Jodhpur Sadhvi Mysterious Death: महज 25 साल की युवा साध्वी प्रेम बाईसा के साथ 28 जनवरी की शाम ऐसा क्या हुआ कि जोधपुर में उनकी रहस्यमयी मौत हो गई. मरने से कुछ देर पहले ही उन्हें एक इंजेक्शन लगाया गया था. जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत इतनी बिगड़ी कि वह सीधे मौत के मुंह में समा गईं. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, मगर तब तक बहुत देर चुकी थी. अब इस मामले में साध्वी के पिता सवालों के घेरे में आ रहे हैं. मौत की इस कहानी में कई सवाल सिर उठा रहे हैं.
- जिस पिता की 25 साल की जवान बेटी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया हो, वो शख्स बेटी की मौत के करीब 3 घंटे बाद ही अपनी बेटी की इंस्टा आईडी से बेटी का एक सुसाइड नोट पोस्ट करता है. जिसमें लिखा है कि कम से कम मुझे मौत के बाद तो न्याय मिलेगा. सवाल है आखिर क्यों?
- जिस पिता की साध्वी बेटी की संदिग्ध हालत में मौत हो जाए और साध्वी के अनुयायियों के साथ-साथ तमाम लोग मौत का सच जानने के लिए पोस्टमार्टम करवाने के हक में हों लेकिन खुद साध्वी का पिता अपनी बेटी के शव का पोस्टमार्टम करवाने से मना कर दे. सवाल है आखिर क्यों?
- बीमारी की हालत में लोग किसी डॉक्टर के पास जाते हैं. लेकिन साध्वी ने एक कंपाउंडर से ही इंजेक्शन लगवा लिया और इस इंजेक्शन के फकत 30 सेकंड के अंदर ही उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उनकी जान ही चली गई. सवाल है आखिर क्यों?
राजस्थान की जानी-मानी युवा साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को अब तीन दिनों का वक्त गुजर चुका है. पुलिस उनके शव का पोस्टमार्टम करवा कर उसे घर वालों के हवाले भी कर चुकी है, घरवालों ने अपने पैतृक गांव में साध्वी को समाधि भी दे दी है. लेकिन साध्वी की मौत का रहस्य जस का तस बना हुआ है.
28 जनवरी की शाम को जब इंजेक्शन लगाए जाने के बाद साध्वी की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई तो फिर उनके पिता वीरमनाथ और आश्रम के बाकी साधक उन्हें जोधपुर के प्रेक्षा अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक साध्वी की जान जा चुकी थी. ऐसे में सबसे पहला सवाल तो इंजेक्शन के प्रकार और उसे लगाए जाने के फैसले पर ही उठने लगा. लेकिन इसी अफरातफरी के बीच अपनी बेटी की मौत के बाद साध्वी के पिता वीरमनाथ ने अपने ही सहयोगी से बेटी के इंस्टा हैंडल पर उसका सुसाइड नोट पोस्ट करवा दिया. सवाल है कि आखिर साध्वी के पिता ने ऐसा किया ही क्यों?
साध्वी की सुसाइड नोट वाला पोस्ट आखिर साध्वी के पिता को कहां से मिला? अगर एक मिनट के लिए ये मान भी लिया जाए कि ये मामला सुसाइड का है और साध्वी ने जानबूझ कर कोई ऐसा इंजेक्शन लगवाया, जो उनके लिए जानलेवा हो सकता है, तो फिर सवाल ये भी उठता है कि क्या साध्वी के पिता को अपनी बेटी के दिमाग में चल रही इन बातों का पता था? फिलहाल वीरमनाथ इसका साफ-साफ जवाब नहीं दे रहे, लेकिन वो इतना जरूर मानते हैं कि अपनी बेटी के इंस्टा हैंडल से वो नोट उन्होंने ही पोस्ट करवाया था.
साध्वी के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं थी. उनके धर्म-कर्म और प्रवचनों का कार्यक्रम अक्सर अलग-अलग शहरों में चलता रहता था. उन्हें जब भी कोई तकलीफ होती, तो वो जोधपुर के उसी प्रेक्षा अस्पताल में अपना इलाज करवाती थी, जहां उन्हें आखिरी वक्त पर ले जाया गया था. लेकिन 28 दिसंबर को उन्होंने डॉक्टर की सलाह लेने की जगह किसी कंपाउंडर से इंजेक्शन लगवा लिया. साध्वी के इस फैसले पर अब खुद उनका इलाज करने वाले डॉक्टर भी हैरान हैं.
जाहिर है पूरा मामला ही रहस्यमयी है. ऐसे में पुलिस की सारी तफ्तीश फिलहाल साध्वी के पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है. क्योंकि कल को अगर ये पता चलता है कि मौत से पहले साध्वी को कोई जहीरीली चीज दी गई थी, तो फिर मामले में जांच की दिशा ही बदल जाएगी. उसके बाद साध्वी के आईडी से किए गए पोस्ट और वायरल वीडियो से उन्हें की गई ब्लैकमेलिंग की कोशिश का मामला भी इस इनवेस्टिगेशन का एक अहम हिस्सा होगा.
वैसे लोग बेशक प्रेम बाईसा के पिता की भूमिका को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं, लेकिन पिता खुद इस मामले में सही-सही जांच करवा कर अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने की मांग कर रहे हैं. संत वीरमनाथ ने साध्वी के आखिरी घड़ियों की बात भी खुल कर बताई. अपनी मौत से पहले और आखिरी नोट में भी साध्वी ने अपने लिए इंसाफ की मांग की थी. असल में साध्वी का कहना था कि उन्हें और उनके पिता को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों ने उनका निजी वीडियो वायरल कर दिया था, जिसमें उन्हें इंसाफ नहीं मिला.
अब इससे पहले कि हम और आगे बढ़ें साध्वी प्रेम बाईसा का इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया ये सुसाइड नोट देखिए, जिसने इस मामले को बुरी तरह उलझा दिया है. क्योंकि उनका ये सुसाइड नोट उनकी मौत के करीब तीन घंटे बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया है.
ऐसे में सवाल है, आखिर कैसे? लेकिन इस सवाल का जवाब जानने से पहले आइए साध्वी की पोस्ट पर नजर डालते हैं-
"मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जीया. दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है. आज अंतिम श्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली, मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं व पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा. मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा. अग्निपरीक्षा के लिए निवेदन किया लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा, लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है. मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा."
जाहिर है, इस सुसाइड नोट में वो अपनी मौत की बात भी लिख रही हैं और साथ अग्निपरीक्षा देने की पेशकश करने का भी जिक्र कर रही हैं, वो पेशकश... जो वो पहले भी वायरल वीडियो के सामने आने के बाद कर चुकी थी. यानी उनकी मौत का कनेक्शन उस वायरल वीडियो से भी जुड़ता है, जिसने उनकी और उनके गुरु की जिंदगी में भूचाल ला दिया था.
मगर, सबसे बड़ा पेच ये है कि उनकी मौत शाम करीब साढ़े 5 बजे के आस-पास हुई और इंस्टाग्राम पर ये पोस्ट रात करीब साढ़े 9 बजे किया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये वाकई उनका सुसाइड नोट है या फिर किसी ने मामले को उलझाने के लिए उनकी मौत के बाद इसे सोशल मीडिया में पोस्ट किया है. अब ऐसे में ये भी जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर वायरल वीडियो का वो मामला क्या था?
13 जुलाई 2025
यही वो तारीख थी, जब साध्वी प्रेम बाईसा का एक प्राइवेट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इस वीडियो को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए जाने लगे. उस वीडियो की तस्वीरों के मंज़र के बारे में बताएं तो ये वीडियो जोधपुर के उसी कुटीर आश्रम का बताया जाता है, जहां साध्वी प्रेम बाईसा की रिहायश थी. वीडियो की तारीख के मुताबिक ये तस्वीरें 8 जनवरी 2021 की रात दस बज कर 22 मिनट की हैं.
वीडियो में साध्वी एक कमरे में बिस्तर पर लेटी नजर आ रही हैं, जबकि कमरे में आती-जाती एक महिला उनसे बातचीत कर रही है. इसी बीच भगवा वस्त्र पहने, सिर पर पगड़ी लगाए एक शख़्स सीधे साध्वी के कमरे में पहुंचता है और साध्वी के गालों को छू कर उन्हें पुचकारने लगता है. इसके बाद साध्वी बिस्तर से उठती है और उस आदमी के गले लग जाती हैं. वो शख्स भी साध्वी को आलिंगन करते हुए थोड़ी देर के लिए उन्हें गोद में उठा लेता है.
बस, इसी वीडियो के बहाने सोशल मीडिया पर लोग साध्वी और उनके साथ नजर आ रहे शख्स को जज करने लगते हैं और उनके आचरण पर सवाल उठाए जाने लगते हैं. असल में वीडियो में नजर आ रहा ये शख्स कोई और नहीं बल्कि साध्वी का गुरु वीरमनाथ है, जिसे साध्वी अपना पिता मानती हैं. लेकिन पिता के साथ साध्वी की इन निजी तस्वीरों ने साध्वी और उनके गुरु के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए थे.
ये और बात है कि तब साध्वी ने इस वीडियो के लीक होने पर ना सिर्फ आश्रम के ही कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी, बल्कि इसे लेकर अपनी सफाई भी दी थी. साध्वी ने तब बताया था कि ये तस्वीरें तब की हैं, जब वो गहरे अवसाद में थीं और उनके पिता उनसे गले लग कर उन्हें ढांढस बंधा रहे थे.
साध्वी ने इस वीडियो को लेकर जो शिकायत दी थी, उसमें उन्होंने बताया कि उन्हें बदनाम करने के इरादे से उनके आश्रम के ही कुछ लोगों ने साजिशन इस वीडियो को वायरल किया था और इसे वायरल होने से रोकने के लिए उनसे 20 लाख रुपये की मांग की थी. साध्वी ने जिन तीन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया था, उसमें उनके आश्रम में काम करने वाले जोगाराम, उसकी पत्नी कृष्णा और ड्राइवर रमेश के अलावा दो और लोग शामिल थे.
साध्वी ने तब बताया था कि इन्हीं लोगों ने आश्रम में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चोरी से निकलवाई और उस फुटेज को उन्हें बदनाम करने के इरादे से वायरल कर दिया और ऐसा करने से पहले उनसे अवैध वसूली की कोशिश भी हुई. इस वीडियो के वायरल होने के बाद साध्वी, उनके गुरु वीरमनाथ और आश्रम की साख को बट्टा तो लगा ही, साध्वी के कई असाइनमेंट भी कैंसल हो गए.
इस वीडियो ने उनकी जिंदगी में कितना असर डाला, इसका अंदाजा आप बस इसी बात से लगाइए कि साध्वी ने इस वीडियो के सामने आने के बाद कथित तौर पर शंकराचार्य समेत दूसरे बड़े संतों से बात की थी और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा तक देने की बात कही थी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं और अब साध्वी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए उनके सुसाइड नोट उनकी मौत को साध्वी के इसी वायरल वीडियो से जोड़ कर रख दिया.
(जोधपुर से डॉ. अशोक शर्मा का इनपुट)
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