प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और उनके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है. जांच एजेंसी ने इस मामले में कई अहम ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है.
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला लंबे समय से जांच के दायरे में था और अब इसमें ठोस सबूत जुटाने की दिशा में कार्रवाई तेज की गई है. ED की टीम लगातार संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच कर रही है. इस केस में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है.
दरअसल, यह पूरा मामला CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, चंडीगढ़ द्वारा दर्ज किए गए प्रेडिकेट ऑफेंस से जुड़ा है. आरोप है कि एक आपराधिक केस को सुलझाने के बदले एक बिचौलिए के जरिए अवैध रिश्वत की मांग की गई थी. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति मौजूद है. इसी आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की.
एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध तरीके से अर्जित धन को कहां और कैसे निवेश किया गया. ED ने सेक्शन 17 के तहत कुल 11 ठिकानों पर छापेमारी की है. इनमें चंडीगढ़ के 2, लुधियाना जिले के 5, पटियाला के 2, नाभा का 1 और जालंधर का 1 स्थान शामिल है. ये सभी ठिकाने आरोपी, उनके करीबी सहयोगियों और संदिग्ध बेनामी संपत्ति धारकों से जुड़े बताए जा रहे हैं.
छापेमारी के दौरान टीम ने कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य अहम सबूत जुटाए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इनसे मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क को समझने में मदद मिलेगी. इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पता लगाना, बेनामी संपत्तियों की पहचान करना और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े ठोस सबूत इकट्ठा करना है.
ED की टीम अब जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं और कई अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल, जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है.
मुनीष पांडे