साल 2019 के पुलवामा आतंकी हमले ने पूरे देश को दहला कर रख दिया था. अब उसी आतंकी घटना से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है. खबर है कि इस हमले के कथित मास्टरमाइंड आतंकी हमजा बुरहान को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी. इस हमले में हमजा की मौत हो गई. हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान में छिपकर रह रहा था और खुद को एक शिक्षक बताता था. पुलवामा हमला भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक माना जाता है, जिसमें 40 CRPF जवान शहीद हुए थे. लेकिन हमला अकेला गुनहगार नहीं था, और भी आतंकी इस साजिश में शामिल थे.
क्या हुआ था उस दिन?
भारत की जांच एजेंसियों के अनुसार, पुलवामा हमले की पूरी साजिश पाकिस्तान में बैठकर रची गई थी. जिसमें हमजा बुरहान और उसके साथी शामिल थे. दरअसल, 14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था. विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी को सुरक्षा बलों के वाहन से टकराया गया था. इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे और कई अन्य घायल हुए थे. हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी. बाद में जांच में सामने आया कि इस हमले की तैयारी कई महीनों से चल रही थी.
NIA ने की जांच
राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने इस मामले की विस्तृत जांच की थी. एजेंसी ने करीब 13,500 पन्नों की चार्जशीट जम्मू की विशेष अदालत में दाखिल की थी. इस चार्जशीट में कुल 19 आरोपियों को नामजद किया गया था. जिनमें पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के बड़े आतंकी सरगना भी शामिल थे. NIA ने इलेक्ट्रॉनिक सबूत, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट और गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ के आधार पर पूरी साजिश का खुलासा किया था.
जांच एजेंसी के मुताबिक पुलवामा हमले की साजिश पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और वहां की खुफिया एजेंसी ISI के समर्थन से रची गई थी. जांच में यह भी सामने आया था कि हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों, गाड़ियों और आतंकियों की गतिविधियों को सरहद पार से निर्देश मिल रहे थे. NIA ने अपनी चार्जशीट में कई पाकिस्तानी आतंकियों और उनके सहयोगियों की भूमिका का विस्तार से जिक्र किया था.
कई आतंकियों का खात्मा
NIA की जांच के अनुसार इस मामले में शामिल 19 आरोपियों में से कई आतंकियों को सुरक्षा बलों ने अलग-अलग ऑपरेशन में मार गिराया. इनमें हमले का मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद उमर फारूक, कारी यासिर, मुदस्सिर खान और सज्जाद भट जैसे आतंकी शामिल थे. ये सभी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे और कश्मीर में सक्रिय थे. सुरक्षा बलों ने 2019 और उसके बाद चलाए गए अभियानों में इन आतंकियों को खत्म कर दिया था. कुल मिलाकर हमजा बुरहान के अलावा मसूद अजहर के रिश्तेदार अब्दुल रशीद गाजी सहित कई प्रमुख आतंकवादी सुरक्षा बलों या अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा मारे जा चुके हैं.
सात आतंकी गिरफ्तार
इसके अलावा सात आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था. इन लोगों पर आतंकियों को पनाह देने, हथियार और रसद पहुंचाने, विस्फोटक छिपाने और हमले की योजना में सहयोग करने के आरोप लगे थे. जांच में कई स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स यानी OGW की भूमिका भी सामने आई थी. कुछ आरोपियों ने आत्मघाती हमलावर आदिल डार का वीडियो रिकॉर्ड करने और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने में मदद की थी.
फरार आरोपी
अब भी इस मामले में चार बड़े आरोपी फरार बताए जाते हैं. इनमें जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर, उसका भाई मौलाना रऊफ असगर, अम्मार अल्वी और आशिक अहमद नेंग्रू शामिल हैं. भारतीय एजेंसियों के मुताबिक ये सभी पाकिस्तान में छिपे हुए हैं. मसूद अजहर लंबे समय से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. पुलवामा हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकियों को संरक्षण देने का मुद्दा भी उठाया था.
हमले का जवाब
पुलवामा हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाया. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी, जिसे पुलवामा हमले का जवाब माना गया. इस कार्रवाई के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था. पुलवामा हमला आज भी देश की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का एक बड़ा प्रतीक माना जाता है.
भारतीय एजेंसियां अलर्ट
अब हमजा बुरहान की मौत की खबर सामने आने के बाद पुलवामा हमले से जुड़े नेटवर्क पर फिर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है. लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि पुलवामा हमले के कई गुनहगार अब भी खुले घूम रहे हैं. भारत की जांच एजेंसियां लगातार इन आतंकियों और उनके नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं.
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