Vikas Nagar Tragedy: मरते हुए युवक का मोबाइल चुराकर भागने वाले आरोपी गिरफ्तार, CCTV में कैद है शर्मनाक करतूत

दिल्ली के विकास नगर में मरते हुए युवक का मोबाइल चुराकर भागने वाले दोनों आरोपियों को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर ही लिया. शर्मसार कर देने वाली ये वारदात CCTV में कैद हो गई थी. पुलिस ने मृतक लड़के की शिनाख्त भी कर ली है. पढ़ें इस मामले की पूरी कहानी.

Advertisement
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है (फोटो-ITG) पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है (फोटो-ITG)

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:52 PM IST

दिल्ली के विकास नगर की वो सुबह अभी भी लोगों को याद होगी. जब सड़क पर एक 18 साल का युवक तड़प रहा था. उसे मदद की जरूरत थी, लेकिन उसे मदद नहीं मिली. जो उसके पास रुके, वो मददगार नहीं, बल्कि मोबाइल चुराने वाले निकले. मोबाइल चुराया और फरार हो गए. सीसीटीवी कैमरे में कैद इस घटना ने इंसानियत को कटघरे में खड़ा कर दिया था. इस मामले में अब जाकर दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. मृतक युवक की शिनाख्त भी हो गई है.

Advertisement

30 जनवरी 2026, सुबह करीब 4 बजे
उस वक्त आउटर दिल्ली के रनहोला थाना क्षेत्र के विकास नगर में सड़कें सुनसान थीं. तभी एक युवक अचानक चक्कर खाकर सड़क पर गिर पड़ा. वह तड़प रहा था, जैसे उसे दिल का दौरा पड़ा हो या मिर्गी का अटैक आया हो. आसपास कोई शख्स मौजूद नहीं था, जो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचा पाता या उसकी मदद करता. बस एक सीसीटीवी कैमरा उसे देख रहा था. इस दौरान वह जमीन पर पड़ा रहा और जिंदगी धीरे-धीरे उससे दूर जा रही थी.

शर्मसार करने वाली करतूत
कुछ देर बाद एक स्कूटी वहां से गुजरती दिखी. उस पर दो युवक सवार थे. उन्होंने सड़क पर पड़े युवक को देखा और स्कूटी रोक दी. एक पल को लगा कि शायद अब उसे मदद मिलेगी. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ. स्कूटी से उतरकर आए एक युवक ने जो किया, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया. वो जमीन पर तड़प रहे उस शख्स की मदद करने की जगह, उसके मोबाइल को तलाश रहा था. उसकी जेब टटोल रहा था.

Advertisement

मोबाइल चोरी और जेब की तलाशी
सीसीटीवी में साफ दिख रहा है कि आरोपी युवक ने जमीन पर पड़े लड़के की जेब से उसका मोबाइल निकाल लिया. इसके बाद वह कुछ कदम आगे बढ़ा. फिर जैसे उसे शक हुआ कि जेब में पैसे भी हो सकते हैं. वह दोबारा लौटा और तड़प रहे लड़के की जेब तलाशने लगा. इस बीच अचानक उसकी नजर ऊपर लगे उसी सीसीटीवी कैमरे पर पड़ी, जिसमें ये पूरी वारदात कैद है.

कैमरा देखते ही भागे आरोपी
जैसे ही आरोपी की नजर कैमरे पर गई, उसके चेहरे पर घबराहट साफ दिखी. वह तुरंत अपने स्कूटी पर बैठे अपने साथी के पास भागा. फिर दोनों स्कूटी पर बैठे और वहां से फरार हो गए. लेकिन पीछे सड़क पर वही युवक पड़ा रहा, जो अब आखिरी सांसें गिन रहा था.

मृतक युवक की पहचान
आउटर दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा ने फोन पर जानकारी देते हुए 'आज तक' को बताया कि पुलिस जांच के बाद मृतक की पहचान तरुण चंद्र सरकार के रूप में हुई. उसकी उम्र महज 18 साल थी. वह PS रन्होला क्षेत्र का रहने वाला था. उसका वर्तमान पता एल-एक्सटेंशन ब्लॉक, मोहन गार्डन बताया गया है.

कौन था तरुण?
तरुण के असली पिता गुलशन खटियाल थे, जिनका 2016 में निधन हो चुका है. साल 2011 में उसकी मां की शादी प्रसेनजीत सरकार से हुई थी. प्रसेनजीत CCTV इंस्टॉलेशन और कंप्यूटर से जुड़ा निजी काम करते हैं. तरुण की मां वीना गुजरात में डेकोरेटर का काम करती हैं. उसके परिवार में तीन और भाई-बहन हैं- चिराग (24), दामिनी (22) और कनिका (19). तरुण घर में सबसे छोटा था और महज दूसरी कक्षा तक ही पढ़ा था.

Advertisement

घर छोड़ने की आदत
परिवार ने बताया कि तरुण को मिर्गी के दौरे पड़ते थे. उसका इलाज भी कराया गया था. पिछले एक साल से वह घर छोड़कर सड़कों पर रह रहा था. वह माता की चौकी और जागरण में छोटी-मोटी सेवा करता था. वह मोहन गार्डन और विकास नगर इलाके में अलग-अलग जगहों पर सोता था. परिजनों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में बार-बार घर छोड़ना उसकी आदत ही बन गया था.

CCTV से खुली आरोपियों की पोल
इस घटना के बाद जब तरुण की मौत का CCTV फुटेज सामने आया, तो पुलिस हरकत में आ गई. वीडियो में आरोपियों की हर हरकत साफ दिख रही थी. कैसे वे आए, कैसे मोबाइल निकाला और कैसे भागे. इस फुटेज ने पूरे मामले को नया मोड़ दिया. अब ये सिर्फ मौत नहीं, बल्कि संवेदनहीनता का मामला बन गया था.

कौन हैं दोनों आरोपी?
DCP सचिन शर्मा के मुताबिक, आरोपियों की पहचान नीरज और अनिल रावत के रूप में हुई है. दोनों बापरोला इलाके के रहने वाले हैं. एक की उम्र 19 साल और दूसरे की 27 साल. दोनों छोटे-मोटे चोर बताए जा रहे हैं. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही उनके पास से तरुण का मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है. अब उनसे पूछताछ की जा रही है.

Advertisement

अभी बाकी हैं ये सवाल
अगर उस सुबह किसी ने तरुण को अस्पताल पहुंचा दिया होता, तो क्या उसकी जान बच सकती थी? क्या मोबाइल चुराने की बजाय मदद की जाती, तो कहानी कुछ और होती? यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि इंसानियत के गिरते स्तर का है. अब दोनों आरोपी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन वो सुबह दिल्ली कभी नहीं भूल पाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement