महाराष्ट्र: 13 साल की बच्ची घर से भागी, डैम के पास से सकुशल बरामद, वजह जानकर पुलिस भी हैरान

पालघर में 13 साल की बच्ची एक गलतफहमी के कारण अपने घर से भाग गई. हालांकि कुछ घंटे बाद पुलिस ने उसे एक डैम के पास सुरक्षित ढूंढ निकाला और काउंसलिंग के बाद उसके परिवार को सौंप दिया. पढ़ें ये हैरान करने वाली कहानी.

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पुलिस ने लड़की को सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया है (सांकेतिक फोटो-ITG) पुलिस ने लड़की को सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया है (सांकेतिक फोटो-ITG)

aajtak.in

  • पालघर,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:09 PM IST

महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 13 साल की बच्ची घर से भाग गई. वजह थी उसके मन में बैठी एक गलतफहमी. उसे लगता था कि उसकी मां उसकी छोटी बहन को ज्यादा प्यार करती है. इसी सोच ने उसे अंदर से तोड़ दिया और उसने घर छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठा लिया. यह घटना न सिर्फ परिवार के रिश्तों की संवेदनशीलता को दिखाती है बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता को भी उजागर करती है.

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यह पूरा मामला पालघर जिले के साफले पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है, जहां गुरुवार को वो 13 साल की बच्ची अचानक अपने घर से गायब हो गई. बच्ची हंजरोलि गांव की रहने वाली थी और पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव से गुजर रही थी. पुलिस के मुताबिक, वह इस गलत धारणा में थी कि उसकी मां उसकी छोटी बहन को उससे ज्यादा महत्व देती है. इसी भावना ने उसे इतना आहत कर दिया कि उसने घर छोड़ने का फैसला कर लिया.

बच्ची के लापता होने की खबर मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया. स्थानीय पुलिस ने तुरंत मामले को गंभीरता से लेते हुए सर्च ऑपरेशन शुरू किया. गांव के लोग भी इस तलाश में पुलिस के साथ जुड़ गए. पुलिस को अंदेशा था कि बच्ची भावनात्मक रूप से काफी कमजोर स्थिति में है और वह खुद को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए हर मिनट बेहद अहम था.

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काफी तलाश के बाद पुलिस ने बच्ची को ड्रांजरोलि डैम के पास से बरामद कर लिया. पालघर के जिला पुलिस अधीक्षक यातिश देशमुख के अनुसार, उनकी पहली प्राथमिकता बच्ची की सुरक्षा थी. राहत की बात यह रही कि बच्ची सुरक्षित और बिना किसी शारीरिक नुकसान के मिली. इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस और स्थानीय लोगों की सतर्कता और तेजी ने बड़ी घटना होने से रोक दिया.

रेस्क्यू के बाद बच्ची को तुरंत काउंसलिंग के लिए भेजा गया, जहां विशेषज्ञों ने उसकी मानसिक स्थिति को समझा और उसके अंदर चल रहे नकारात्मक विचारों को दूर करने की कोशिश की. काउंसलिंग के बाद बच्ची को सुरक्षित उसके माता-पिता के हवाले कर दिया गया. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के मामलों में बच्चों की भावनाओं को समझना और समय पर संवाद करना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

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