जुबिन की मौत को हादसा मान कर इसकी सुनवाई कोरोनर्स कोर्ट में की थी. असल में कोरोनर्स सिंगापुर की कोर्ट का ही एक न्यायिक अफसर होता है, जो पूरे मामले की जांच करता है और फिर कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल करता है.

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14 फरवरी को पहली बार सिंगापुर की कोरोर्नस कोर्ट में कोरोनर्स यानी जुबिन की मौत की जांच कर रहे न्यायिक अफसर ने तफ्तीश के बाद कोर्ट के सामने पूरी रिपोर्ट रखी. इस रिपोर्ट के मुताबिक जुबिन गर्ग सितंबर 2025 में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने के लिए सिंगापुर आए थे. 19 सितंबर 2025 को जुबिन गर्ग अपने होटल से निकल कर कैपल बे में मरीना बीच पर एक नाव पर सवाल हुए. नाव पर करीब 20 लोग मौजूद थे. जिनमें जुबिन के दोस्त, बैंड मेंबर भी शामिल थे. चीफ इनवेस्टिगेटिंग अफसर ने कोर्ट को बताया कि नाव पर पहुंचते ही सभी ने पार्टी की. पार्टी में स्नैक्स के अलावा उन लोगों ने शराब पी. नाव पर सवार कई गवाहों ने बताया कि जुबिन ने भी शराब पी थी. एक गवाह का कहना था कि जुबिन ने भी कुछ पैग शराब ली थी. जिनमें जिन, विहस्की और गिनीज स्टाउट के कुछ सिप शामिल थे. नाव लाजरस आईलैंड और सेंट जॉन्स आईलैंड के बीच पानी में रुक गई.

इन्हीं दोनों आईलैंड के बीच जुबिन पहली बार समंदर में उतरे. समंदर में उतरने से पहले जुबिन ने बाकायदा लाइफ जैकेट पहनी हुई थी. लेकिन लाइफ जैकेट का साइज बड़ा था. जुबिन ने पानी में उतरते ही लाइफ जैकेट उतार दी. जुबिन दोबारा जब पानी में उतरने जा रहे थे, तब उन्हें फिर से एक लाइफ जैकेट दी गई. जो पहले के मुकाबले साइज में छोटी थी. लेकिन इस बार खुद जुबिन ने लाइफ जैकेट पहनने से मना कर दिया और बिना लाइफ जैकेट के वो पानी में उतर गए. जुबिन तैरते हुए लाजरस आईलैंड की तरफ बढ़ रहे थे. बिना लाइफ जैकेट के उन्हें इस तरह आगे बढ़ते देख नाव पर मौजूद लोगों ने चीखते हुए उन्हें पानी से वापस नाव पर लाने को कहा. दोस्तों को चीखते सुन जुबिन गर्ग वापस अब नाव की तरफ आने लगते हैं. लेकिन जब वो नाव की तरफ बढ़ ही रहे थे, तभी अचानक उनकी रफ्तार सुस्त पड़ गई और चेहरा पानी के अंदर जाने लगा.

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जुबिन को पानी में इस तरह बिना किसी हरकत के देख नाव पर सवार लोग पानी में कूद कर जुबिन को नाव पर ले आते हैं. उन्हें फौरन सीपीआर दी जाती है. तब तक पुलिस कोस्ट गार्ड को भी फोन कर दिया गया था. फोन आते ही पुलिस कोस्ट गार्ड एक पेट्रोल क्राफ्ट यानी स्पीड बोट रवाना कर देती है. 9 मिनट में ये पेट्रोल क्राफ्ट नाव के करीब पहुंच चुका थी. पेट्रोल क्राफ्ट पर मौजूद पुलिस वाले भी जुबिन गर्ग को सीपीआर देते हैं. लेकिन जुबिन की ना तब सांसें चल रही थी और ना ही नब्ज. इसके बाद जुबिन को वहां से करीब 6 किलोमीटर दूर मैरीना साउथ-पेयर तक लाया जाता है, वहां एंबुलेंस पहले से ही आ चुकी थी. उसी एंबुलेंस से जुबिन को सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया जाता है. लेकिन डॉक्टर जुबिन को देखते ही उन्हें मुर्दा करार देते हैं. तब शाम के सवा 5 बजे थे.

उसी सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल में जुबिन गर्ग का पोस्टमार्टम होता है. जिसमें मौत की वजह डूबना बताया गया था. जुबिन के शरीर पर जख्मों के भी कुछ निशान मिले थे. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक शरीर पर चोट के ये निशान जुबिन को पानी से बचा कर नाव पर लाने और सीपीआर देने के दौरान लगे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जुबिन के खून के नमूनो में बीपी और मिर्गी की दवाएं भी मिलीं. इसके अलावा किसी और मेडिसीन के नमूने खून में नहीं मिले.

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अलावा विसरा जांच में जुबिन गर्ग के खून के नमूनों में काफी मात्रा में शराब पाई गई. रिपोर्ट के मुताबिक जुबिन के 100 एमएल खून में 333 मिलिग्राम अल्कोहल पाया था. ये मात्रा काफी ज्यादा थी. सिंगापुर के कानून की बात करें तो सिंगापुर में 100 एमएल ब्लड में 80 मिलिग्राम तक अल्कोहल होना मान्य है. लेकिन जुबिन के खून में अल्कोहल की मात्रा तय लिमिट से 4 गुना ज्यादा थी. पुलिस ने जुबिन के होटल से 750 एमएल की व्हिस्की की एक बोतल भी बरामद की. जिसमें 43 फीसदी अल्होकल की मात्रा थी. व्हिस्की के इस बोतल में सिर्फ 25 फीसदी शराब बची थी. सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल के डॉक्टर जिन्होंने जुबिन के विसरा की जांच की, उनका कहना था कि ये पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि पानी में रहने के दौरान जुबिन को मिर्गी का दौरा पड़ा या नहीं. उन्होंने कहा कि इसके कोई सबूत नहीं मिले. यहां तक कि उनकी दांतों के बीच जुबान आ जाने के सबूत भी नहीं मिले.

जिस नाव पर जुबिन और उनके दोस्त सवार थे, उस नाव के कैप्टन ने कोर्ट के सामने अपने बयान में कहा कि उसने अपनी आंखों से देखा था, जब जुबिन पहली बार उसके नाव पर आए थे, तब भी दो लोग उन्हें सहारा दे कर ला रहे थे. क्योंकि जुबिन ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे. नाव पर आने से पहले से ही वो नशे में थे. कैप्टन के बयान के मुताबिक जुबिन के साथ आए लोगों में से कई लोग तो नाव पर चढ़ने से पहले से ही शराब पी रहे थे. कैप्टन ने बताया कि उसने नाव पर सवार सभी लोगों को जिनमें जुबिन भी थे, दो बार सेफ्टी ब्रीफिंग दी थी. एक नाव के चलने से पहले और दूसरा समंदर में पहुंचने के बाद. दोनों ही बार कैप्टन ने साफ-साफ कहा था कि लाइफ जैकेट पूरे सफर के दौरान पहने रहना जरुरी है. 

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कैप्टन ने बयान दिया कि उसने खुद देखा कि जब पहली बार जुबिन पानी में उतरे, तो अपने हाथों से अपना जैकेट उतार दिया था. इस पर कैप्टन ने फौरन जुबिन के दोस्तों से कहा कि उसे पानी से बाहर बुलाओ. कैप्टन ने बयान दिया कि मैंने जुबिन के दोस्तों से साफ-साफ कहा था कि वो नशे में है और अगर उसे पानी में उतरना है, तो उसे लाइफ जैकेट पहननी होगी. कैप्टन ने ये भी बताया कि नाव पर सवाल ज्यादातर मुसाफिर जिनमें जुबिन गर्ग भी शामिल थे, शराब पी रहे थे. नाव पर मौजूद गवाहों, कैप्टन के बयान, डॉक्टरों की राय और पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट की जांच के बाद सिंगापुर पुलिस ने 14 जनवरी को कोरोनर्स कोर्ट को ये बताया मामले की पूरी जांच करने के बाद वो इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि जुबिन गर्ग की मौत में कहीं से भी कोई साजिश नहीं है.

अब सवाल ये है कि सिंगापुर में जुबिन की मौत हुई, जिस नाव पर वो आखिरी बार सवार थे, जिस समंदर में वो डूबे, जिस अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम हुआ, जिस लैब में उनके विसरा की जांच हुई उन सारी चीजों के आधार पर सिंगापुर जुबिन की मौत को मर्डर नहीं बल्कि हादसा बता रही है. तो फिर असम पुलिस के पास वो कौन से सबूत हैं जिनके आधार पर उसने जुबिन की मौत को मर्डर बताते हुए 7 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है? 

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और तो और इन 7 में 4 को सीधे-सीधे जुबिन का कातिल ठहराया है. क्या असम पुलिस ने ये काम किसी दबाव में किया है? क्या असम सरकार असम में जुबिन गर्ग की लोकप्रियता को देखते हुए भावनाओं में बह कर या अगले चुनाव के मद्देनजर उनकी मौत के मामले को पेचीदा कर रही है? ये सवाल इसलिए भी हैं कि असम पुलिस और असम सरकार को जुबिन गर्ग की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा रिपोर्ट बहुत पहले मिल चुकी थी. गुवाहाटी में जुबिन का दोबारा पोस्टमार्टम हुआ. विसरा जांच भी दोबारा हुई. लेकिन इन दोनों ही रिपोर्ट को असम पुलिस या असम सरकार ने कभी सार्वजनिक नहीं किया. क्योंकि उन्हें पता था कि इस रिपोर्ट में अल्कोहल की बात है. इस रिपोर्ट से मौत के वक्त जुबिन के नशे में होने की बात सार्वजनिक हो जाएगी.

पर अब जब जिस सिंगापुर में जुबिन की मौत हुई थी, उसी सिंगापुर पुलिस ने लगभग ये साफ कर दिया है कि जुबिन की मौत में कोई साजिश नहीं, तो फिर जुबिन की हत्या को लेकर असम पुलिस की चार्जशीट और उसी चार्जशीट के आधार पर अदालत में जारी मुकदमे का अंजाम क्या होगा? क्या ये पुलिस, कानून और इंसाफ के साथ मजाक नहीं है? एक ही केस में एक पुलिस की रिपोर्ट कुछ और कह रही है और दूसरी पुलिस की रिपोर्ट कुछ और.. पर जाहिर है जिस जगह जुबिन की मौत हुई कायदे से पूरी क्राइम सीन उसी सिंगापुर में है. पूरी जांच उसी सिंगापुर में हुई, तो फिर असम उसी सिंगापुर पुलिस की फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ जा कर अपनी ही चार्जशीट को कैसे सही ठहरा सकती है? 

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असम पुलिस की चार्जशीट की सबसे कमजोर कड़ी ये है कि उसने जुबिन की मौत के लिए जिन 7 लोगों को चार्जशीट में जिम्मेदार ठहराया है, उनमें ही वो मौत की वजह को लेकर आपसी कड़ियों को नहीं जोड़ पा रही है. सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि अगर वाकई जुबिन का कत्ल हुआ है और चार्जशीट में नामजद वही सात लोग जुबिन के कातिल हैं तो सवाल ये है कि वो कौन सा एक मकसद था, जिसके लिए सात अलग-अलग लोग जुबिन को मारने के लिए एक साथ आ गए? चार्जशीट में कायदे से मोटिव ही क्लियर नहीं है.

चार्जशीट में जुबिन गर्ग के कातिल के तौर पर जो पहला नाम लिखा गया है, वो नाम है सिंगापुर में फेस्टिवल के ऑर्गेनाइजर श्याम कानू महंता का. दूसरा नाम जुबिन गर्ग के अपने मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा का है. तीसरा और चौथा नाम जुबिन गर्ग के बैंड में ही शामिल को म्यूजिशियन शेखर ज्योति गोस्वामी और अमृत पर्व महंता का है. यही वो चार चेहरे हैं जिनपर चार्जशीट में जुबिन गर्ग के कातिल होने के आरोप लगाए गए हैं. इस चार्जशीट में जो पांचवा नाम है वो जुबिन गर्ग के कजन और असम पुलिस के अफसर संदीपन गर्ग का है. लेकिन संदीपन पर चार्जशीट में कत्ल का इल्जाम नहीं लगाया गया है. बल्कि गैर इरादतन हत्या में शामिल होने का इल्जाम लगाया गया.

जुबिन गर्ग नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने के लिए सिंगापुर गए थे. सिंगापुर में ही 19 सिंतबर को समंदर में डूबने से उनकी मौत हो गई थी. नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल सिंगापुर के ऑर्गेनाइजर श्याम कानू महंता थे. लेकिन 19 सितंबर को जिस यार्ट या बोट पर डूबने से पहले जुबिन गर्ग पार्टी कर रहे थे उसी यार्ट पर तब श्याम कानू महंता मौजूद नहीं था. बल्कि उस दिन उस यार्ट पर जुबिन गर्ग के साथ चार्जशीट में नामजद बाकी चारों यानि सिद्धार्थ शर्मा, शेखर ज्योति, अमृत पर्व और संदीपन गर्ग मौजूद थे. चार्जशीट में पांचों आरोपियों की जुबिन गर्ग की मौत में क्या भूमिका थी बाकायदा उसका जिक्र किया गया है.

चार्जशीट के मुताबिक, जुबिन गर्ग का मैनैजर सिद्धार्थ शर्मा वो शख्स था जिसने पार्टी के नाम पर जुबिन को जानबूझ कर ज्यादा शराब पिलाई. इतना ही नहीं वो सिद्धार्थ शर्मा ही था जिसकी वजह से जुबिन गर्ग बगैर लाइफ जैकेट के समंदर में उतर गए थे. जबकि 10 साल से भी ज्यादा वक्त से जुबिन के साथ रहने वाले सिद्धार्थ शर्मा को ये पता था कि डॉक्टरों ने खास हिदायत दे रखी है कि वो हमेशा आग और पानी से दूर रहें. जुबिन गर्ग को कई बार दौरे पड़ते थे. इसी वजह से डॉक्टरों ने उन्हें पानी और आग से दूर रहने को कहा था. लेकिन जुबिन गर्ग कि हेल्थ हिस्ट्री जानने के बावजूद सिद्धार्थ शर्मा ने जानबूझ कर नशे की हालत में बिना किसी लाइफ जैकेट के उन्हें समंदर में तैरने के लिए उतार दिया. 

सिद्धार्थ शर्मा पर चार्जशीट में ये भी इल्जाम लगाया गया है कि वो जुबिन गर्ग को म्यूजिक से दूर करने की साजिश रच रहा था. इसके जरिए खुद सिद्धार्थ पैसे कमाना चाहता था. सिद्धार्थ पर ये भी इल्जाम है कि उसने जुबिन गर्ग के पैसों को जानबूझ कर अपनी मनचाही जगहों जिनमें महावीर एक्वा और होटल हेरिटेज एंड ट्रांसपोर्टेशन में इन्वेस्ट करवाया था.

जुबिन गर्ग नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल के इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर फेस्टिवल के ऑर्गेनाइजर श्याम कानू महंता के कहने पर गए थे. चार्जशीट में महंता पर ये इल्जाम लगाया गया है कि वो महंता ही थे, जिन्होंने बोट पर पार्टी करने के लिए जुबिन गर्ग को विस्की की एक बॉटल दी थी. जबकि महंता को मालूम था कि डॉक्टरों ने जुबिन को शराब पीने से मना कर रखा था. इतना ही नहीं महंता पर ये भी इल्जाम है कि उसने 19 सितंबर को बोट पर हुई उस पार्टी के ऑर्गेनाइजर को भी जुबिन की मेडिकल कंडिशन की जानकारी नहीं दी. चार्जशीट में महंता पर जो सबसे गंभीर इल्जाम है वो ये कि जिस वक्त जुबिन पानी में डूब रहे थे और उन्हें बाहर निकाला गया तब उन्हें फौरी मेडिकल मदद मुहैया नहीं कराई गई बल्कि पानी से बाहर निकालने के पूरे 75 मिनट बाद जुबिन को एंबुलेंस में अस्पताल ले जाया गया. चार्जशीट के मुताबिक, अगर ये 75 मिनट बर्बाद ना किए जाते तो जुबिन की जान शायद बचाई जा सकती थी.

चार्जशीट में जुबिन के बैंड के म्यूजिशियन और सिंगर अमृत पर्व महंता पर ये इल्जाम लगाया गया है कि उसने ही जुबिन को जानबूझ कर ज्यादा शराब पिलाई. जुबिन की नींद पूरी नहीं हुई थी. सुबह से उन्होंने कुछ खाया भी नहीं था. ये सब जानते हुए भी महंता ने उन्हें शराब पिलाई. ये सारी चीजें जानते हुए भी महंता ने जुबिन के मैनेजर, ऑर्गेनाइजर और यहां तक की जुबिन की पत्नी तक को इस बात की कोई जानकारी नहीं दी. चार्जशीट के मुताबिक वो महंता ही था जिसने जुबिन को बिना लाइफ जैकेट के पानी में उतरने के लिए उकसाया था.

जुबिन की बैंड के ड्रमर और म्यूजिशियन शेखर ज्योति गोस्वामी पर चार्जशीट में इल्जाम लगाया गया है कि जिस वक्त जुबिन गर्ग पानी में डूब रहे थे तब उनके सबसे करीब और सबसे सही पोजिशन पर गोस्वामी ही खड़ा था. वो चाहता तो वक्त रहते बड़ी आसानी से जुबिन को पानी से निकालकर उनकी जान बचा सकता था. लेकिन गोस्वामी ने ऐसा नहीं किया. अपनी आंखों से सबकुछ देखकर भी उसने जुबिन को बचाने की कोई कोशिश नहीं की. चार्जशीट में ये भी कहा गया है कि गोस्वामी भी उन लोगों में से एक था, जिसने जुबिन को नशे की हालत में होने के बावजूद पानी में उतरने के लिए उकसाने का काम किया था.

(आजतक ब्यूरो)

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