तुर्कमान गेट हिंसा: 8 आरोपियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित, 12 फरवरी को होगा ऐलान

तुर्कमान गेट हिंसा मामले में गिरफ्तार आरोपियों को लेकर दिल्ली की अदालत ने बड़ा कदम उठाया है. पत्थरबाजी और पुलिस पर हमले के आरोप झेल रहे आठ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अदालत ने साफ किया है कि इस संवेदनशील मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद ही निर्णय दिया जाएगा.

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मस्जिद तोड़ने की अफवाह से भड़की हिंसा, दिल्ली कोर्ट की अहम सुनवाई. (File Photo: ITG) मस्जिद तोड़ने की अफवाह से भड़की हिंसा, दिल्ली कोर्ट की अहम सुनवाई. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:56 PM IST

दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा के मामले में एक अदालत ने आठ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला 12 फरवरी के लिए सुरक्षित रख लिया है. यह मामला पिछले महीने फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटना से जुड़ा है. इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे.

एडिशनल सेशन जज भूपिंदर सिंह की कोर्ट ने आठ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है. इनमें मोहम्मद अदनान, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद काशिफ, समीर हुसैन, मोहम्मद उबैदुल्ला, मोहम्मद अरीब, मोहम्मद नावेद और मोहम्मद अथर शामिल हैं. कोर्ट ने कहा कि गुरुवार को चार अन्य आरोपियों से जुड़े तर्कों पर सुनवाई की जाएगी.

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इस मामले में अन्य चार मोहम्मद आरोपी अदनान, इमरान, आमिर हमजा और मोहम्मद आदिल हैं. सोमवार को अदालत ने विशेष रूप से आरोपी मोहम्मद अदनान की ओर से रखे गए तर्कों को सुना, जिसमें उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए. अदनान के वकील ने दलील दी कि शुरुआती FIR में हत्या के प्रयास का कोई आरोप नहीं था. 

उन्होंने कहा कि शुरुआती FIR में दर्ज सभी धाराएं जमानती थीं. सात साल से कम सजा का प्रावधान था. ऐसे में अर्नेश कुमार दिशानिर्देश लागू होने चाहिए. आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए. बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि मोहम्मद अदनान के खिलाफ हिंसा में शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं है. गिरफ्तारी के समय कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी.

उनका आरोप है कि मोहम्मद अदनान की मां और बहन को घर के एक कमरे में बंद कर दिया गया था. गिरफ्तारी वारंट पर परिवार के सदस्य की बजाय एक परिचित से हस्ताक्षर कराए गए थे. वकील ने पुलिस हिरासत में हिंसा का आरोप भी लगाया. हालांकि, अदनान के शरीर पर बाहरी चोटें नहीं पाई गईं, लेकिन उसने शारीरिक दर्द की शिकायत दर्ज कराई थी. 

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वहीं सह-आरोपी मोहम्मद इमरान के मामले में मजिस्ट्रेट ने नए MLC का आदेश दिया था, क्योंकि उसके शरीर पर ऐसी चोटें मिली थीं जो पहले दर्ज नहीं थीं. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिस पुलिस सब-यूनिट में आरोपियों को रखा गया था, वहां CCTV कैमरे मौजूद नहीं थे, जिससे हिरासत के दौरान हुई हिंसा का कोई वीडियो रिकॉर्ड नहीं है. 

इसके अलावा वकीलों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 जोड़ने की जानकारी समय पर नहीं दी गई, जिससे वे गलत फोरम में याचिका दाखिल करने को मजबूर हुए. अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने इन दावों का विरोध करते हुए कहा कि गिरफ्तारी मेमो के ज़रिए आरोपियों को नई धारा की जानकारी दी गई थी. 

बचाव पक्ष ने समानता के आधार पर जमानत की मांग करते हुए यह भी बताया कि सह-आरोपी उबेदुल्ला को एक सत्र न्यायालय पहले ही जमानत दे चुका है. यह मामला 6 और 7 जनवरी की दरमियानी रात का है, जब रामलीला मैदान इलाके में मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया जा रहा था. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई कि मस्जिद को गिराया जा रहा है.

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