पहलगाम आतंकी हमले का अहम सुराग GoPro कैमरा, जांच के लिए चीन से मदद लेगी NIA

पहलगाम आतंकी हमले की जांच में NIA को GoPro Hero 12 Black कैमरा मिला है, जो साजिश और रेकी से जुड़ा अहम सबूत माना जा रहा है. कैमरे की जांच के लिए NIA चीन को लेटर रोगेटरी भेजेगी. पढ़ें जांच से जुड़े इस मामले की पूरी कहानी.

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पहलगाम हमले में यह कैमरा अहम सबूत माना जा रहा है (फाइल फोटो-ITG) पहलगाम हमले में यह कैमरा अहम सबूत माना जा रहा है (फाइल फोटो-ITG)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

पहलगाम के बैसरन मैदान में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इस हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था. घटना जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में हुई थी और इसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े पर्यटक हमलों में गिना जा रहा है. जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को एक अहम इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिला है, जो पूरे मामले की दिशा बदल सकता है. यह सबूत एक हाई-टेक कैमरा है, जिसे आतंकी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है.

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TRF ने ली जिम्मेदारी
इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है. अब इस मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक GoPro Hero 12 Black कैमरा (सीरियल नंबर C3501325471706) मिला, जो हमले से पहले की रेकी, मूवमेंट और आतंकी मॉड्यूल की तैयारियों से जुड़ा अहम सबूत माना जा रहा है.

एजेंसी का मानना है कि यह कैमरा हमले से पहले की रेकी, आतंकियों की मूवमेंट और मॉड्यूल की तैयारियों को रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किया गया हो सकता है. यही वजह है कि अब यह कैमरा जांच की सबसे अहम कड़ी बन गया है.

चीन कनेक्शन और तकनीकी पड़ताल
जांच में सामने आया है कि यह कैमरा 30 जनवरी 2024 को चीन के डोंगगुआन शहर में एक्टिवेट हुआ था. निर्माता कंपनी GoPro BV ने NIA को जानकारी दी कि यह कैमरा चीन की कंपनी AE Group International Limited को सप्लाई किया गया था. हालांकि, कंपनी के पास अंतिम खरीदार या आगे के लेन-देन की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में कैमरे के खरीदार, उपयोगकर्ता और तकनीकी रिकॉर्ड का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए बेहद जरूरी हो गया है.

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लेना होगा अंतरराष्ट्रीय सहयोग
कैमरे से जुड़े तथ्यों की पुष्टि के लिए NIA चीन को ‘लेटर रोगेटरी’ भेजने की तैयारी में है. गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद जम्मू की विशेष अदालत ने 2 मार्च को एजेंसी को चीन की न्यायिक प्राधिकरण से मदद लेने की अनुमति दे दी है. भारत और चीन के बीच MLAT समझौता नहीं होने के कारण, सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ सम्मेलन यानी United Nations Convention against Transnational Organized Crime (UNTOC) के प्रावधानों का सहारा लिया जाएगा. 

माना जा रहा है कि यह कैमरा साजिश की कड़ियों, साक्ष्य श्रृंखला (Chain of Custody) और आतंकी मॉड्यूल की पहचान स्थापित करने में NIA के लिए निर्णायक साबित हो सकता है.

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